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तपिश से जंगली जानवर भी बेहाल
Sat, 27 Apr 2019 11:58 PM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Sat, 27 Apr 2019 11:58 PM IST
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तराई के जंगल में पानी की तलाश में भटकता हाथी।
- फोटो : amar ujala
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तराई में लगातार बढ़ रहे तापमान ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। भीषण गर्मी के चलते दोपहर में लोगों की आवाजाही बेहद कम रही। पैदल और दोपहिया वाहनों पर सवार लोग मुंह पर कपड़ा ढके नजर आए। शुक्रवार के मुकाबले शनिवार को पारे में 0.1 डिग्री का इजाफा हुआ। तराई में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोग गर्मी से निजात पाने के लिए नारियल पानी, नींबू पानी, शिकंजी और गन्ने के रस का सहारा ले रहे हैं।
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वहीं गर्मी के कारण अघोषित बिजली कटौती लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। तेज गर्मी के चलते लोग बहुत जरूरी काम से ही दोपहर में घरों से बाहर निकल रहे हैं। भीषण गर्मी के चलते रोडवेज और रेलवे स्टेशनों में भी यात्रियों की आवाजाही बेहद कम हो रही है। गर्मी के चतले मौसमी फलों की बिक्री काफी बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि लगातार भीषण गर्मी का प्रकोप बना रहेगा और तेज गर्म हवाएं चलेंगी। शनिवार को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
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तराई का तापमान
अधिकतम- 40.5
न्यूनतम- 18.9
पूर्वानुमान- तेज गर्म हवाएं चलेंगी और गर्मी में इजाफा होगा।
फोटो 27आरडीपी 06पी: रुद्रपुर के नैनीताल रोड में दोपहर के समय गर्मी से बचने के लिए मुंह ढककर जाती युवती।
07पी: रुद्रपुर में चेहरे पर कपड़ा ढककर स्कूटी से जाती युवतियां
08पी: रुद्रपुर में गर्मी से बचने के लिए कपड़ा ढककर जाते बाइक सवार
09पी: रुद्रपुर में छाता लेकर निकलती महिला।
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इनसेट
खटीमा में गर्मी ने तोड़ा पिछले दो साल का रिकॉर्ड
खटीमा। सीमांत क्षेत्र में शनिवार को अधिकतम तापमान 40.05 डिग्री सेल्सियस पहुंचने से लोग गर्मी से लोग बेहाल रहे। दिन भर गर्म हवाएं और लू के थपेड़े चलने से बाजार में भी चहलकदमी कम दिखी। जीआईसी मौसम केंद्र के प्रभारी नरेंद्र रौतेला ने बताया कि न्यूनतम तापमान 21 डिग्री दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 27 अप्रैल के दिन यह अधिकतम तापमान दर्ज है। वर्ष 2018 में अधिकतम 36 डिग्री और न्यूनतम 17 डिग्री सेल्सियस था जबकि वर्ष 2017 में अधिकतम पारा 38.5 और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। ब्यूरो
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जंगलों में पानी की कमी, आबादी की ओर रुख कर रहे जानवर
रुद्रपुर। तराई भाबर में पड़ रही भीषण गर्मी ने इंसानों के साथ ही जंगली जानवरों को भी हलकान कर दिया है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग सात रेंजों हल्द्वानी, भाखड़ा, गदगदिया, पीपलपड़ाव, बरहैनी, टांडा, रुद्रपुर रेंज में बंटा है और प्रभाग का जंगल तराई भाबर में फैला हुआ है। गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में पानी के श्रोत और नदियां सूख जाती हैं। इसके चलते इन पर निर्भर जंगली जानवर पानी की तलाश में आबादी की ओर रुख करते हैं। इसके चलते अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में इजाफा होता है। तराई में पारा 40.5 डिग्री तक पहुंच चुका है। गर्मी की तपिश ने इंसानों के साथ ही जानवरों को भी बेचैन कर दिया है। इधर, प्रभाग के एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया कि जंगली जानवरों को पानी की कमी न हो इसलिए स्थायी के साथ ही अस्थाई वाटर हॉल बनाए गए हैं। पानी की ज्यादा दिक्कत भाबर के जंगलों में है, लिहाजा वहां अस्थाई वाटर हॉल बनाकर उनमें टैंकरों से पानी डलवाया जा रहा है। पेयजल स्रोतों के पास स्थायी वाटर हॉल हैं। पीपलपड़ाव और टांडा रेंज में पांच अस्थाई वाटर हॉल बनाए गए हैं। जंगली जानवरों के लिए पानी की कमी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। ब्यूरो