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तेंदुए ने महिला को मार डाला

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 12:54 AM IST
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One died.
रेंजर प्रदीप धौलाखंडी। - फोटो : SITARGANJ
महिलाओं संग पशुओं के लिए चारा लेने जंगल गई महिला पर तेंदुए ने हमला कर दिया, जबकि अन्य महिलाओं ने पेड़ों पर चढ़कर जान बचाई। महिलाओं का शोर सुनकर जब तक लोग पहुंचे, तब तक घायल महिला की मौत हो चुकी थी। वन विभाग और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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शनिवार को ग्राम ध्यानपुर निवासी आरती चंद (28) पत्नी रामचंद गांव की महिलाओं के साथ ध्यानपुर जंगल में पशुओं के लिए चारा लेने गई थी। शाम साढ़े तीन बजे आरती पशुओं के लिए पत्ते तोड़ रही थी, तभी झाड़ियों में घात लगाकर बैठे तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। तेंदुए को देख अन्य महिलाएं शोर मचाते हुए पेड़ों पर चढ़ गईं। तेंदुआ आरती को झाड़ियों की ओर खींच ले गया। महिलाओं के शोर मचाने पर आसपास के लोग पहुंचे तो तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। तेंदुए के हमले से आरती की मौके पर ही मौत हो गई।
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महिला की मौत की सूचना से आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों में आबादी के पास लगातार तेंदुए के हमलों से जहां दहशत का माहौल है, वहीं वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश भी है। पिछले दस माह में तेंदुए ने चार लोगों की जान ले ली है। रनसाली रेंज के डिप्टी रेंजर नवल कपिल वन कर्मियों और थानाध्यक्ष केसी आर्य भी पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया। मृतका के दो बेटे हैं। इनमें छह वर्षीय मुकेश और चार साल का राजेंद्र है। मां की मौत से दोनों बच्चे बिलख रहे हैं। वहीं पति रामचंद का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
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दस माह में चार लोगों को बनाया निवाला
नानकमत्ता। रंसाल वन क्षेत्र में तेंदुए के आतंक से छह गांवों की आबादी दहशत में है। दस माह में तेेंदुए तीन महिलाओं समेत चार लोगों को शिकार बना चुके हैं। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है। तीन माह पहले वन विभाग इसी क्षेत्र में एक तेंदुए को पिंजड़े में कैद कर चुका है, लेकिन आदमखोर तेंदुआ अभी भी आतंक का पर्याय बना हुआ है।
शनिवार को तेंदुए के हमले से जंगल में चारा लेने गई ध्यानपुर गांव की आरती चंद जान से हाथ धो बैठी। इससे पहले मार्च 2021 में नगला गांव में मायके आई दीक्षा चंद पर घर के पीछे घास काटने के दौरान तेंदुए ने हमला किया। इससे दीक्षा की मौत हो गई थी। इस घटना के छह महीने बाद सितंबर में विडौरा गांव में घर के आंगन में खेल रहे पांच साल के बच्चे हर्षदीप सिंह को तेंदुए ने शिकार बनाया। वन विभाग ने आदमखोर तेंदुए को पकड़ने के लिए अक्तूबर में सरौंजा गांव में पिंजड़ा लगाया तो एक तेंदुआ उसमें फंस गया। उसके बाद दस दिसंबर को सरौंजा गांव की सुमित्रा देवी जंगल में लकड़ी बीनने गई तो उसे भी एक तेंदुआ झाड़ियों में खींचकर ले गया। तेंदुए के हमले में सुमित्रा की भी जान चली गई।
इस जंगल से नगला, ध्यानपुर, सरौंजा, कैथुलिया, टुकड़ी, बिचुवा आदि गांव लगे हुए हैं। जंगल से सटा सरौंजा गांव विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा का पैतृक गांव है। विधायक राणा का भी गांव में आना-जाना रहता है, लेकिन खौफजदा ग्रामीणों को दस महीनों से अभी तक आदमखोर तेंदुए के आतंक से निजात नहीं मिली है। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश है।
वन कर्मियों ने दो दिन पहले आरती को चेताया था
नानकमत्ता। वन रेंजर प्रदीप धौलाखंडी ने बताया कि जंगल में वन्य जीवों का विचरण रहता है। दो दिन पहले मृतका आरती चंद जंगल में चारा काटने आई थी तो दराती छीनकर वन कर्मियों ने उसे लौटा दिया था। साथ ही जंगल क्षेत्र में न आने की सलाह भी दी थी, लेकिन शनिवार को आरती फिर जंगल में चली गई और तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। बताया कि जंगली जानवरों का नेचुरल हैवीटेड है। ऐसे में तेंदुए को जंगल से कहां भेजा जा सकता है। संवाद
सोलर फेंसिंग का प्रस्ताव नहीं हुआ स्वीकृत
नानकमत्ता। रंसाली वन क्षेत्र के आबादी से घिरा होने की वजह से आए दिन जानवरों के हमलों को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से सोलर फेंसिंग का प्रस्ताव बनाया गया था। रेंजर प्रदीप धौलाखंडी ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा भी गया। लेकिन अभी तक प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली। अगर, सोलर फेंसिंग का बजट स्वीकृत हो जाता है तो काफी हद तक जानवरों के आबादी क्षेत्र में घुसने या जंगल से बाहर निकलने पर विराम लगाया जा सकता है। संवाद

मानव वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम केवल वन विभाग की जिम्मेदारी न मानकर, बल्कि सभी लोगों को समझनी होगी और लापरवाही से बचना होगा। मानव वन्य जीव संघर्ष की स्थिति को कम करने के उपाय सीखने होंगे। विभाग के नियमों का पालन करना चाहिए। आरक्षित वनों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें। पहले भी विभाग की ओर से ग्रामीणों को जागरुक करने के लिए मुनादी की गई थी। ग्रामीण अपने घरों के आसपास झाड़ियां हटाएं। रात को प्रकाश की उचित व्यवस्था करें।
-प्रदीप धौलाखंडी, वन क्षेत्राधिकारी रनसाली रेंज, तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी।
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