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डा राजीव नयन बहुगुणा को मिला आरडी असाना स्वर्ण पदक पुरस्कार 2017 और उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिक पुरस्कार
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:18 PM IST
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उत्तरकाशी। डा. राजीव नयन बहुगुणा को उनके उत्कृष्ट शोध के लिए हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित नेशनल कान्फ्रेंस में एक साथ दो बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया है। डा. बहुगुणा वर्तमान में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली में पादक कार्यिकी विभाग में युवा वैज्ञानिक के पद पर तैनात हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (नई दिल्ली) के युवा वैज्ञानिक डा. बहुगुणा को पादप कार्यिकी एवं पर्यावरण परिवर्तन के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए भारतीय पादप कार्यिकी संस्था के द्वारा आरडी असाना स्वर्ण पदक पुरस्कार 2017 प्रदान किया गया है। उनको यह पुरस्कार रायपुर छत्तीसगढ़ में 22 से 25 नवंबर को आयोजित नेशनल कान्फ्रेंस में मुख्य अतिथि कृषि मंत्री छत्तीसगढ़ ब्रजमोहन अग्रवाल ने दिया। साथ ही उन्हें उत्कृष्ट शोध कार्य एवं व्याख्यान के लिए उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें इंदिरा गांधी कृषि विवि के कुलपति डा. एसके पाटिल ने दिया।
डा. बहुगुणा मूल रूप से उत्तरकाशी के धौंतरी निवासी हैं। उनके पिता वैद्यनाथ बहुगुणा फार्मेसिस्ट थे। डा. बहुगुणा की माध्यमिक शिक्षा कीर्ति इंटर कॉलेज एवं स्नातक शिक्षा पीजी कॉलेज उत्तरकाशी में हुई है। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुवेशन एवं डाक्ट्रेट की डिग्री पंतनगर कृषि विवि से प्राप्त की है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ईटी) फिलीपिंस में पोस्ट डॉक्ट्रेट अनुसंधान के लिए चुने गये। ईटी फिलीपिंस में डा. बहुगुणा के उत्कृष्ट शोध कार्य के चलते उन्हें केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से डीएसटी साइंटिस्ट फास्ट ट्रेक फैलोशिप ग्रांट प्रदान की गई।
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इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर जेएनयू में शोध वैज्ञानिक के तौर पर कार्य शुरू किया। वर्तमान में डा. बहुगुणा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली में पादक कार्यिकी विभाग में युवा वैज्ञानिक के पद पर तैनात हैं।
डा. बहुगुणा की खोज
डा. बहुगुणा ने धान पर पर्यावरण परिवर्तन के कारण होने वाले उच्च तापमान से धान की पैदावार और गुणवत्ता में गिरावट को कम करने के लिए उच्च कार्बनडाई ऑक्साइड और जेनेटिक विविधता का प्रयोग करके धान पर पड़ने वाले उच्च तापमान में दुष्प्रभाव को कम करके उसकी पैदावार एवं गुणवत्ता में सुधार करने पर शोध किया।
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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (नई दिल्ली) के युवा वैज्ञानिक डा. बहुगुणा को पादप कार्यिकी एवं पर्यावरण परिवर्तन के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए भारतीय पादप कार्यिकी संस्था के द्वारा आरडी असाना स्वर्ण पदक पुरस्कार 2017 प्रदान किया गया है। उनको यह पुरस्कार रायपुर छत्तीसगढ़ में 22 से 25 नवंबर को आयोजित नेशनल कान्फ्रेंस में मुख्य अतिथि कृषि मंत्री छत्तीसगढ़ ब्रजमोहन अग्रवाल ने दिया। साथ ही उन्हें उत्कृष्ट शोध कार्य एवं व्याख्यान के लिए उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें इंदिरा गांधी कृषि विवि के कुलपति डा. एसके पाटिल ने दिया।
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डा. बहुगुणा मूल रूप से उत्तरकाशी के धौंतरी निवासी हैं। उनके पिता वैद्यनाथ बहुगुणा फार्मेसिस्ट थे। डा. बहुगुणा की माध्यमिक शिक्षा कीर्ति इंटर कॉलेज एवं स्नातक शिक्षा पीजी कॉलेज उत्तरकाशी में हुई है। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुवेशन एवं डाक्ट्रेट की डिग्री पंतनगर कृषि विवि से प्राप्त की है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ईटी) फिलीपिंस में पोस्ट डॉक्ट्रेट अनुसंधान के लिए चुने गये। ईटी फिलीपिंस में डा. बहुगुणा के उत्कृष्ट शोध कार्य के चलते उन्हें केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से डीएसटी साइंटिस्ट फास्ट ट्रेक फैलोशिप ग्रांट प्रदान की गई।
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इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर जेएनयू में शोध वैज्ञानिक के तौर पर कार्य शुरू किया। वर्तमान में डा. बहुगुणा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली में पादक कार्यिकी विभाग में युवा वैज्ञानिक के पद पर तैनात हैं।
डा. बहुगुणा की खोज
डा. बहुगुणा ने धान पर पर्यावरण परिवर्तन के कारण होने वाले उच्च तापमान से धान की पैदावार और गुणवत्ता में गिरावट को कम करने के लिए उच्च कार्बनडाई ऑक्साइड और जेनेटिक विविधता का प्रयोग करके धान पर पड़ने वाले उच्च तापमान में दुष्प्रभाव को कम करके उसकी पैदावार एवं गुणवत्ता में सुधार करने पर शोध किया।