{"_id":"641365fc5c2ad15b7c0df1c4","slug":"sleep-depression-medicine-rudrapur-news-c-8-1-84046-2023-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थककर सो गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थककर सो गई
Fri, 17 Mar 2023 12:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 17 Mar 2023 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रुद्रपुर। इस सफर में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थककर सो गई ... राही मासूम रजा की ये पंक्तियां आज विश्व नींद दिवस पर याद आती हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम आदमी के जीवन में इस कदर घुल चुका है, उसे पता ही नहीं चलता कि वह कब अनिद्रा जैसी खतरनाक बीमारी का रोगी बन चुका है। आज मुंबई, दिल्ली जैसे महानगर ही नहीं बल्कि तराई,भाबर और पहाड़ के वासी भी इसी चपेट में आ रहे हैं।
बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच नींद की कमी लोगों को रोगी बना रही है। तकनीकी युग में मोबाइल और कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल लोगों के जीवन पर दुष्प्रभाव डाल रहा है। इस लत के कारण पर्याप्त नींद की कमी से युवा तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि स्वस्थ जीवन बिताना है तो प्रतिदिन 8 घंटे की नींद जरूरी है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की अक्सर रात के समय नींद नहीं पूरी हो पाती है उनमें कई प्रकार की समस्याओं का जोखिम हो सकता है। पर्याप्त नींद न लेने से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने, सोचने की समस्या और वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है। नींद की कमी आपके सोचने, याद रखने और सूचनाओं को संसाधित करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। इसके कारण आपको चिंता-तनाव जैसी समस्याएं महसूस होती रह सकती हैं।
जिले में पांच फीसदी लोग प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के मुुताबिक, ऊधम सिंह नगर जिले में करीब पांच प्रतिशत लोगों को अनिद्रा से ग्रसित हैं। जिले में बढ़ता औद्योगिकीकरण भी इसकी एक वजह बताया जा रहा है। किसी समय सिर्फ कृषि के लिए प्रसिद्ध इस जिले में अब धीरे-धीरे हो रहा शहरीकरण और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने तनाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनिद्रा का अधिक शिकार होने पर कुछ लोग मनोचिकित्सक की भी मदद ले रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि अधिक सोचने से भी अनिद्रा का रोग बढ़ रहे हैं। किसी विषय पर जरूरत अधिक सोचने व चिंता से लोगों को रातभर नींद नहीं आ रही है। इससे बचने के लिए योग सबसे आसान उपाय है।
विज्ञापन
नींद पूरी न होने के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव
यदि आप पर्याप्त नींद के बिना काम करना जारी रखते हैं, तो आपको दीर्घकालिक और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं महसूस हो सकती हैं। नींद की कमी के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दिल का दौरा, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक तक का खतरा बढ़ जाता है। अन्य संभावित समस्याओं में मोटापा, अवसाद, प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्या भी शामिल है।
युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
16 से 30 वर्ष तक के युवा इस बीमारी से सबसे अधिक ग्रस्त पहुंच रहे हैं। कोई वीडियो गेम की लत तो कोई काम के तनाव में पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहा। इसके कारण तमाम बीमारियां उन्हें अपनी गिरफ्त में ले रही हैं। युवाओं के अलावा बड़ों में बढ़ रही सोशल मीडिया की लत अनिद्रा का कारण बन रही है। नींद के लिए दवाओं का निरंतर उपयोग व्यक्ति को अंदर से खोखला कर रहा है।
प्रजनन पर भी असर कर रही अनिद्रा
इंदिरा आईवीएफ अस्पताल की डॉ. निधि सलूजा ने बताया कि नींद का पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। टेस्टोस्टेरॉन पुरुष हार्मोन है, जो प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण है। पुरुषों में हर दिन जितनी मात्रा में टेस्टोस्टेरॉन रिलीज होता है, उसकी अधिक मात्रा नींद में ही रिलीज होती है। नींद पूरी न होने के कारण यह मात्रा भी कम हो रही है। जिसका सीधा असर प्रजनन पर पड़ रहा है।
निर्णय लेने की क्षमता होती कमजोर
आधी अधूरी नींद का असर याददाश्त पर भी पड़ता है और व्यक्ति रोजमर्रा की सामान्य बातें भी भूलने लगता है. इसकी वजह से उसकी निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है. जिसकी वजह से कॉन्फिडेंस कम होता है.
-- -
कोट-
अनिद्रा की मुख्य वजहें तनाव, ज्यादा सोचना, चिंता आदि है। अनिद्रा से दिल की बीमारियां भी बढ़ती हैं। इससे बचने के लिए योग सबसे आसान उपाय है। ऊधम सिंह नगर में करीब पांच प्रतिशत लोगों को अनिद्रा की बीमारी होने की आशंका है। - डॉ. हरेंद्र मलिक, एसीएमओ।
बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच नींद की कमी लोगों को रोगी बना रही है। तकनीकी युग में मोबाइल और कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल लोगों के जीवन पर दुष्प्रभाव डाल रहा है। इस लत के कारण पर्याप्त नींद की कमी से युवा तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि स्वस्थ जीवन बिताना है तो प्रतिदिन 8 घंटे की नींद जरूरी है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की अक्सर रात के समय नींद नहीं पूरी हो पाती है उनमें कई प्रकार की समस्याओं का जोखिम हो सकता है। पर्याप्त नींद न लेने से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने, सोचने की समस्या और वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है। नींद की कमी आपके सोचने, याद रखने और सूचनाओं को संसाधित करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। इसके कारण आपको चिंता-तनाव जैसी समस्याएं महसूस होती रह सकती हैं।
विज्ञापन
जिले में पांच फीसदी लोग प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के मुुताबिक, ऊधम सिंह नगर जिले में करीब पांच प्रतिशत लोगों को अनिद्रा से ग्रसित हैं। जिले में बढ़ता औद्योगिकीकरण भी इसकी एक वजह बताया जा रहा है। किसी समय सिर्फ कृषि के लिए प्रसिद्ध इस जिले में अब धीरे-धीरे हो रहा शहरीकरण और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने तनाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनिद्रा का अधिक शिकार होने पर कुछ लोग मनोचिकित्सक की भी मदद ले रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि अधिक सोचने से भी अनिद्रा का रोग बढ़ रहे हैं। किसी विषय पर जरूरत अधिक सोचने व चिंता से लोगों को रातभर नींद नहीं आ रही है। इससे बचने के लिए योग सबसे आसान उपाय है।
विज्ञापन
नींद पूरी न होने के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव
यदि आप पर्याप्त नींद के बिना काम करना जारी रखते हैं, तो आपको दीर्घकालिक और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं महसूस हो सकती हैं। नींद की कमी के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दिल का दौरा, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक तक का खतरा बढ़ जाता है। अन्य संभावित समस्याओं में मोटापा, अवसाद, प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्या भी शामिल है।
युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
16 से 30 वर्ष तक के युवा इस बीमारी से सबसे अधिक ग्रस्त पहुंच रहे हैं। कोई वीडियो गेम की लत तो कोई काम के तनाव में पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहा। इसके कारण तमाम बीमारियां उन्हें अपनी गिरफ्त में ले रही हैं। युवाओं के अलावा बड़ों में बढ़ रही सोशल मीडिया की लत अनिद्रा का कारण बन रही है। नींद के लिए दवाओं का निरंतर उपयोग व्यक्ति को अंदर से खोखला कर रहा है।
प्रजनन पर भी असर कर रही अनिद्रा
इंदिरा आईवीएफ अस्पताल की डॉ. निधि सलूजा ने बताया कि नींद का पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। टेस्टोस्टेरॉन पुरुष हार्मोन है, जो प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण है। पुरुषों में हर दिन जितनी मात्रा में टेस्टोस्टेरॉन रिलीज होता है, उसकी अधिक मात्रा नींद में ही रिलीज होती है। नींद पूरी न होने के कारण यह मात्रा भी कम हो रही है। जिसका सीधा असर प्रजनन पर पड़ रहा है।
निर्णय लेने की क्षमता होती कमजोर
आधी अधूरी नींद का असर याददाश्त पर भी पड़ता है और व्यक्ति रोजमर्रा की सामान्य बातें भी भूलने लगता है. इसकी वजह से उसकी निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है. जिसकी वजह से कॉन्फिडेंस कम होता है.
कोट-
अनिद्रा की मुख्य वजहें तनाव, ज्यादा सोचना, चिंता आदि है। अनिद्रा से दिल की बीमारियां भी बढ़ती हैं। इससे बचने के लिए योग सबसे आसान उपाय है। ऊधम सिंह नगर में करीब पांच प्रतिशत लोगों को अनिद्रा की बीमारी होने की आशंका है। - डॉ. हरेंद्र मलिक, एसीएमओ।