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मेंथा की खेती में रुझान पैदा कर किसानों की आय बढ़ा रहा सीमैप
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पंतनगर में मेंथा की जड़ें खरीदकर ले जाते किसान।
- फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में मंगलवार को आयोजित किसान गोष्ठी में किसानों ने मेंथा की विभिन्न प्रजातियों के लगभग छह क्विंटल बीज (जडे़ं) व जिरेनियम की तीन हजार कटिंग की खरीद की। साथ ही पामारोजा, वैटीवर, खस और लेमन ग्रास आदि के बीजों सहित विभिन्न औषधीय और सगंध पौधों की भी खरीद की।
सीमैप मेंथा की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ाकर उनकी आय बढ़ाने में अतुलनीय योगदान दे रहा है। गोष्ठी में सीमैप के वैज्ञानिकों ने बताया कि सौंदर्य प्रसाधनों और औषधियों की बढ़ती वैश्विक मांग के चलते यदि किसान पारंपरिक फसलों के इतर औषधीय व सगंध पौधों (आैंस) की खेती करें, तो उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।
सीमैप लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. वीआर सिंह ने कहा कि औस पौधों की खेती मैदानी, तराई, भाबर और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रत्येक भौगोलिक परिस्थिति में की जा सकती है। मैंथा की खेती से किसान एक एकड़ में 60 हजार, जबकि जिरेनियम की खेती से एक लाख रूपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पामारोजा की खेती से किसान एक हैक्टेयर में दो लाख रुपये तक आय प्राप्त कर सकते हैं। सीमैप पंतनगर के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. आरसी पडलिया ने वार्षिक लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। समन्वयक डॉ. सौदान सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। गोष्ठी में कृषकों को खेती में आ रही समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान भी किया गया।
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इस दौरान डॉ. संजय कुमार, डॉ. आरके वर्मा, डॉ. आरके उपाध्याय, डॉ. दीपेंद्र कुमार, डॉ. वैंकटेश केटी आदि ने औंस खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया। कोरोना गाइडलाइन की वजह से गोष्ठी में प्रदेश सहित यूपी, दिल्ली, हरियाणा व पंजाब के करीब डेढ़ सौ किसानों ने शिरकत की।
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सीमैप मेंथा की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ाकर उनकी आय बढ़ाने में अतुलनीय योगदान दे रहा है। गोष्ठी में सीमैप के वैज्ञानिकों ने बताया कि सौंदर्य प्रसाधनों और औषधियों की बढ़ती वैश्विक मांग के चलते यदि किसान पारंपरिक फसलों के इतर औषधीय व सगंध पौधों (आैंस) की खेती करें, तो उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।
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सीमैप लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. वीआर सिंह ने कहा कि औस पौधों की खेती मैदानी, तराई, भाबर और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रत्येक भौगोलिक परिस्थिति में की जा सकती है। मैंथा की खेती से किसान एक एकड़ में 60 हजार, जबकि जिरेनियम की खेती से एक लाख रूपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पामारोजा की खेती से किसान एक हैक्टेयर में दो लाख रुपये तक आय प्राप्त कर सकते हैं। सीमैप पंतनगर के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. आरसी पडलिया ने वार्षिक लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। समन्वयक डॉ. सौदान सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। गोष्ठी में कृषकों को खेती में आ रही समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान भी किया गया।
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इस दौरान डॉ. संजय कुमार, डॉ. आरके वर्मा, डॉ. आरके उपाध्याय, डॉ. दीपेंद्र कुमार, डॉ. वैंकटेश केटी आदि ने औंस खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया। कोरोना गाइडलाइन की वजह से गोष्ठी में प्रदेश सहित यूपी, दिल्ली, हरियाणा व पंजाब के करीब डेढ़ सौ किसानों ने शिरकत की।

पंतनगर में किसान गोष्ठी में मौजूद किसान।- फोटो : RUDRAPUR

पंतनगर में किसान गोष्ठी में मंचासीन वैज्ञानिक।- फोटो : RUDRAPUR