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आपातकाल के डीआईआर बंदियों ने भी मांगा सम्मान
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर।
Updated Sun, 13 Aug 2017 10:48 PM IST
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मिलते डीआईआर बंदी आंदोलनकारी।
- फोटो : अमर उजाला
आपातकाल के दौरान डीआईआर में बंद रहे आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल देहरादून जाकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और विद्यालीय शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय से मिला। प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन देते हुए कहा कि लोकतंत्र बहाली के लिए आंदोलन किया गया था। बंदियो को यातनाएं दी गईं। ऐसे में सरकार द्वारा आंदोलनकारियों को मीसा अथवा डीआईआर में विभक्त करना उनका अपमान है। 42 साल बाद अगर सरकार लोकतंत्र के प्रहरियों को सम्मानित करने का निर्णय लेती है, तो इसमें भेदभाव न किया जाए।
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उनका कहना है कि डीआईआर के तहत जेल भेजे गए अधिकांश आंदोलनकारी स्वर्ग सिधार चुके हैं, जो इस समय जीवित है उनमें से भी अधिकांश शारीरिक रूप से सक्षम नही है। ऐसे में सभी को समान रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष से मिलने वालों में कृष्ण कुमार अग्रवाल, सुशील कंते, महेश अग्रवाल मामू (काशीपुर), गोपाल कोछड़ व योगराज पासी (बाजपुर), डॉ. लोकमन सिंह (जसपुर) शामिल है।
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काशीपुर से सभी डीआईआर में हुए थे बंद
आपातकाल के दौरान काशीपुर के सभी स्वंयसेवक डीआईआर के तहत जेल भेजे गए। इनमें से वर्तमान में मात्र तीन आंदोलनकारी ही जीवित है। आपातकाल की घोषणा के बाद तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंकने वालों में पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल के पिता स्व. धर्मेंद्र अग्रवाल, वीरेंद्र मित्तल, मदनलाल गुप्ता, ब्रहमशरन टंडन, लक्ष्मीनारायण कुश्वाहा, कल्लूमल वर्मा, रामलाल खुराना, देवेंद्र चंद्र रस्तौगी, गिरिराज शरन अग्रवाल, खूगकरन नलवाले व रामलुभाया प्रमुख रूप से थे। वर्तमान में काशीपुर में कृष्ण कुमार अग्रवाल, महेश मामू और सुशील कंते जीवित है।
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आपातकाल के डीआईआर बंदियों ने भी मांगा सम्मान
आपातकाल के दौरान डीआईआर में बंद रहे आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल देहरादून जाकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और विद्यालीय शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय से मिला। प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन देते हुए कहा कि लोकतंत्र बहाली के लिए आंदोलन किया गया था। बंदियो को यातनाएं दी गईं। ऐसे में सरकार द्वारा आंदोलनकारियों को मीसा अथवा डीआईआर में विभक्त करना उनका अपमान है। 42 साल बाद अगर सरकार लोकतंत्र के प्रहरियों को सम्मानित करने का निर्णय लेती है, तो इसमें भेदभाव न किया जाए। उनका कहना है कि डीआईआर के तहत जेल भेजे गए अधिकांश आंदोलनकारी स्वर्ग सिधार चुके हैं, जो इस समय जीवित है उनमें से भी अधिकांश शारीरिक रूप से सक्षम नही है। ऐसे में सभी को समान रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष से मिलने वालों में कृष्ण कुमार अग्रवाल, सुशील कंते, महेश अग्रवाल मामू (काशीपुर), गोपाल कोछड़ व योगराज पासी (बाजपुर), डॉ. लोकमन सिंह (जसपुर) शामिल है।
काशीपुर से सभी डीआईआर में हुए थे बंद
काशीपुर। आपातकाल के दौरान काशीपुर के सभी स्वंयसेवक डीआईआर के तहत जेल भेजे गए। इनमें से वर्तमान में मात्र तीन आंदोलनकारी ही जीवित है। आपातकाल की घोषणा के बाद तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंकने वालों में पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल के पिता स्व. धर्मेंद्र अग्रवाल, वीरेंद्र मित्तल, मदनलाल गुप्ता, ब्रहमशरन टंडन, लक्ष्मीनारायण कुश्वाहा, कल्लूमल वर्मा, रामलाल खुराना, देवेंद्र चंद्र रस्तौगी, गिरिराज शरन अग्रवाल, खूगकरन नलवाले व रामलुभाया प्रमुख रूप से थे। वर्तमान में काशीपुर में कृष्ण कुमार अग्रवाल, महेश मामू और सुशील कंते जीवित है।