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नई उमंग व ऊर्जा के साथ नए सत्र में पहुंचेंगे बच्चे
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अनु चौहान
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। कोरोना संक्रमण को मात देकर दो साल बाद नया शैक्षिक सत्र इसी माह शुरू हुआ है। इस नए सत्र में नई उमंग व ऊर्जा के साथ बच्चे स्कूल पहुंचेंगे। कोरोना के बाद स्कूल खुलने पर बच्चों की संख्या में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है। वहीं अभिभावकों में भी बच्चों को स्कूल भेजने के लिए खुशी है। स्कूलों में छात्रों की बढ़ती संख्या दर्शा रही है कि कोरोना महामारी से निपटना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन नामुमकिन नहीं है।
वैश्विक महामारी के बाद स्कूल खुलने के साथ स्कूल प्रबंधन के सामने तमाम चुनौतियां थीं। इसके बावजूद स्कूल खुले। स्कूल प्रबंधन लगातार अभिभावकों और छात्रों से संपर्क करके उन्हें प्रोत्साहित करता रहा। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की उपस्थिति कम रही क्योंकि कुछ बच्चे और अभिभावक इसे शिक्षा प्रणाली का हिस्सा नहीं मान रहे थे।
दो वर्ष के कोरोना काल में बच्चों और उनके अभिभावकों ने अपने को खोया और कई की नौकरी तक चली गई। कई लोगों का कारोबार तक ठप हो गया जो नौकरीपेशा लोग किराए के मकान में रह रहे थे। वह कोरोना काल में अपने गांव, अपने शहर को चले गए। इससे बच्चे ड्राप आउट हो गए। ऐसे बच्चों के लिए स्कूल प्रशासन ने सहूलियतें मुहैया कराई हैं ताकि वह शिक्षा की मुख्य धारा में दोबारा से जुड़ सकें।
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अभिभावक बोले :
प्रभु विहार कॉलोनी निवासी रानी और कटोराताल निवासी संजय शर्मा ने कहा कि लंबे समय बाद स्कूल खुलना और बच्चों का स्कूल जाना एक सुखद अनुभूति है। ऑनलाइन से बेहतर ऑफलाइन की पढ़ाई है। ऑफलाइन पढ़ाई ज्यादा प्रभावशाली है। बच्चों को जिस तरह शिक्षा स्कूल में मिल सकती है वह और किसी माध्यम से नहीं मिल सकती है।
- नए सत्र में प्रवेश को लेकर छात्रों और अभिभावकों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। कोरोना महामारी के दौरान ऑफलाइन शिक्षा से दूर रहे छात्रों के पठन-पाठन में अभिभावकों में भी अपने पाल्यों के प्रति चिंता दिखाई दी। शैक्षिक उन्नयन के लिए छात्र, शिक्षक और अभिभावकों की सहभागिता अति आवश्यक है। शिल्पी चतुर्वेदी, शिक्षिका
- इस समय जिन विद्यालयों में उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। वहां छात्र इस नए सत्र में अभी नहीं आ रहे हैं। अधिकतर शिक्षक बोर्ड ड्यूटी में अन्य विद्यालयों में लगे हुए हैं। जैसे ही छात्र विद्यालयों में आएंगे उनके पठन-पाठन पर विशेष जोर देकर उनमें कोरोना काल के दौरान आई कमियों को दूर करने के लिए भरसक प्रयास किया जाएगा।
अनिल सिंह, शिक्षक
-लॉकडाउन के दौरान स्कूली शिक्षा और छात्रों पर दुष्प्रभाव पड़ा है। ऑफलाइन शिक्षा के लंबे अंतराल के कारण छात्रों में गणित और भाषा जैसे विषयों को समझने में आई कठिनाइयों को दूर करने के लिए पाठ्यक्रम को रोचक और प्रभावशाली बनाया जाएगा।
अनु चौहान, शिक्षिका
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वैश्विक महामारी के बाद स्कूल खुलने के साथ स्कूल प्रबंधन के सामने तमाम चुनौतियां थीं। इसके बावजूद स्कूल खुले। स्कूल प्रबंधन लगातार अभिभावकों और छात्रों से संपर्क करके उन्हें प्रोत्साहित करता रहा। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की उपस्थिति कम रही क्योंकि कुछ बच्चे और अभिभावक इसे शिक्षा प्रणाली का हिस्सा नहीं मान रहे थे।
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दो वर्ष के कोरोना काल में बच्चों और उनके अभिभावकों ने अपने को खोया और कई की नौकरी तक चली गई। कई लोगों का कारोबार तक ठप हो गया जो नौकरीपेशा लोग किराए के मकान में रह रहे थे। वह कोरोना काल में अपने गांव, अपने शहर को चले गए। इससे बच्चे ड्राप आउट हो गए। ऐसे बच्चों के लिए स्कूल प्रशासन ने सहूलियतें मुहैया कराई हैं ताकि वह शिक्षा की मुख्य धारा में दोबारा से जुड़ सकें।
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अभिभावक बोले :
प्रभु विहार कॉलोनी निवासी रानी और कटोराताल निवासी संजय शर्मा ने कहा कि लंबे समय बाद स्कूल खुलना और बच्चों का स्कूल जाना एक सुखद अनुभूति है। ऑनलाइन से बेहतर ऑफलाइन की पढ़ाई है। ऑफलाइन पढ़ाई ज्यादा प्रभावशाली है। बच्चों को जिस तरह शिक्षा स्कूल में मिल सकती है वह और किसी माध्यम से नहीं मिल सकती है।
- नए सत्र में प्रवेश को लेकर छात्रों और अभिभावकों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। कोरोना महामारी के दौरान ऑफलाइन शिक्षा से दूर रहे छात्रों के पठन-पाठन में अभिभावकों में भी अपने पाल्यों के प्रति चिंता दिखाई दी। शैक्षिक उन्नयन के लिए छात्र, शिक्षक और अभिभावकों की सहभागिता अति आवश्यक है। शिल्पी चतुर्वेदी, शिक्षिका
- इस समय जिन विद्यालयों में उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। वहां छात्र इस नए सत्र में अभी नहीं आ रहे हैं। अधिकतर शिक्षक बोर्ड ड्यूटी में अन्य विद्यालयों में लगे हुए हैं। जैसे ही छात्र विद्यालयों में आएंगे उनके पठन-पाठन पर विशेष जोर देकर उनमें कोरोना काल के दौरान आई कमियों को दूर करने के लिए भरसक प्रयास किया जाएगा।
अनिल सिंह, शिक्षक
-लॉकडाउन के दौरान स्कूली शिक्षा और छात्रों पर दुष्प्रभाव पड़ा है। ऑफलाइन शिक्षा के लंबे अंतराल के कारण छात्रों में गणित और भाषा जैसे विषयों को समझने में आई कठिनाइयों को दूर करने के लिए पाठ्यक्रम को रोचक और प्रभावशाली बनाया जाएगा।
अनु चौहान, शिक्षिका

अनिल सिंह।- फोटो : KASHIPUR

शिल्पी चतुर्वेदी- फोटो : KASHIPUR