{"_id":"55ae3800-df1e-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"uttarakhand-heavy-rain-disaster-itbp","type":"story","status":"publish","title_hn":"साथियों की मौत से भी नहीं डिगे आईटीबीपी के जवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साथियों की मौत से भी नहीं डिगे आईटीबीपी के जवान
गौचर/संदीप थपलियाल
Updated Thu, 27 Jun 2013 05:15 PM IST
विज्ञापन
अष्टम वाहिनी विजयते। यही लिखा है आईटीबीपी (भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस) के गेट के किनारे खडे़ साइन बोर्ड पर। केदारनाथ आपदा के दौरान आईटीबीपी की आठवीं वाहिनी के अफसरों और जवानों ने इस बोर्ड पर लिखे एक-एक वाक्य को सार्थक किया है।
विज्ञापन
अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आईटीबीपी के छह जवान केदारनाथ-गौरीकुंड के बीच जंगलचट्टी में चॉपर दुर्घटना में शहीद हो गए। लेकिन यह दुर्घटना इनके हौसलों को नहीं डिगा पाई।
विज्ञापन
उत्तराखंड अपडेट के लिए क्लिक करें
बृहस्पतिवार को आईटीबीपी के डीआईजी अमित प्रसाद और कमांडेंट जीएस चौहान ने केदारनाथ से लौटे जवानों की हौसला अफजाई की। दोनों अधिकारियों ने जवानों से गले मिलते हुए उनके काम की सराहना की। केदारनाथ में आपदा के दौरान रेसक्यू करते हुए एक जवान के हाथ में चोट लग गई थी, उस जवान का हौसला डीआईजी ने यह कह कर बढ़ाया कि एक बार मेरा भी हाथ टूटा था। उन्होंने केदारनाथ आपरेशन का पूरा श्रेय अधिकारियों और जवानों को दिया।
विज्ञापन
कमांडेंट चौहान बताते हैं कि जवानों ने सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक रेसक्यू आपरेशन बेहतर तरीके से किया। दुख सिर्फ इस बात का है कि काम खत्म होने के बाद हमारे छह जवान शहीद हो गए। लेकिन हमे गर्व है कि हम लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरे।
रेसक्यू आपरेशन की कमान संभालने वाले डिफ्टी कमांडेट रणवीर नेगी बताते हैं कि 60 जवान और आठ अफसरों ने सोनप्रयाग और गौरीकुंड से आपरेशन चलाया। वह गौरीकुंड से रामबाड़ा के बीच चलाए गए आपरेशन में अपने अस्सिटेंट कमांडेंट संदीप भंडारी के काम की सराहना करते हैं।
वह बताते हैं कि जंगलचट्टी और गौरीकुंड में सबसे बड़ी चुनौती जनता को नियंत्रित करना और उनको हेली व पैदल मार्ग से बाहर निकलना था। बाढ़ में रास्ता बह जाने पर सबसे आगे संदीप ही पहाड़ी पर चढ़कर रास्ता ढूंढते थे। स्थानीय लोगों की मदद से रास्ता बनाकर लोगों को बचाया गया। सभी अधिकारी और जवान अपने काम का क्रेडिट एक दूसरे को दे रहे थे।