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कूड़ा निस्तारण के इंतजाम करने में नाकाम साबित हो रहे जिम्मेदार अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि
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उत्तरकाशी। तमाम दावों के बावजूद बाड़ाहाट पालिका एवं जिला प्रशासन अभी तक कूड़ा निस्तारण को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पाए हैं। बीते कुछ समय में किए गए थोड़े बहुत प्रयास भी पर्यावरण कानूनों व स्थानीय जनता के विरोध के चलते विफल साबित हुए हैं, जिससे कूड़े की समस्या बढ़ती जा रही है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल के तहत हर नगर क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था होनी चाहिए। मानकों के अनुसार चयनित भूमि का वन क्षेत्र, जलस्रोत व आबादी वाले इलाके से करीब 100 मीटर की दूरी में होना भी अनिवार्य है। हालांकि बाड़ाहाट नगर पालिका दशकों से इन नियमों का उल्लंघन करते हुए गंगा भागीरथी से मिलने वाले तेखला गदेरे में कूड़ा डंप करती आ रही थी, लेकिन 1 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट ने उक्त स्थान पर कूड़ा डंप करने पर पाबंदी लगाते हुए प्रशासन को कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन व पालिका ने कंसेण गांव के निकट जलविद्युत निगम की भूमि को कूड़ा डंप करने के लिए चयनित किया, लेकिन ग्रामीणों के विरोध व हाईकोर्ट की पाबंदी के बाद पालिका को यहां से भी हटना पड़ा। इस बीच पालिका व प्रशासन ने तांबाखानी सुरंग के बाहरी हिस्से को वैकल्पिक तौर पर कूड़ा डंपिंग जोन में तब्दील कर दिया।
इस बीच पालिका प्रशासन ने मांडौ गांव के निकट किराये पर जमीन लेकर वहां किल वेस्ट मशीन और कांपेक्टर लगाकर वैज्ञानिक ढंग से कचरा निस्तारण की तैयारी शुरू की। यहां भी दो अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी है, जिससे कूड़े की समस्या एक बार फिर से जस की तस खड़ी हो गई है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। जो अभी तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल के नियमों के अनुरूप भूमि तलाशने के बजाय कामचलाऊ व्यवस्था में ही जुटे हैं।
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मांडौं गांव के निकट कचरा डंपिंग जोन नहीं, बल्कि निस्तारण की व्यवस्था की जा रही थी। यहां लगाई जा रही किल वेस्ट मशीन में कचरे को जलाकर राख बनाया जाता है। यह मशीन एनजीटी से स्वीकृत है। कांपेक्टर से प्लास्टिक कचरे के बंडल बनाकर बाहर भेजे जाने हैं। इनसे किसी तरह का प्रदूषण नहीं होना है। हाईकोर्ट ने फिलहाल काम रोक कर जवाब मांगा है। जनता के सहयोग के बिना कूड़े की समस्या का समाधान संभव नहीं है। पालिका अब हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखकर प्लांट को चलाने की मंजूरी लेने का प्रयास करेगी।
सुशील कुमार कुरील, ईओ, पालिका बाड़ाहाट।
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल के तहत हर नगर क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था होनी चाहिए। मानकों के अनुसार चयनित भूमि का वन क्षेत्र, जलस्रोत व आबादी वाले इलाके से करीब 100 मीटर की दूरी में होना भी अनिवार्य है। हालांकि बाड़ाहाट नगर पालिका दशकों से इन नियमों का उल्लंघन करते हुए गंगा भागीरथी से मिलने वाले तेखला गदेरे में कूड़ा डंप करती आ रही थी, लेकिन 1 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट ने उक्त स्थान पर कूड़ा डंप करने पर पाबंदी लगाते हुए प्रशासन को कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन व पालिका ने कंसेण गांव के निकट जलविद्युत निगम की भूमि को कूड़ा डंप करने के लिए चयनित किया, लेकिन ग्रामीणों के विरोध व हाईकोर्ट की पाबंदी के बाद पालिका को यहां से भी हटना पड़ा। इस बीच पालिका व प्रशासन ने तांबाखानी सुरंग के बाहरी हिस्से को वैकल्पिक तौर पर कूड़ा डंपिंग जोन में तब्दील कर दिया।
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इस बीच पालिका प्रशासन ने मांडौ गांव के निकट किराये पर जमीन लेकर वहां किल वेस्ट मशीन और कांपेक्टर लगाकर वैज्ञानिक ढंग से कचरा निस्तारण की तैयारी शुरू की। यहां भी दो अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी है, जिससे कूड़े की समस्या एक बार फिर से जस की तस खड़ी हो गई है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। जो अभी तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल के नियमों के अनुरूप भूमि तलाशने के बजाय कामचलाऊ व्यवस्था में ही जुटे हैं।
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मांडौं गांव के निकट कचरा डंपिंग जोन नहीं, बल्कि निस्तारण की व्यवस्था की जा रही थी। यहां लगाई जा रही किल वेस्ट मशीन में कचरे को जलाकर राख बनाया जाता है। यह मशीन एनजीटी से स्वीकृत है। कांपेक्टर से प्लास्टिक कचरे के बंडल बनाकर बाहर भेजे जाने हैं। इनसे किसी तरह का प्रदूषण नहीं होना है। हाईकोर्ट ने फिलहाल काम रोक कर जवाब मांगा है। जनता के सहयोग के बिना कूड़े की समस्या का समाधान संभव नहीं है। पालिका अब हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखकर प्लांट को चलाने की मंजूरी लेने का प्रयास करेगी।
सुशील कुमार कुरील, ईओ, पालिका बाड़ाहाट।