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अब जैविक खेती विधेयक लेकर आएगी सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:28 AM IST
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31वें दीक्षांत समारोह में मंचासीन अतिथि
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार अब जैविक खेती विधेयक लेकर आ रही है। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के मुताबिक प्रदेश में जैविक खेती के महत्व को देखते हुए यह विधेयक लाया जा रहा है।
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पंतनगर विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह के बाद मीडिया से मुखातिब सुबोध उनियाल ने कहा कि प्रदेश को केंद्र की ओर से रासायनिक खाद के तहत 475 करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है। उनकी ओर से प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से पत्र केजरिए आग्रह किया है कि इस अनुदान को कम से कम कर दिया जाए और कम की गई राशि राज्य को जैविक खेती के लिए दी जाए। कृषि मंत्री के मुताबिक प्रदेश में जैविक खेती की पर्याप्त संभावना है। बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार अब सेब के 250 क्लस्टर भी बनाने जा रही है। हिमाचल पैटर्न पर सेब के बगीचों को विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
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कृषि मंत्री के मुताबिक पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि में मशीनीकरण न केबराबर हुआ है। इसको बढ़ावा देने के लिए विधायक निधि से कृषि यंत्र की व्यवस्था का प्रावधान भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी योजना एकीकृत कृषि के विकास की है। इसके तहत मैं एक गांव हूं नाम से योजना शुरू की जा रही है। इसमें प्रत्येक विकास खंड से एक गांव का चयन कर उस गांव को सभी प्रकार की सुविधाओं से आच्छादित किया जाएगा। कोशिश होगी कि गांव में हर तरह की सुविधाएं हों।
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पहाड़ की जंगली मुर्गी में है कुटीर उद्योग को खड़ा करने की ताकत
पंतनगर। मांस के शौकीन पहाड़ की जंगली मुर्गी को केवल बेहतर स्वाद केलिए ही जानते हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय के दो शोध छात्रों ने अब यह साबित किया है कि पहाड़ में एक सामांतर अंडा उद्योग खड़ा करने में इसी मुर्गी की भरपूर मदद ली जा सकती है। 31वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल डा. केके पाल ने इन दोनो को शोध पूरा होने पर उपाधि प्रदान की।
अनंतनाग के डा. इदरीस खान और जम्मू की रहाब सलीम ने पशु चिकित्सा विज्ञान में शोध करने के लिए पाई जाने वाली जंगली मुर्गी को चुना। दोनों ने मुर्गी के अंडे देने की क्षमता, क्रिया विज्ञान को विषय बनाया। उपाधि प्रापत करने के बाद दोनों ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली जंगली मुर्गी बेहतर कम और स्थानीय आहार को लेते हुए ही जिंदा रह सकती है। इसमें कई रोगों के प्रति प्रतिरोधकता है। इन गुणों के आधार पर स्थानीय स्तर पर इस मुर्गी के अंडों का व्यवसायिक उत्पादन भी किया जा सकता है। इनके मुताबिक अभी तक इस मुर्गी को स्थानीय लोग इसके मांस के लजीज स्वाद के लिए ही जानते आए हैं। इसके अंडे का स्वाद भी अन्य मुर्गियों के अंडों के समान ही है। अंडे की पोषकता पर अभी शोध किए जाने की जरूरत है।
खास बात यह भी है कि इस मुर्गी के महत्व को देखते हुए पंतनगर विश्वविद्यालय ने भी उत्तराखंड के पशुओं की जीन विविधता के तहत इस मुर्गी का पंजीकरण हासिल किया है। विश्वविद्यालय की योजना अब इस मुर्गी पर अधिक से अधिक शोध करने की है। विश्वविद्यालय इसी तरह से स्थानीय प्रजाति की बकरी पंतजा पर भी शोध कार्य करवा रहा है।
टीडीसी को पंतनगर विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार
पंतनगर। तराई बीज विकास निगम को लेकर पंतनगर विश्वविद्यालय को सौंपे जाने पर भी विचार किया जा रहा है। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि इसके लिए विश्वविद्यालय से बात की गई है। विश्वविद्यालय ने अभी अपनी राय स्पष्ट नहीं की है। तराई बीज विकास निगम किसी समय अपने बेहतर बीज के लिए जाना जाता था।
बाद में बीज घोटाले में इस निगम का नाम आया और निगम को इस समय कई जांच से गुजरना पड़ रहा है। अब इस निगम को फिर से पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। पंतनगर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि तराई बीज विकास निगम को लेकर सरकार चिंतित है। सरकार की तरफ से इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि निगम को विश्वविद्यालय के अधीन कर दिया जाए। इस मामले में विश्वविद्यालय से बात भी हुई है, लेकिन विश्वविद्यालय की कोई स्पष्ट राय अभी तक सरकार को नहीं मिली है।