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नया पुल बनाने और काम चलाऊ व्यवस्था जारी रखने की मांग
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Sat, 05 Dec 2015 09:38 PM IST
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भागीरथी की बाढ़ से जर्जर तिलोथ पुल के एक हिस्से को ढहा कर नया पुल बनाने के लिए आवाजाही की काम चलाऊ व्यवस्था बंद होने के अमर उजाला द्वारा किए गए खुलासे के बाद भाजपा व उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठन हरकत में आया है।
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नया पुल बनाने के बजाए 60 मीटर स्पान वाले पुल के 42 मीटर हिस्से पर 8.39 करोड़ खर्च करने पर सवाल खड़ा करते हुए इन संगठन के नेताओं ने शुक्रवार को डीएम को ज्ञापन देकर पुराने पुल के पास नया पुल बनाने व स्कूल के बच्चों व बाडागड्डी के घनी आबादी वाले गांव के लोगों की आवाजाही के लिए काम चलाऊ व्यवस्था बरकरार रखने की मांग की है।
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ऐसा न होने पर दोनो दलों ने 21 दिसंबर को धरना प्रदर्शन कर विरोध करने की चेतावनी दी। पुल बनने के बाद विगत 37 वर्षों में भागीरथी की कई प्रलंयकारी बाढ़ में आखिर 2013 में तिलोथ पुल का एक हिस्सा बह गया।
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60 मीटर स्पान के इस पुल के सारे स्तंभ बाढ़ के थपेड़ो से जर्जर हो चुके हैं। इस पुल से जिले के पब्लिक स्कूल और घनी आबादी वाले बाडागड्डी के लोगों के अलावा परियोजना व कई सरकारी विभागों व अन्य स्कूलों के बच्चों की आवाजाही होती है।
लोनिवि ने पहले काम चलाऊ व्यवस्था के लिए पिलर डालकर पुल के आधे हिस्से में चढ़ने के लिए सीढ़ी व तीस मीटर का वैलीब्रिज बनाने में लाखों रुपये लगाए।
अब जर्जर पुल की जगह नया पुल बनाने के बजाय इसमें 42 मीटर हिस्से में गार्डरब्रिज बनाने और पुराने अवशेष हिस्से की मरम्मत करने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसके लिए पुरानी काम चलाऊ व्यवस्था बंद करने से लोगों को कई सालों तक दस किमी का चक्कर काट कर आनाजाना पड़ेगा। भाजपा के बुद्धि सिंह पंवार और उत्तराखंड आंदोलनकारी संगठन के मुरारी लाल भट्ट ने आज डीएम से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने लोनिवि के टल्ले टांके लगाने वाले डिजाइन पर 8 करोड़ रुपये खर्च करने में भारी भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया और लिखित रूप से उन्हें अवगत कराया कि यदि इस जगह पर नया पुल स्वीकृत नहीं कराया गया और काम चलाऊ व्यवस्था बंद की गई तो उनका संगठन 21 दिसंबर को पुल साइट पर धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध जताएंगे।
कोट
पुल डेढ़ साल में तैयार होगा। बरसात में तो यहां आवाजाही की व्यवस्था नहीं हो पाएगी, किंतु जाडे़ व कम पानी के सीजन में नदी से पैदल रास्ता बनाने की योजना है। इसमें पुराने पुल के हिस्सों को आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों से परीक्षण कराने के बाद ही यह डिजाइन तैयार किया है।
- अशोक कुमार, ईई लोनिवि प्रांतीय खंड उत्तरकाशी।