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न सांड खरीदे और न पशु प्रजनन केंद्र खुला लेकिन संस्था डकार गई 5 लाख 93 हजार की रकम
Updated Fri, 15 Sep 2017 10:43 PM IST
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पुरोला। उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्य द्वितीय) की सहयोगी संस्था एसीड का एक और घोटाला सामने आया है। एनजीओ पशु प्रजनन केंद्र खोलने और इसके लिए 10 सांड़ खरीदने के नाम पर 5.93 लाख रुपये डकार गया। यही नहीं, पशु स्वास्थ्य शिविर के नाम पर भी संस्था ने तीन लाख रुपये का खर्च दिखाया है। यह घोटाला भी सूचना के अधिकार में सामने आया। जलागम निदेशालय ने दोनों मामलों की जांच के आदेश दे दिए हैं। संस्था पर पहले ही जलागम योजना के तहत गोष्ठियों के नाम पर ही 93.52 लाख का घोटाला करने का आरोप लग चुका है।
विश्व बैंक की ओर से मिले ऋण पर उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम प्रबंध निदेशालय ने पुरोला, मोरी एवं नौगांव ब्लॉक की 60 ग्राम पंचायतों के 107 राजस्व गांवों में कृषि उत्थान, पशुपालन और कृषि क्षेत्र में तकनीकी विकास के लिए योजना बनाई थी। इसके लिए विभाग ने एसीड संस्था को पांच वर्ष के लिए पार्टनर बनाया। अनुबंध के अनुसार संस्था को विशेषज्ञों के साथ मिलकर तकनीकी प्रचार-प्रसार कर किसानों की आय में इजाफा करना था। इसके साथ ही वर्ष 2015-16 में पांच सांड़ खरीदकर प्राकृतिक प्रजनन केंद्र खोलना था, जबकि वर्ष 2016-17 में भी संस्था को पांच सांड़ खरीदने थे, लेकिन संस्था ने न तो सांड़ खरीदे और ना ही प्रजनन केंद्र खोला, जबकि संस्था ने इस मद में 5.93 लाख रुपये खर्च दिखाया है। वहीं, निशुल्क पशु स्वास्थ्य शिविरों के नाम पर भी संस्था ने तीन लाख रुपये का खर्च दिखाया है, जबकि शिविर लगाए ही नहीं गए।
इस संबंध में जलागम परियोजना के उप निदेशक सीपी शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वह टूर पर हैं। उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है, जबकि जलागम परियोजना के पर्यवेक्षक विजय पटवाल ने बताया कि दोनों मामलों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। कहा कि जलागम निदेशालय की टीम मामले की जांच करेगी। एसीड संस्था के समन्वयक मायाधर साहू ने विशेषज्ञों के संस्था छोड़कर जाने पर कहा कि एनजीओ में लोग आते-जाते रहते हैं।
विश्व बैंक की ओर से मिले ऋण पर उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम प्रबंध निदेशालय ने पुरोला, मोरी एवं नौगांव ब्लॉक की 60 ग्राम पंचायतों के 107 राजस्व गांवों में कृषि उत्थान, पशुपालन और कृषि क्षेत्र में तकनीकी विकास के लिए योजना बनाई थी। इसके लिए विभाग ने एसीड संस्था को पांच वर्ष के लिए पार्टनर बनाया। अनुबंध के अनुसार संस्था को विशेषज्ञों के साथ मिलकर तकनीकी प्रचार-प्रसार कर किसानों की आय में इजाफा करना था। इसके साथ ही वर्ष 2015-16 में पांच सांड़ खरीदकर प्राकृतिक प्रजनन केंद्र खोलना था, जबकि वर्ष 2016-17 में भी संस्था को पांच सांड़ खरीदने थे, लेकिन संस्था ने न तो सांड़ खरीदे और ना ही प्रजनन केंद्र खोला, जबकि संस्था ने इस मद में 5.93 लाख रुपये खर्च दिखाया है। वहीं, निशुल्क पशु स्वास्थ्य शिविरों के नाम पर भी संस्था ने तीन लाख रुपये का खर्च दिखाया है, जबकि शिविर लगाए ही नहीं गए।
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इस संबंध में जलागम परियोजना के उप निदेशक सीपी शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वह टूर पर हैं। उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है, जबकि जलागम परियोजना के पर्यवेक्षक विजय पटवाल ने बताया कि दोनों मामलों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। कहा कि जलागम निदेशालय की टीम मामले की जांच करेगी। एसीड संस्था के समन्वयक मायाधर साहू ने विशेषज्ञों के संस्था छोड़कर जाने पर कहा कि एनजीओ में लोग आते-जाते रहते हैं।
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