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कोल्ड स्टोर बनाकर सेब किसानों को निजी कंपनी के हाथों लुटने छोड़ दिया सरकार ने
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उत्तरकाशी। किसानों के लिए हर्षिल वैली के झाला में बीते साल खुला कोल्ड स्टोर किसानों की उम्मीद पर खरा उतरता नहीं दिख रहा है। 810.94 लाख लागत से बने 1200 मीट्रिक टन क्षमता के कोल्ड स्टोर के संचालन से पल्ला झाड़कर कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड ने इसे निजी कंपनी को तीन साल के लिए लीज पर दे दिया। लचर सरकारी व्यवस्था का फायदा उठाकर कंपनी द्वारा क्षेत्र के छोटे जरूरतमंद किसानों के उत्पाद की ग्रेडिंग में हेराफेरी कर मैदानी मंडियों से भी आधे दाम पर सेब की खरीद की।
हर्षिल घाटी के आठ गांवों में बीते साल 1685 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि झाला में अत्याधुनिक तकनीकी से कोल्ड स्टोर तैयार होने से उन्हें घर पर ही मंडियों जैसा दाम मिलेगा, लेकिन मंडियों में ‘ए’ ग्रेड में बिकने वाले उनके डेलीसस प्रजाति के सेब का ‘बी’ ग्रेड में वर्गीकरण कर किसानों को 15 से 27 रुपये प्रति किलो की दर से सेब बेचने को मजबूर किया गया। यही सेब मंडियों में 38 से 40 रुपये प्रति किलो की दर से बिका।
सरकारी स्तर पर देखें तो आठ करोड़ से बना कोल्ड स्टोर महज 90 हजार सालाना की दर पर तीन साल के लिए एक निजी कंपनी को लीज पर दिया गया है। सेब की ग्रेडिंग के लिए लगी मशीन एक हॉल में बंद पड़ी है, जिससे किसानों को ग्रेडिंग में कोई मदद नहीं मिली। यूं तो कोल्ड स्टोर में किसानों के लिए सेब स्टोरेज हेतु 25 प्रतिशत स्थान नियत है, लेकिन सेब खरीद के दौरान ग्रेडिंग में गड़बड़ी के चलते अधिक किसानों ने यहां अपना सेब बेचने में रुचि नहीं दिखायी। यही कारण है कि 1200 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोर में महज 1.5 मीट्रिक टन सेब ही स्टोर हो पाया।
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सेब किसान सचेंद्र पंवार, दुर्गेश, उमेश, माधवेंद्र, सोनू रौतेला, भरत सिंह, नारायण सिंह का कहना है कि कोल्ड स्टोर में रंग व आकार के आधार पर ग्रेडिंग की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे यहां कुल उत्पाद का 70 प्रतिशत सेब ‘बी’ ग्रेड बताकर मंडी से आधी कीमत पर खरीदा गया। कहा कि यदि अगले वर्ष भी किसानों को इसी तरह ठगा गया, तो वे कोल्ड स्टोर में अपना सेब नहीं देंगे।
हरियाणा की कैंप फ्रूट्स कंपनी को 90 हजार सालाना किराए पर तीन साल के लिए झाला कोल्ड स्टोर दिया गया है। इसके संचालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निविदा निकाली गई थी। लीज के शर्तों के आधार पर हम सेब खरीद में कोई दखल नहीं दे सकते। यहां सेब ग्रेडिंग के लिए दो मशीनें दी गई हैं। इससे ग्रेडिंग कर किसान अपना सेब बाजार में भी बेच सकते हैं।
अनिल कुमार सैनी, डीजीएम कृषि उत्पादन एवं विपणन बोर्ड रुद्रपुर।
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हर्षिल घाटी के आठ गांवों में बीते साल 1685 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि झाला में अत्याधुनिक तकनीकी से कोल्ड स्टोर तैयार होने से उन्हें घर पर ही मंडियों जैसा दाम मिलेगा, लेकिन मंडियों में ‘ए’ ग्रेड में बिकने वाले उनके डेलीसस प्रजाति के सेब का ‘बी’ ग्रेड में वर्गीकरण कर किसानों को 15 से 27 रुपये प्रति किलो की दर से सेब बेचने को मजबूर किया गया। यही सेब मंडियों में 38 से 40 रुपये प्रति किलो की दर से बिका।
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सरकारी स्तर पर देखें तो आठ करोड़ से बना कोल्ड स्टोर महज 90 हजार सालाना की दर पर तीन साल के लिए एक निजी कंपनी को लीज पर दिया गया है। सेब की ग्रेडिंग के लिए लगी मशीन एक हॉल में बंद पड़ी है, जिससे किसानों को ग्रेडिंग में कोई मदद नहीं मिली। यूं तो कोल्ड स्टोर में किसानों के लिए सेब स्टोरेज हेतु 25 प्रतिशत स्थान नियत है, लेकिन सेब खरीद के दौरान ग्रेडिंग में गड़बड़ी के चलते अधिक किसानों ने यहां अपना सेब बेचने में रुचि नहीं दिखायी। यही कारण है कि 1200 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोर में महज 1.5 मीट्रिक टन सेब ही स्टोर हो पाया।
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सेब किसान सचेंद्र पंवार, दुर्गेश, उमेश, माधवेंद्र, सोनू रौतेला, भरत सिंह, नारायण सिंह का कहना है कि कोल्ड स्टोर में रंग व आकार के आधार पर ग्रेडिंग की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे यहां कुल उत्पाद का 70 प्रतिशत सेब ‘बी’ ग्रेड बताकर मंडी से आधी कीमत पर खरीदा गया। कहा कि यदि अगले वर्ष भी किसानों को इसी तरह ठगा गया, तो वे कोल्ड स्टोर में अपना सेब नहीं देंगे।
हरियाणा की कैंप फ्रूट्स कंपनी को 90 हजार सालाना किराए पर तीन साल के लिए झाला कोल्ड स्टोर दिया गया है। इसके संचालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निविदा निकाली गई थी। लीज के शर्तों के आधार पर हम सेब खरीद में कोई दखल नहीं दे सकते। यहां सेब ग्रेडिंग के लिए दो मशीनें दी गई हैं। इससे ग्रेडिंग कर किसान अपना सेब बाजार में भी बेच सकते हैं।
अनिल कुमार सैनी, डीजीएम कृषि उत्पादन एवं विपणन बोर्ड रुद्रपुर।