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बर्बादी की कगार पर आए व्यवसायी
गोपेश्वर/ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2013 09:11 AM IST
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चार धाम यात्रा ठप होने से होटल, लॉज व्यवसायी भी सड़क पर आ गए हैं। बदरीनाथ हाईवे पर बदरीनाथ से गौचर तक करीब 650 होटल, लॉज हैं। छह माह के सीजन में एक लॉज स्वामी औसतन नौ लाख रुपये कमा लेता था।
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इस प्रकार कुल करीब 58 करोड़ 50 लाख रुपये तक की आय इन व्यवसायियों को होती थी। गोविंदघाट में 11, घांघरिया में 20, जोशीमठ में 60, पीपलकोटी में 20 और चमोली में 10 होटल ऐसे थे जो छह माह तक एडवांस बुकिंग में चलते थे। लेकिन इस बार इन व्यवसायियों को पानी, बिजली के बिल भी अपनी जेब से भरना पड़ रहा है।
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गोविंदघाट में मेहता गेस्ट हाउस, नारायण गेस्ट हाउस, सप्त श्रृंग लॉज, सिद्दू गेस्ट हाउस व गोकुल गेस्ट हाउस, जोशीमठ में मधुवन लॉज, हाथी पर्वत लॉज, द्रोणागिरी व हयात होटल पूरे सीजन में तीर्थयात्रियों से भरे रहते थे। होटल, लॉज व्यवसायी यात्रा से एक माह पूर्व ही यात्रा की तैयारी में जुट जाते थे।
खाद्यान्न से लेकर मिनरल वाटर तक छह माह तक के लिए स्टोर कर लिया जाता है। यात्रा ठप पड़ जाने से होटल व्यवसायी सड़क पर आ गए हैं। उन्होंने अपने कर्मचारियों को भी घर भेज दिया है।
केस-एक
पीपलकोटी में होटल स्वामी प्रकाश चंद्र शाह के मुताबिक उन्होंने इस वर्ष बैंक से 18 लाख रुपए का ऋण लिया था। होटल में नए फर्नीचर, खाद्यान्न और कोल्ड ड्रिंग्स स्टोर की। लेकिन यात्रा ठप पड़ने से बर्बादी के कगार पर खडे़ हो गए हैं। अब 50 हजार रुपये की बैंक किस्त कैसे भरूं। काम करने वाले युवाओं भी घर भेज दिया है। बिजली, पानी का बिल जमा करने के भी लाले पडे़ हैं।
केस-दो
जोशीमठ में एक लॉज के स्वामी अनिल कुमार का कहना है कि यात्राकाल में प्रतिदिन 65 से 70 तीर्थयात्री ठहरते थे। वह हर माह तीन लाख रुपए तक कमा लेते थे। अब यात्रा ठप पड़ जाने से सड़क पर आ गए हैं। काम करने वाले 15 युवाओं को भी घर भेज दिया है। बैंक का 26 लाख रुपये देना है। अब कैसे कर यह रकम चुकाएं।
केस-3
पीपलकोटी में होटल मालिक देवेंद्र सिंह नेगी कहते हैं कि एक माह में बंद बोतल पानी और अन्य पेय पदार्थ खराब हो जाता है। इसे डिस्पोजल करना पडे़गा। बिजली, पानी के कनेक्शन भी काट दिए हैं। सुबह से शाम तक एक रुपये की बिक्री नहीं हो रही है।
केस-4
जोशीमठ में लॉज मालिक मोहन सिंह का कहना है कि लॉज की बिजली, पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं। सात कर्मचारियों को भी घर भेज दिया है।
केस-5
बिरही में होटल मालिक तारा दत्त थपलियाल का कहना है कि दो साल पहले ही बैंक से ऋण लेकर व्यवसाय शुरू किया था, अब कहां से बैंक का कर्ज चुकाएंगे।
होटल पड़े हुए हैं खाली
रुद्रप्रयाग जिले में भी केदारनाथ यात्रा ही स्थानीय होटल, लॉज व्यवसायियों की आजीविका का मुख्य साधन है। केदारनाथ त्रासदी के बाद यात्रा ठप होने से इनके सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है। यात्रियों के न आने से लॉज, होटल खाली पड़े हुए हैं।
स्थानीय व्यवसायी उत्तम राणा ने बताया कि उन्होंने यात्रा शुरू होने पूर्व बैंक से ऋण लेकर होटल बनाया था, लेकिन यात्रा ठप होने से उन्हें आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा है। केदारनाथ यात्रा रूट पर एक लॉज के स्वामी अमित कुमार ने बताया कि यात्री नहीं होने से कमरे खाली पड़े हैं।
आपदा से पूरे उत्तरकाशी में भारी तबाही मचाई है वहीं तीर्थाटन-पर्यटन व्यवसाय की कमर टूट गई है। तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों से गुलजार रहने वाले जिले के होटलों में सन्नाटा पसरा है। इस सीमांत जिले की आर्थिकी तीर्थाटन एवं पर्यटन पर टिकी है। लोगों ने सरकारी योजनाओं के तहत ऋण लेकर एक हजार से अधिक यात्री ठहराव वाले होटल बनाए हैं।
छह माह के यात्रा सीजन में जिले में पांच लाख से अधिक तीर्थयात्री और पर्यटक पहुंचते हैं, जो यहां चार से सात दिन ठहरते हैं। सीजन में होटल व्यवसायी एक कमरे का 800 से लेकर 2500 रुपये प्रति प्रतिदिन किराया लेते हैं। ऐसे में 15 कमरे वाले होटल से चार लाख रुपये तक की शुद्ध आय होती है।
इन होटलों में काम करने वाले कर्मचारी भी सीजन में 50 हजार तक कमाई कर लेते हैं। लेकिन आपदा ने सभी के अरमानों पर पानी फेर दिया है। सरकारी आंकलन के मुताबिक इस बाढ़ में 16 होटल पूर्ण रूप से आपदा की भेंट चढ़ गए जबकि क्षतिग्रस्त हुए हैं।
हम जोशियाड़ा स्थित होटल आकाश गंगा में बीते दस सालों से नौकरी कर रहे थे। इसी पर हमारे परिवार की आजीविका टिकी थी। होटल रहा नहीं, अब हम कहां जाएं? प्रशासन तो हमें प्रभावितों की श्रेणी में भी नहीं रख रहा है।
- मनीष, सुरेंद्र, फूल सिंह, सुनील होटलकर्मी
बैंक से कर्ज लेकर कुछ साल पहले अपने घर के पास ही होटल बनाया था। इसी पर परिवार की आजीविका टिकी थी। अभी बैंक का कर्ज भी वापस नहीं हो पाया है। होटल बाढ़ में बह जाने से हम सड़क पर आ गए हैं।
- दिनेश उप्पल, होटल देवलोक जोशियाड़ा
बीते सालों से राजमार्गों की बदहाली से यात्रा व्यवसाय को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इस बार तो सीजन एक महीने ही चला। सरकार शीघ्र राजमार्गों को दुरुस्त कर यात्रा शुरू कराए।
- अजय पुरी, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी
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