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कर्ण महाराज के चौथ पर्व पर ग्रामीणों ने की पूजा
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मोरी तहसील के धेवरा गांव में कर्ण मंदिर में प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह में मनाया जाने वाला चौथ पर्व इस वर्ष भी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर रात्रि जागरण में ग्रामीण तांदी, रासो आदि नृत्य के साथ मनौती मांगते हैं।
ग्रामीण इष्ट देव की पूजा अर्चना के लिए जौ की हरियाली लेकर मंदिर में पहुंचते हैं। कर्ण महाराज एवं रेणूका माता के मंदिर में हरियाली को श्रद्धालुओं में बांटी जाती है। हरकीदून प्रोटेक्शन एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के सचिव चैन सिंह रावत ने बताया कि मंदिर प्रांगण में बाजगी ढोल रणसिंघे वादन कर रात्रिभर क्षेत्र के ग्रामीण, महिलाएं मंदिर के चारों ओर तांदी, रासो नृत्य करते हैं। रातभर यहां जागरण होता है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष राजमोहन रांगड़ ने बताया कि वर्ष 1980 से वे मंदिर समिति के अध्यक्ष है। कर्ण महाराज सिंगतूर एवं गड़ूगाड पट्टी के 24 गांव में प्रत्येक वर्ष क्षेत्र की खुशहाली एवं समृद्धि के लिए भ्रमण पर भी रहते हैं। महाराज एक गांव में तीन माह के प्रवास में रहते हैं। एक गांव की बारी लगभग 12 वर्ष में आती है। इस अवसर पर चैन सिंह रावत, शीशपाल सिंह रावत, हरिमोहन रांगड़, जगदीश रांगड, किताब सिंह, अनिल रांगड, अरविंद चौहान, गुड्डू रांगड, किशन सिंह आदि मौजूद थे।
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ग्रामीण इष्ट देव की पूजा अर्चना के लिए जौ की हरियाली लेकर मंदिर में पहुंचते हैं। कर्ण महाराज एवं रेणूका माता के मंदिर में हरियाली को श्रद्धालुओं में बांटी जाती है। हरकीदून प्रोटेक्शन एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के सचिव चैन सिंह रावत ने बताया कि मंदिर प्रांगण में बाजगी ढोल रणसिंघे वादन कर रात्रिभर क्षेत्र के ग्रामीण, महिलाएं मंदिर के चारों ओर तांदी, रासो नृत्य करते हैं। रातभर यहां जागरण होता है।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष राजमोहन रांगड़ ने बताया कि वर्ष 1980 से वे मंदिर समिति के अध्यक्ष है। कर्ण महाराज सिंगतूर एवं गड़ूगाड पट्टी के 24 गांव में प्रत्येक वर्ष क्षेत्र की खुशहाली एवं समृद्धि के लिए भ्रमण पर भी रहते हैं। महाराज एक गांव में तीन माह के प्रवास में रहते हैं। एक गांव की बारी लगभग 12 वर्ष में आती है। इस अवसर पर चैन सिंह रावत, शीशपाल सिंह रावत, हरिमोहन रांगड़, जगदीश रांगड, किताब सिंह, अनिल रांगड, अरविंद चौहान, गुड्डू रांगड, किशन सिंह आदि मौजूद थे।
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