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इस रूसी ने इमारतों को पत्तों की तरह बहते देखा

Mon, 01 Jul 2013 05:09 PM IST
वेद विलास उनियाल
वेद विलास उनियाल Updated Mon, 01 Jul 2013 05:09 PM IST
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when river shattered every building around her

भारतीय दर्शन से प्रभावित रूस की यह महिला अपना नाम ओम प्रिया बताती है। गीता और भाषा योग वशिष्ठ का अध्ययन कर चुकी ओम प्रिया जब भारत के धामों को देखने निकलीं, तो उन्होंने वह देखा, जिसकी कल्पना ख्वाबों में भी नहीं की थी।

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रात में जहां वो सोई हुई थी, वहां उन्हें अचानक लोगों की डरवानी चीखें सुनाई दीं। अपनी बगल की दो बड़ी इमारतों को उन्होंने पानी में पत्तों की तरह बहते देखा। चिन्याली सौड़ हवाई पट्टी के राहत शिविर में मनेरी से पहुंची ओम प्रिया भारतीय सेना की दिलेरी पर फिदा हो गई हैं।
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बहुत कुछ देखा, बहुत कुछ झेला, लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी वह सेना को शुक्रिया कहना नहीं भूलतीं। उत्तरकाशी की आपदा से डरी-सहमी ओम प्रिया को केदारनाथ की तरफ गए अपने दो साथियों का पता भी लगाना हैं।
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अभी चिन्याली सौड़ में वह अपने तीन साथियों के साथ पहुंची है। ओम प्रिया शिविर में भी माला जप कर अपने साथियों की कुशलता की कामना कर रही हैं। वह बताती है कि 16 जून की रात बहुत डरावनी थी। वह मनेरी में एक आश्रम में सोई थीं।


शोर सुना, तो बाहर दौड़ीं। बच्चे और महिलाएं चीख रहे थे, नदी उफान पर थी और कुछ ही देर में सामने की रिहायशी इमारत ढहकर पानी में बहने लगी। इस घटना ने उन्हें भीतर तक दहलाया जरूर है, लेकिन वह फिर भी इन धामों में आना चाहती है।

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