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हौसले की उड़ान, हासिल किया ऊंचा मुकाम 

Wed, 06 Mar 2019 12:39 AM IST
अरुण कुमार कीर्तिराज रुमाल 
कीर्तिराज रुमाल  Published by: अरुण कुमार Updated Wed, 06 Mar 2019 12:39 AM IST
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flight, achieved high level
बैडमिंटन कोर्ट पर खेलती प्रेमा विश्वास - फोटो : amar ujala

वक्त की गर्दिशों का गम न करो हौसले मुश्किलों में पलते हैं।’ कुछ यही सीख जरा सी मुसीबतों से घबराने वाले लोगों को राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रेमा दे रही हैं। बचपन से दिव्यांग प्रेमा पर पिता के निधन के बाद घर चलाने की भी जिम्मेदारी आ गई, लेकिन उन्होंने अपना हौसला बनाए रखा और रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की।

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इसी बीच किसी ने पैराबैडमिंटन के बारे में बताया तो उन्होंने उस ओर परवाज भरी और कामयाबी के आसमान तक पहुंची। राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन में दो रजत और खेल महाकुंभ में चार स्वर्ण पद जीत चुकी प्रेमा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश और राज्य का नाम रोशन करना चाहती हैं। 
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 चंदन नगर, दिनेशपुर निवासी प्रेमा विश्वास की कहानी गुरबत की ठोकरों से लड़ते हुए कड़े संघर्ष की मिसाल है। जीवन के झंझावतों से जूझते हुए प्रेमा धीरे-धीरे राज्य की प्रमुख पैराबैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में पहचान बना रही हैं। रुद्रपुर में 15 मार्च से शुरू हो रही राष्ट्रीय पैराबैडमिंटन प्रतियोगिता के लिए उत्तराखंड की टीम की वीसी-1 श्रेेणी की प्रमुख खिलाड़ी हैं। प्रेमा ने बताया कि जब वह एक वर्ष की थी तो उसे तेज बुखार आया। गरीब अभिभावकों ने क्षेत्र के ही एक चिकित्सक से उपचार कराया था।
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लेकिन डॉक्टर के गलत इंजेक्शन लगाने के बाद वह पोलियो से ग्रसित हो गई। पांचवीं तक पढ़ाई गांव के प्राथमिक विद्यालय में पूरी की। पिता सुनील विश्वास उसे गोद में बैठाकर स्कूल तक छोड़ आते रहे। हाईस्कूल, इंटर के बादएसबीएस पीजी कॉलेज से स्नातक करने के बाद 2011 में एमए कर रही थी। पिता मजदूरी कर कर चार बच्चों समेत परिवार भरण पोषण करते। तभी 2011 में करंट से पिता के निधन के बाद आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। एमए की पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी।

मां भी मजदूरी करने लगी। प्रेमा ने बताया कि उसने दो एक निजी मोबाइल सिम कंपनी में दो साल तक रिसेप्शनिस्ट का काम किया। इसके बाद कुछ समाजसेवियों के सहयोग के बाद उसने दिव्यांग खेल प्रतियोगिताओं में खेलना शुरू किया। प्रेमा ने बताया कि 2017 में आयोजित खेल महाकुंभ में उसने चक्का फेंक, गोला फेंक व सिटिंग वालीबॉल में तीन स्वर्ण पदक जीते। 2018 में बनारस में आयोजित राष्ट्रीय पैराबैडमिंटन प्रतियोगिता में सिंगल व मिक्स डबल में दो रजत पदक जीते।


रुद्रपुर में आयोजित पिछले खेल महाकुंभ ने पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में एक स्वर्ण पदक जीता। प्रेमा ने कहा कि वर्तमान में वह युवा कल्याण केंद्र में रहकर प्रतिदिन दो घंटे रुद्रपुर स्टेडियम में बैडमिंटन हॉल प्रैक्टिस करती हैं। 
 

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