UK: मेडिकल कॉलेज...एनएमसी की कसौटी पर माननीयों के दावे फेल, फाइलों में तेजी; धरातल पर सुस्ती
रुद्रपुर राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य रेंग कर चल रहा है। फाइलों में हर महीने प्रगति दिखाई जा रही है लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य रेंग कर चल रहा है। फाइलों में हर महीने प्रगति दिखाई जा रही है लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। परियोजना को शुरू हुए साढ़े पांच साल बीत चुके हैं फिर भी बहुमंजिला एकेडमिक ब्लॉक, भवन और हॉस्टल अब तक पूरे नहीं हो सके हैं।
असल में ठेकेदार की लापरवाही और विभागीय समन्वय की कमी के चलते यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट लगातार पिछड़ रहा है। बार-बार समयसीमा बढ़ने के बावजूद कार्य में अपेक्षित गति नहीं दिखी। नतीजा ये रहा कि क्षेत्र के हजारों छात्रों को अभी भी एमबीबीएस के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। अब तक लगभग 65 फीसदी काम ही पूरा हुआ है। देखना होगा कि आखिर कब इसका काम पूरा होता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी के कारण मान्यता अटकी
निर्माण की इसी देरी की वजह से एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के निरीक्षणों में मेडिकल कॉलेज खरा नहीं उतर पाया। इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी के कारण मान्यता अटक गई है जिससे प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई है।
एक महीने में हैंडओवर का नया दावा
बढ़ते दबाव के बाद जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने अब सख्ती दिखाने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि साइट पर श्रमिकों की संख्या दोगुनी की गई है और निर्माण सामग्री की आपूर्ति तेज कर दी गई है। लक्ष्य है कि बचे हुए कार्य को एक महीने में पूरा कर भवन हैंडओवर कर दिया जाए।
निर्माण एजेंसी के अधिकारी तलब, प्राचार्य ने पूछा- कब पूरा करोगो काम
इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उषा रावत नाखुश हैं। उन्होंने सोमवार को मेडिकल कॉलेज में निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को तलब किया। कार्यालय में हुई बैठक में उन्होंने दो टूक सवाल किया कि आखिर भवनों का निर्माण कार्य कब पूरा कर लोगे। एजेंसी ने एक महीने में कार्य पूरा किए जाने का दावा किया है।
हमारी कोशिश है कि भवन जल्द बनकर तैयार हो ताकि आगे की कार्रवाई शुरू की जाए। निर्माणदायी संस्था ने जल्द कार्य पूरा करने की बात कही है। - डॉ. उषा रावत, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
पूर्व में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के भवनों का निरीक्षण किया गया था। निर्माण एजेंसी को शीघ्र कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे। प्रशासन की कोशिश है कि जल्दी इसका कार्य पूरा कराया जाए। - पंकज उपाध्याय, एडीएम
एमबीबीएस की 100 सीटों का दावा फेल... मेडिकल कॉलेज संकट में
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में जल्द प्रवेश कराने के नेताओं के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया है। एक तरफ नेताओं की ओर से एमबीबीएस की 100 सीटों पर प्रवेश का दावा किया जाता रहा। वहीं, दूसरी तरफ कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी और अधूरे भवनों के कारण एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) ने मान्यता देने से इनकार कर दिया है। कॉलेज में स्वीकृत पदों के सापेक्ष सिर्फ 13 फैकल्टी ही तैनात हैं। एनएमसी के मानकों के अनुसार 100 सीटों के लिए न्यूनतम 50 से अधिक शिक्षकों और संबंधित विभागों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की जरूरत होती है। इसके अलावा एकेडमिक ब्लॉक, अस्पताल के कई वार्ड, लैब और हॉस्टल का निर्माण भी अधूरा है। इन्हीं कमियों के कारण एनएमसी ने हाल में हुए निरीक्षण में कॉलेज को अयोग्य करार दे दिया गया है।
मेडिकल कॉलेज को एनएमसी से मान्यता दिलाने के लिए फिर से प्रयास किए जाएंगे। साथ ही निर्माण कार्य को समय पर पूरा करा लिया जाएगा। इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। - शिव अरोरा, विधायक
मेडिकल कॉलेज के मुद्दे पर भाजपाई कांग्रेस को कोसते रहते हैं। मेरे विधायक रहते हुए मेडिकल कॉलेज बन रहा था। तब मैंने सात करोड़ रुपये रिलीज करवाए थे। वह पैसा भाजपा की सरकार ने ट्रेजरी से ऋषिकेश भेज दिया था। पैसा यहीं रहता तो निर्माण कार्य कब का पूरा हो गया होता। भाजपाई आपस में श्रेय ले रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की मान्यता से पहले सरकार को फैकल्टी पूरी करनी चाहिए। नॉम्स पूरे करने में सरकार फेल हो रही है। - तिलक राज बेहड़, विधायक, किच्छा
छात्रों के भविष्य को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के निर्माण को हमारी सरकार ने प्राथमिकता दी। यहां पर छात्र डॉक्टरी की पढ़ाई करेंगे। जिन कारणों से मान्यता रद हुई उनमें जल्द सुधार कराया जाएगा। - विकास शर्मा, मेयर
रुद्रपुर में भाजपा नेताओं को सिर्फ बोलना आता है। कुछ लोग 100 सीटों पर प्रवेश का एलान कर रहे थे। मेडिकल कॉलेज में 37 फैकल्टी और एसोसिएट प्रोफेसर एक भी नहीं है जिससे मान्यता अटक गई। नेताओं को कम बोलते हुए धरातल पर कार्य करना चाहिए। - राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक
मान्यता के लिए जरूरी सभी मानक पूरे करने में जुटे हैं। जैसे ही भवन और स्टाफ की कमी दूर होगी एनएमसी को प्रस्ताव भेजा जाएगा। - डॉ. उषा रावत, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज