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फूड लैब को देरी से जांच रिपोर्ट भेजने की अनुमति मिली

Fri, 19 Oct 2018 11:32 PM IST
कीर्तिराज रुमाल /अमर उजाला/ऊधमसिंह नगर
कीर्तिराज रुमाल /अमर उजाला/ऊधमसिंह नगर Updated Fri, 19 Oct 2018 11:32 PM IST
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Food lab delayed sending permission to send inquiry report
FOOD LAB - फोटो : अमर उजाला

आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए रुद्रपुर में स्थापित प्रदेश की खाद्य एवं औषधि विश्लेषण शाला में स्टाफ की कमी के कारण खाद्य नमूनों की तय समय पर जांच नहीं हो पा रही है। इस समस्या को देखते हुए शासन ने खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट देर से भेजने की अनुमति दे दी है। पहले नियमानुसार 15 दिन में सैंपल की जांच कर रिपोर्ट पूरी करनी होती थी।

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दीवाली पर मिलावटखोरों की सक्रियता रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग 22 अक्तूबर से व्यापक अभियान चलाने जा रहा है। लेकिन रुद्रपुर स्थित खाद्य एवं औषधि विश्लेषण शाला में खाद्य नमूनों की जांच के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। पिछली दीवाली में भरे नमूनों की जांच भी अब अक्टूबर में आई है। जबकि होली और उसके बाद प्रदेश भर के सभी 13 जिलों से भरे गए करीब 400 खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी तक लटकी हैं। 
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नमूनों की जांच के लिए विश्लेेषण शाला में कनिष्ठ खाद्य विश्लेषकों के सृजित छह पदों में से तीन रिक्त और वरिष्ठ खाद्य विश्लेषकों के तीन पदों में से दो रिक्त हैं। इसके साथ ही खाद्य विश्लेषक की स्थायी नियुक्ति न होना जांच में देरी की प्रमुख वजह है। गाजियाबाद स्थित यूपी की फूड लैब से खाद्य विश्लेषक महीने में तीन दिन ही आते हैं। राजकीय विश्लेषक निशांत त्यागी ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण जांचें रुकने की समस्या को देखते हुए खाद्य आयुक्त को पत्र लिखकर नमूनों की जांच रिपोर्ट देरी से भेजने की अनुमति मांगी थी। शासन से इसकी अनुमति मिल गई है। साथ ही स्टाफ की नियुक्ति की भी मांग की गई है।  
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सर्वे सैंपल शुरू होने से बढ़ा दबाव 
रुद्रपुर। सरकार ने लीगल सैंपल के साथ ही फरवरी 2018 से सर्वे सैंपलों की जांच के आदेश जारी किए हैं। लीगल सैंपल में तो दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है। जबकि सैंपल सर्वे में कर्मचारियों को रूटीन जांच का अधिकार है ताकि माल की गुणवत्ता जांची जा सके। ऐसे में फूड लैब में खाद्य नमूनों की जांचों का दबाव बढ़ गया है। जबकि स्टाफ पूर्ववत ही है।   

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