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दंत चिकित्सक के भरोसे है दो दर्जन गांव
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पुरोला (उत्तरकाशी)। हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे मोरी के आराकोट क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के चलते ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों की स्वास्थ्य सेवाएं एलोपैथिक अस्पताल टिकोची पर टिकी हैं और यह अस्पताल महज एक दंत चिकित्सक के भरोसे है। ऐसे में क्षेत्र के ग्रामीण छोटी छोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी देहरादून और हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है।
आराकोट कोठीगाड क्षेत्र के 23 गांवों के ग्रामीणों को चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए टिकोची में राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय खोला गया है। लंबे समय से चिकित्सक विहीन अस्पताल में बीते साल ही एक दंत चिकित्सक तैनात की गई है। यूं तो दस किमी दूर चिवां में आयुर्वेदिक अस्पताल और 12 किमी दूर आराकोट में एलोपैथिक अस्पताल है, लेकिन यहां महिला चिकित्सक नहीं हैं। टिकोची निवासी हरीश चौहान, राजेंद्र चौहान, नरेश, राजेंद्र नौटियाल ने बताया कि चार दशक पूर्व टिकोची में अस्पताल खोला गया था, लेकिन आज तक यहां कोई एमबीबीएस डाक्टर नहीं आया। एक साल पहले यहां एक महिला दंत चिकित्सक नियुक्त की गई है। अस्पताल में एंबुलेंस भी नहीं है, जिससे मरीज को दूसरे अस्पतालों में ले जाने के लिए टैक्सी बुक करनी पड़ती है।
कोठीगाड क्षेत्र में चिवां में आयुर्वेदिक अस्पताल में चार साल से कोई डाक्टर नहीं है। आराकोट अस्पताल में भी सिर्फ एक डाक्टर तैनात है। चिकित्सकों की कमी है, इस संबंध में शासन को अवगत कराया गया है। नए चिकित्सक मिलते ही इन अस्पतालों में तैनाती दी जाएगी।
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डा. आरसी आर्य, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी।
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आराकोट कोठीगाड क्षेत्र के 23 गांवों के ग्रामीणों को चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए टिकोची में राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय खोला गया है। लंबे समय से चिकित्सक विहीन अस्पताल में बीते साल ही एक दंत चिकित्सक तैनात की गई है। यूं तो दस किमी दूर चिवां में आयुर्वेदिक अस्पताल और 12 किमी दूर आराकोट में एलोपैथिक अस्पताल है, लेकिन यहां महिला चिकित्सक नहीं हैं। टिकोची निवासी हरीश चौहान, राजेंद्र चौहान, नरेश, राजेंद्र नौटियाल ने बताया कि चार दशक पूर्व टिकोची में अस्पताल खोला गया था, लेकिन आज तक यहां कोई एमबीबीएस डाक्टर नहीं आया। एक साल पहले यहां एक महिला दंत चिकित्सक नियुक्त की गई है। अस्पताल में एंबुलेंस भी नहीं है, जिससे मरीज को दूसरे अस्पतालों में ले जाने के लिए टैक्सी बुक करनी पड़ती है।
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कोठीगाड क्षेत्र में चिवां में आयुर्वेदिक अस्पताल में चार साल से कोई डाक्टर नहीं है। आराकोट अस्पताल में भी सिर्फ एक डाक्टर तैनात है। चिकित्सकों की कमी है, इस संबंध में शासन को अवगत कराया गया है। नए चिकित्सक मिलते ही इन अस्पतालों में तैनाती दी जाएगी।
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डा. आरसी आर्य, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी।