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डाक्टर नहीं आया तो क्लीनिक संचालक ने कर दिया महिला का ऑपरेशन, मौत

Thu, 06 Apr 2017 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर Updated Thu, 06 Apr 2017 11:56 PM IST
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Doctor did not come, then the clinic operator did the operation, death of the woman
रोते बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला

डाक्टर के न पहुंचने पर क्लीनिक संचालक ने ही महिला का ऑपरेशन कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले को छुपाने के लिए मृत महिला को एसटीएच हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया गया। शक होने पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो मौत को खुलासा हुआ। शिकायत पर पुलिस ने तत्काल क्लीनिक संचालक समेत तीन को हिरासत में ले लिया।

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काशीपुर बाईपास रोड स्थित मलिक कॉलोनी में एक साल से किराये के दो कमरों में शिवानी सर्जिकल अस्पताल के नाम से क्लीनिक चल रहा है। बताया गया कि क्लीनिक संचालक भानु प्रताप मरीजों के उपचार के लिए किच्छा के दो डाक्टरों को बुलाता है। बृहस्पतिवार को पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंची थाना बेरिया जिला बलिया (यूपी) निवासी 60 वर्षीय लक्ष्मी पत्नी श्रीकृष्ण का ऑपेरशन करना था, लेकिन किच्छा से डाक्टर न पहुंचने पर क्लीनिक संचालक ने खुद ही ऑपरेशन शुरू कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
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मृतका की बहू संगीता ने बताया लक्ष्मी के पित्त में पथरी थी। एक सप्ताह पूर्व वह अपनी सास लक्ष्मी को बलिया से इलाज के लिए रुद्रपुर लाई थी। शिमला पिस्तौर में उनके रिश्तेदार रहते हैं। बृहस्पतिवार सुबह पेट में दर्द उठने पर वह उसे लेकर शिवानी सर्जिकल अस्पताल पहुंची। जहां मौजूद क्लीनिक संचालक ने लक्ष्मी का तत्काल ऑपरेशन करने की सलाह दी और ऑपरेशन का खर्च 17 हजार बताया। लक्ष्मी के अनुसार उसने डॉक्टर को तत्काल 7 हजार रुपए जमा कराए जिसकी रसीद भी उसे दी गई है। शेष 10 हजार रुपए ऑपरेशन के बाद देने को कहा। 
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लक्ष्मी का आरोप है कि करीब ढाई बजे कथित डॉक्टर ने उनसे ऑपरेशन सफल होने की बात कही और मरीज को खून चढ़ाने की सलाह देते हुए तुरंत हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाने कहा, जिसके लिए संचालक ने खुद एंबुलेंस की व्यवस्था भी कराई। एंबुलेंस में लक्ष्मी को ले जाने के दौरान रास्ते में उन्हें संदेह हुआ तो वह उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने लक्ष्मी को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल पहुंचे लक्ष्मी के पुत्र ओमप्रकाश ने बताया क्लीनिक संचालक की लापरवाही से उसकी मां की मौत हुई है।
 
मामले की सूचना मिलने पर एएसपी मंजूनाथ टीसी ने पुलिस की एक टीम जिला अस्पताल भेजी और खुद शिवानी सर्जिकल अस्पताल पहुंच गये, जहां उन्होंने क्लीनिक संचालक के साथ ही दो कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। 
एएसपी मंजूनाथ ने पूछताछ के बाद बताया कि क्लीनिक संचालक ने स्वीकार किया है कि वह खुद चिकित्सक नहीं है, बल्कि मरीजों की जांच के लिए किच्छा से दो डॉक्टर बुलाता है। बृहस्पतिवार को जब लक्ष्मी अस्पताल पहुंची और परिजनों ने उसके पित्त में पथरी की बात बताई तो उसने डाक्टर के न आने पर खुद ही ऑपरेशन शुरू कर दिया। एएसपी का कहना कि मामला दर्ज किया जा रहा है। 
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इलाज के नाम पर खेल रहा था मरीजों की जान से
शिवानी सर्जिकल अस्पताल का संचालक करीब एक साल से अपने क्लीनिक में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा था। वैसे तो छोटी बीमारी में वह खुद ही जांच के बाद दवा देता था, लेकिन कई बार गंभीर बिमारियों में भी रिस्क लेकर मरीजों का खुद ही इलाज कर देता था। बृहस्पतिवार को उसका यह रिस्क महिला को भारी पड़ गयी। 

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मानकों को ताक पर रख चल रहे कई क्लीनिक
शहर की विभिन्न बस्तियों में मानकों को ताक पर रखकर कई निजी क्लीनिक चलाये जा रहे हैं। इन क्लीनिकों पर आए दिन मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। बडे़ क्लीनिकों पर इलाज में होने वाले अधिक खर्च से बचने के लिए लोग इन क्लीनिकों पर पहुंचकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, लेकिन प्रशासन लापरवाही उदासीन बना हुआ है।

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