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नहर में आ रहा जहरीला पानी नहीं रुका
अमर उजाला ब्यूरो सितारगंज
Updated Sun, 28 Aug 2016 12:33 AM IST
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बैगुल नहर में छोंड़ा जा रहा फैक्ट्रियों का कैमिकलयुक्त जहरीला पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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अपर बैगुल नहर में छोड़े जा रहे जहरीले पानी से पांच गांव बुरी तरह प्रभावित हैं। फैक्ट्रियों के दूषित पानी से इन गांवों की करीब 18 हजार की आबादी के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।
सिडकुल फेज टू में सिंचाई विभाग के गढ़ी बीयर में स्थित अपर बैगुल नहर के चैनल से पहले नदी किनारे खाली प्लाटों के बीच से नाला बनाया गया है। इस नाले से फैक्ट्रियों का पानी नहर में प्रवाहित हो रहा है। वर्तमान में 94 फैक्ट्रियां सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) से जुड़ी हैं।
जबकि, नौ फैक्ट्री सीधे जहरीला पानी नहर में डाल रही हैं। पिछले एक साल से ग्रामीण नहर में आ रहे फैक्ट्रियों के जहरीले पानी की रोकथाम के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई दौर की बैठकें हुई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का भी दौरा हुआ। लेकिन, फैक्ट्रियों का जहरीला पानी नहर, नालों में प्रवाहित होने से अभी तक नहीं रुक सका।
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नहर में जहरीला पानी पीने से कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सिसौना, बरुआबाग, कोटाफार्म, उकरौली व बमनपुरी आदि गांवों की करीब 18 हजार की आबादी पर संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है। जिससे ग्रामीणों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है।
युवा छात्र नेता मुकेश सनवाल का कहना है कि पिछले एक साल से पीसीबी के अधिकारियों की मिलीभगत से अपर बैगुल नहर में पानी छोड़ा जा रहा है। एनजीटी, पीसीबी के आला अफसरों व प्रशासन तंत्र से मांग की। लेकिन, नतीजा कोई नहीं निकला। वह जल्द ही हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे।
सिसौना के पूर्व प्रधान किशन चंद कंबोज ने कहा कि पिछले एक साल से अपर बैगुल नहर को दूषित कर रखा है। हमने धरना दिया तो उद्योगपतियों ने लिखित में आश्वासन दिया था कि अब गंदा पानी नहीं आएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूर्णत: नहर को स्वच्छ रखने का भरोसा दिलया था। सारे अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। नहर में आ रहा गंदा पानी तत्काल नहीं रोका गया तो वृहद आंदोलन किया जाएगा।
सिसौना की ग्राम प्रधान पार्वती देवी ने कहा कि नहर में आ रहे दूषित पानी से प्रदूषण हो रहा है। फसलें बर्बाद हो रही हैं। लोग बीमार हो रहे हैं। जानवर नहलाने से बीमार हो रहे हैं और पानी पीकर मर रहे हैं। नहर में छोड़ा जा रहा दूषित पानी जल्द ही नहीं रोका गया और दोषी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ जनांदोलन छेड़ा जाएगा।
बमनपुरी के बीडीसी जितेंद्र सिंह राणा ने कहा कि फैक्ट्रियों के जहरीले पानी से फसलें नष्ट हो रही हैं। जिससे किसान आर्थिक रूप से क्षति झेल रहा है। अधिकारी गंभीर नहीं है। जल्द ही मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर जहरीला पानी छोड़ने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
सिंचाई विभाग की शिकायत पर शनिवार को पीसीबी के अधिकारी निरीक्षण करने तो आए, लेकिन कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय राज ने एनजीटी, पीसीबी समेत प्रशासनिक अधिकारियों को नहर में फैक्ट्रियों का जहरीला पानी आने की शिकायत की तो शनिवार को पीसीबी के क्षेत्रीय प्रबंधक सोमपाल सिंह ने उनके साथ नहर का निरीक्षण किया। लेकिन, गंदा पानी रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए।
ईई राज ने बताया कि निरीक्षण तो हो गया। लेकिन, कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक पीसीबी के अधिकारी जब निरीक्षण करने आते हैं तो प्रशासनिक अधिकारियों तक को इसकी भनक नहीं लगती। वहां पर सीईटीपी इंचार्ज राहुल कुमार, सिंचाई एई विजय पाल सिंह, मुकेश सनवाल, दयानंद तिवारी आदि थे।
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सिडकुल फेज टू में सिंचाई विभाग के गढ़ी बीयर में स्थित अपर बैगुल नहर के चैनल से पहले नदी किनारे खाली प्लाटों के बीच से नाला बनाया गया है। इस नाले से फैक्ट्रियों का पानी नहर में प्रवाहित हो रहा है। वर्तमान में 94 फैक्ट्रियां सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) से जुड़ी हैं।
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जबकि, नौ फैक्ट्री सीधे जहरीला पानी नहर में डाल रही हैं। पिछले एक साल से ग्रामीण नहर में आ रहे फैक्ट्रियों के जहरीले पानी की रोकथाम के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई दौर की बैठकें हुई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का भी दौरा हुआ। लेकिन, फैक्ट्रियों का जहरीला पानी नहर, नालों में प्रवाहित होने से अभी तक नहीं रुक सका।
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नहर में जहरीला पानी पीने से कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सिसौना, बरुआबाग, कोटाफार्म, उकरौली व बमनपुरी आदि गांवों की करीब 18 हजार की आबादी पर संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है। जिससे ग्रामीणों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है।
युवा छात्र नेता मुकेश सनवाल का कहना है कि पिछले एक साल से पीसीबी के अधिकारियों की मिलीभगत से अपर बैगुल नहर में पानी छोड़ा जा रहा है। एनजीटी, पीसीबी के आला अफसरों व प्रशासन तंत्र से मांग की। लेकिन, नतीजा कोई नहीं निकला। वह जल्द ही हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे।
सिसौना के पूर्व प्रधान किशन चंद कंबोज ने कहा कि पिछले एक साल से अपर बैगुल नहर को दूषित कर रखा है। हमने धरना दिया तो उद्योगपतियों ने लिखित में आश्वासन दिया था कि अब गंदा पानी नहीं आएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूर्णत: नहर को स्वच्छ रखने का भरोसा दिलया था। सारे अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। नहर में आ रहा गंदा पानी तत्काल नहीं रोका गया तो वृहद आंदोलन किया जाएगा।
सिसौना की ग्राम प्रधान पार्वती देवी ने कहा कि नहर में आ रहे दूषित पानी से प्रदूषण हो रहा है। फसलें बर्बाद हो रही हैं। लोग बीमार हो रहे हैं। जानवर नहलाने से बीमार हो रहे हैं और पानी पीकर मर रहे हैं। नहर में छोड़ा जा रहा दूषित पानी जल्द ही नहीं रोका गया और दोषी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ जनांदोलन छेड़ा जाएगा।
बमनपुरी के बीडीसी जितेंद्र सिंह राणा ने कहा कि फैक्ट्रियों के जहरीले पानी से फसलें नष्ट हो रही हैं। जिससे किसान आर्थिक रूप से क्षति झेल रहा है। अधिकारी गंभीर नहीं है। जल्द ही मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर जहरीला पानी छोड़ने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
सिंचाई विभाग की शिकायत पर शनिवार को पीसीबी के अधिकारी निरीक्षण करने तो आए, लेकिन कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय राज ने एनजीटी, पीसीबी समेत प्रशासनिक अधिकारियों को नहर में फैक्ट्रियों का जहरीला पानी आने की शिकायत की तो शनिवार को पीसीबी के क्षेत्रीय प्रबंधक सोमपाल सिंह ने उनके साथ नहर का निरीक्षण किया। लेकिन, गंदा पानी रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए।
ईई राज ने बताया कि निरीक्षण तो हो गया। लेकिन, कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक पीसीबी के अधिकारी जब निरीक्षण करने आते हैं तो प्रशासनिक अधिकारियों तक को इसकी भनक नहीं लगती। वहां पर सीईटीपी इंचार्ज राहुल कुमार, सिंचाई एई विजय पाल सिंह, मुकेश सनवाल, दयानंद तिवारी आदि थे।