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तबाही का मंजर: ...अचानक रेल के डिब्बों की तरह चलने लगे मकान
डॉ. योगेश योगी
Updated Wed, 19 Jun 2013 01:19 PM IST
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रातभर बारिश होती रही...सोमवार की सुबह सात बजे होंगे.. अचानक भगदड़ मची.. करीब 22 लोग ऊपर के एक कमरे में घुस गए.. अचानक मकान रेल के डिब्बे की तरह चलने लगा।
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पानी का वेग इतना था कि पूरा मकान बह गया।.. चारधाम की यात्रा पर सात लोग निकले थे.. अब दो ही वापस जा रहे हैं, पांच कहां हैं कुछ पता नहीं।
यह बताते हुए नरेंद्र कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी दुर्गा देवी अग्रवाल की आंखें भर आई। सूखे गले से बाढ़ की विभीषिका को बयां करते-करते शब्द गले में अटक रहे थे।
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नरेंद्र अग्रवाल और उनका परिवार एमआईजी-4 सेक्टर दो शंकरनगर, रायपुर छत्तीसगढ़ में रहता है। वह केदारनाथ में आपदा की चपेट में आए। उन्हें अन्य लोगों के साथ सेना के हेलीकॉप्टर ने निकालकर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचाया और वहां से शांतिकुंज पहुंचे।
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मंगलवार की देरशाम शांतिकुंज में अमर उजाला को उन्होंने आपबीती बताई कि नौ जून को रायपुर से सात सदस्यीय दल चारधाम यात्रा के लिए निकला था। यमुनोत्री और गंगोत्री होते हुए शनिवार को केदारनाथ पहुंचे थे।
वहां पहुंचकर पहले गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्टहाउस में रहे और रविवार को राजस्थान सेवा सदन में आ गए। तेज बारिश हुई। यहां पर रविवार रात करीब आठ बजे हमें लगने लगा था कि फंस गए हैं।
सोमवार की सुबह सात बजे पानी ने राजस्थान सेवा सदन को अपनी चपेट में ले लिया। लोग ऊपर की ओर भागे। हम एक ही कमरे में 22 लोग हो गए लेकिन मकान के साथ बह गए। पानी ने हिचकोले लिए तो हम पति-पत्नी किनारे लग गए।
उन्होंने बताया कि उनके साथ सिंघाना, जिला झूंझनू राजस्थान का मित्र परिवार जिसमें सतीश चौधरी, उनकी पत्नी उषा चौधरी तथा अशोका रत्न कालोनी रायपुर से विजय कुमार, उनकी पत्नी बनी विजय कुमार एवं उनकी सास लिंका अजम्मा भी थे। यह पांचों लोग बह गए हैं और अभी तक इनका कोई पता नहीं चल पाया है।
22 लोग थे, दो आ गए, बाकी कहां
करीमनगर हैदराबाद की रहने वाली ए. रेवती और अरुणा का 22 सदस्यीय दल भी केदारनाथ में आपदा में फंस गया था। सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से जौलीग्रांट और वहां से शांतिकुंज पहुंची। अभी तक दल की यह दो सदस्या ही हरिद्वार पहुंच पाई हैं।
ए. रेवती ने बताया कि वह लोग हिमाचल धाम में ठहरे थे। पानी का तेज बहाव आया और सबको बहा ले गया। उनका दल तितर-बितर हो गया। सूचना मिल रही है कि पति को भी सेना ने बचा लिया है। उनकी इंतजार में हरिद्वार में रुके हैं। तमिलनाडु के रहने वाले स्वामी सुशांता गुप्तकाशी में फंस गए थे। वह भी शांतिकुंज पहुंचे हैं।