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नमामि गंगे परियोजना को पलिता लगा रही पालिका
Updated Thu, 10 Aug 2017 10:51 PM IST
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उत्तरकाशी। केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना एवं पर्यावरण मंत्रालय के नियमों की उत्तरकाशी नगर पालिका द्वारा जमकर धज्जियां उड़ाईं जा रही हैं। पालिका द्वारा शहरभर का कूड़ा भागीरथी नदी से जुड़े तेखला गदेरे में गिराया जा रहा है। पालिका के पास अभी तक न तो कूड़ा निस्तारण के लिए कोई व्यवस्था है और ना ही उसे फेंकने के लिए कोई डंपिंग जोन। इस वजह से बिना रिसाइकल किया हुआ यह कूड़ा न केवल भागीरथी को दूषित कर रहा है बल्कि आसपास के वन क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा रहा है। पालिका के इस कदम का तेखला और आसपास के गांवों के लोगों द्वारा काफी विरोध भी किया गया था, परंतु इसका कोई असर नहीं हुआ।
करोड़ों की लागत वाली नमामि गंगे परियोजना में गौमुख से निकलने वाली भागीरथी नदी का महत्वपूर्ण स्थान है, जबकि पर्यावरण मंत्रालय के नियमों के अनुसार डंपिंग जोन ऐसे स्थान पर बना होना चाहिए जो किसी जल स्त्रोत, वन क्षेत्र एवं आबादी से दूर हो, लेकिन पालिका ने इनमें से किसी एक भी नियम का पालन नहीं किया है। हांलाकि पालिका का कहना है कि कूड़े को गदेरे में जाने से रोकने की व्यवस्था की गई है। परंतु जानकारों के अनुसार इस तर्क का कोई लाभ नहीं है, क्योंकि सड़ते हुए कूड़े से निकलने वाले जहरीले केमिकल मिट्टी में मिल जाते हैं जो बारीश से बहकर गदेरे में ही चले जाएंगे।
इन केमिकलों से जल प्रदूषण के साथ-साथ पूरे पर्यावरण तंत्र को भी नुकसान पहुंचेगा। महिला विकास किसान समिति की अध्यक्ष पवना सेमवाल ने बताया कि ग्रामीणों ने गदेरे में कूड़ा डालने को लेकर पालिका का विरोध किया था, परंतु प्रशासन द्वारा उनके विरोध को दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कूड़े की बदबू पूरे क्षेत्र में फैली रहती है तथा लोगों में बीमारी होने का डर बना रहता है। शहर को साफ करने के नाम पर पालिका ने गांवों और भागीरथी को गंदा कर दिया है। अगर जल्द ही इसे रोका नहीं गया तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।
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वहीं पालिका अध्यक्ष जयेंद्री राणा का कहना है कि, कूड़े को गदेरे में जाने से रोकने के लिए पूरी व्यवस्था की गई है। डंपिंग जोन बनाने का कार्य बरसात के बाद पूरा कराया जाएगा तथा कूड़ा निस्तारण के लिए जल्द ही टेंडर कराए जाएंगे।
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करोड़ों की लागत वाली नमामि गंगे परियोजना में गौमुख से निकलने वाली भागीरथी नदी का महत्वपूर्ण स्थान है, जबकि पर्यावरण मंत्रालय के नियमों के अनुसार डंपिंग जोन ऐसे स्थान पर बना होना चाहिए जो किसी जल स्त्रोत, वन क्षेत्र एवं आबादी से दूर हो, लेकिन पालिका ने इनमें से किसी एक भी नियम का पालन नहीं किया है। हांलाकि पालिका का कहना है कि कूड़े को गदेरे में जाने से रोकने की व्यवस्था की गई है। परंतु जानकारों के अनुसार इस तर्क का कोई लाभ नहीं है, क्योंकि सड़ते हुए कूड़े से निकलने वाले जहरीले केमिकल मिट्टी में मिल जाते हैं जो बारीश से बहकर गदेरे में ही चले जाएंगे।
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इन केमिकलों से जल प्रदूषण के साथ-साथ पूरे पर्यावरण तंत्र को भी नुकसान पहुंचेगा। महिला विकास किसान समिति की अध्यक्ष पवना सेमवाल ने बताया कि ग्रामीणों ने गदेरे में कूड़ा डालने को लेकर पालिका का विरोध किया था, परंतु प्रशासन द्वारा उनके विरोध को दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कूड़े की बदबू पूरे क्षेत्र में फैली रहती है तथा लोगों में बीमारी होने का डर बना रहता है। शहर को साफ करने के नाम पर पालिका ने गांवों और भागीरथी को गंदा कर दिया है। अगर जल्द ही इसे रोका नहीं गया तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।
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वहीं पालिका अध्यक्ष जयेंद्री राणा का कहना है कि, कूड़े को गदेरे में जाने से रोकने के लिए पूरी व्यवस्था की गई है। डंपिंग जोन बनाने का कार्य बरसात के बाद पूरा कराया जाएगा तथा कूड़ा निस्तारण के लिए जल्द ही टेंडर कराए जाएंगे।