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यहां ‘अपने खेल’ के लिए कोच भी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Wed, 13 Sep 2017 11:56 PM IST
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रुद्रपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम।
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड वर्ष-2018 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारियों में जुटा है, लेकिन अपने खिलाड़ियों को मजबूती देने के लिए यहां पर्याप्त प्रशिक्षक ही नहीं हैं। रुद्रपुर स्टेडियम में अपने खेल (राज्य खेल) फुटबाल के कोच का पद एक साल से खाली पड़ा है। स्टेडियम में संचालित हो रहे 12 खेलों के प्रशिक्षक सात साल से संविदा पर तैनात हैं। खेल विभाग न तो उन्हें स्थायी कर रहा है और ना नियमित प्रशिक्षकों की भर्ती की जा रही है।
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रुद्रपुर स्टेडियम में विभिन्न खेलों में प्रशिक्षण लेने के लिए 12 से 16 आयु वर्ग के करीब 450 बच्चे पंजीकृत हैं। इनसे आउटडोर खेलों के लिए 125 रुपये और इनडोर के लिए 500 रुपये पंजीकरण शुल्क लिया जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 70 रुपये शुल्क वसूला जाता है। प्रशिक्षण के लिए फुटबाल कोच ही नहीं है। जिन खेलों के कोच हैं, वह भी करीब सात साल से संविदा पर कार्यरत हैं।
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ट्रैक, पिच तैयार करने और मैदान के रखरखाव के लिए ग्राउंडमैंन के दोनों पर लंबे समय से रिक्त हैं। मैदान की साफ-सफाई और रात्रि सुरक्षा के लिए सफाई कर्मी, चौकीदार के पद भी खाली हैं। हर साल दस माह के लिए संविदा पर रखे जाने वाले इन प्रशिक्षिकों को मिलने वाला कम मानदेय भी उन्हें हतोत्साहित कर रहा है। इन असुविधओं का असर मैदान में होने वाले विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन में भी पड़ रहा है।
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जिला क्रीड़ा अधिकारी राशिका सिद्दीकी कहती हैं कि खेल प्रशिक्षकों की स्थायी नियुक्ति का मामला शासन स्तर का है। वर्तमान में संविदा पर ही प्रशिक्षकों की नियुक्ति की गई है। फुटबाल के प्रशिक्षण के लिए किसी ने भी कोच के लिए आवेदन नहीं किया था।
संविदा पर काम कर रहे हैं लिपिक
रुद्रपुर। जिला खेला कार्यालय में मुख्य सहायक और कनिष्ठ सहायक के दोनों पर रिक्त पड़े हैं। इनके स्थान पर संविदा कर्मियों से काम चलाया जा रहा है। लिपिकों की सेवानिवृत्ति के बाद खेल विभाग ने स्थायी नियुक्ति नहीं की है।