{"_id":"5fa300a28ebc3e9bea14f001","slug":"agriculture-kashipur-news-hld4029967200","type":"story","status":"publish","title_hn":"अच्छी फसल के लिए एक एकड़ क्षेत्र में बोएं 40 किलो गेहूं बीज : डा. क्वात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अच्छी फसल के लिए एक एकड़ क्षेत्र में बोएं 40 किलो गेहूं बीज : डा. क्वात्रा
विज्ञापन
किच्छा मंडी गेट पर धरना देते किसान
- फोटो : KITCHHA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तराई विकास सहकारी संघ में मंगलवार को बारदाना खत्म होने से धान खरीद रुक गई। बाद में धान मिल से करीब तीन हजार बोरे मंगवाकर किसानों से खरीदे गए धान को भरा गया। सचिव ने यूसीएफ से पर्याप्त बारदाने की मांग की है।
जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद की तेजी बरकरार है। फुलसुंगा क्रय केंद्र पर 607 क्विंटल और बिगवाड़ा केंद्र पर 554 क्विंटल धान की खरीद हुई। तराई विकास सहकारी संघ के कांटे पर 500 क्विंटल से अधिक धान की खरीद हुई। खरीद के दौरान अचानक बारदाना खत्म होने के कारण धान खरीद रोकनी पड़ी।
तराई विकास सहकारी संघ के सचिव साकेत साही ने बताया कि किसानों से खरीदे गए धान के लिए मिल से 3000 बोरे मंगवाए गए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष धान की रिकॉर्ड खरीद हो रही है लेकिन खरीद के सापेक्ष पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यूसीएफ से बारदाने की मांग की गई है। इधर, बिगवाड़ा स्थित मंडी समिति और गल्ला मंडी में कच्चा आढ़तियों के माध्यम से करीब नौ हजार क्विंटल धान खरीद हुई। ब्यूरो
विज्ञापन
किसानों ने मंडी गेट पर धरना दिया
किच्छा। राइस मिल मालिकों पर धान खरीद करने के लिए किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए किसानों ने मंडी गेट पर धरना दिया। बुधवार सुबह बड़ी संख्या में किसान मंडी पहुंचे। किसानों का आरोप है कि चावल मिल मालिक एक ओर तो अपनी खरीद की सीमा पूरी होने की बात कहकर धान खरीद नहीं कर रहे। वहीं दूसरी ओर किसानों का धान औने -पौने दामों पर खरीद रहे हैं।
उन्होंने सरकार पर किसानों की फसल खरीदने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए। वहां जितेंद्र सिंह संधू, राजू प्रधान, संतोख सिंह, रंजीत सिंह, जगरूप सिंह, श्रवण सिंह, अवतार सिंह आदि थे। इधर देर शाम मंडी सचिव विनोद कुमार लोहुमी ने बताया कि मंडी कार्यालय में राइस मिलरों को बुलाया गया था। देर शाम राइस मिल मालिकों ने खरीद शुरू कर दी है। संवाद
लामाखेड़ा का विवादित धान क्रय केंद्र बंद
सितारगंज। लामाखेड़ा गांव का विवादित धान खरीद केंद्र बंद हो गया है। इससे किसानों के धान की तौल रुक गई और कई किसान धान तुलाने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर केंद्र पर खड़े हैं। किसानों ने एसडीएम को पत्र देकर धान की तौल कराने की मांग की है।
बुधवार को दर्जन भर से अधिक किसान लामाखेड़ा गांव में लगे नेफेड के धान क्रय केंद्र पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंचे और करीब 20 किसान पिछले चार दिन से धान तुलाने के लिए कतार में खड़े हैं। बुधवार को नेफेड के क्रय केंद्र को बंद कर दिया गया। इससे लामाखेड़ा, साधूनगर व आसपास के गांवों के किसान अपना धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने एसडीएम मुक्ता मिश्र से काश्तकारों के धान की फिर से तौल शुरू कराने की मांग की।
इस पर नवांगतुक तहसीलदार परमेश्वरी लाल ने एसएमआई ओम नारायण मिश्र को किसानों का धान तौलने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि बीते 24 अक्तूबर की रात को लामाखेड़ा के एक सीड प्लांट में नेफेड के क्रय केंद्र को संचालित कर मिल का धान तौला जा रहा था।
किसानों के विरोध पर नानकमत्ता एसएमआई ने जांच कर पुलिस को सीड प्लांट स्वामी और केंद्र प्रभारी के खिलाफ तहरीर दी थी जिसके बाद से मामले की जांच चल रही है। वहां साधूनगर के प्रधान मनीष सिंह, राजेश कुमार साहनी लाल सिंह, रेशम सिंह, अनिरुद्ध सिंह राना, बहादुर सिंह राना, भगवान सिंह, द्वारिका प्रसाद, गुरुवचन सिंह, बालिस्टर सिंह आदि थे।
किसानों को भुगतान नहीं हुआ तो दायर करेंगे अवमानना नोटिस
शांतिपुरी। क्षेत्र के खमिया नंबर एक में किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड में पंजीकृत 325 किसान सदस्यों में से अभी तक 217 सदस्यों का करीब 7085 क्विंटल धान तोला गया है। इस संबंध में किसान नेता डॉ. गणेश उपाध्याय ने समिति में पहुंचकर सचिव चेयरमैन सिंह राणा, प्रकाश चंद तिवारी, धान खरीद इंचार्ज जगदीश सिंह मेहता, उर्वरक प्रभारी लक्ष्मी देवी, नवीन चंद्र पंडा सहित अन्य कर्मचारियों और पल्लेदारों का माल्यार्पण कर मिठाई बांटी।
उन्होंने कहा कि पूरे जिले में अब तक 20 लाख क्विंटल धान की सरकारी खरीद हो चुकी है लेकिन केवल 50 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार ने किया है। अभी 323 करोड़ का भुगतान सरकार को करना है। 40 लाख क्विंटल धान कच्चा आढ़ती और राइस मिलरों की ओर से खरीदा गया है। इसका 747 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को करना है। राइस मिलरों ने अवगत कराया है कि बीते वर्षों का 93 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार को अभी करना है।
किसानों के भुगतान के संबंध में सरकार ने हाईकोर्ट की डबल बेंच की खंडपीठ में लिखकर दिया है कि 48 घंटे से लेकर एक हफ्ते के अंदर किसानों का भुगतान करेगी लेकिन 20 दिन से अधिक बीत गए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही हाईकोर्ट में सरकार के खिलाफ अवमानना नोटिस दायर करेंगे। वहां निदेशक महिपाल सिंह बोरा, बहादुर सिंह कोरंगा ,हेमंत दानू, मुनीम पांडे, प्रभु जोशी आदि थे। संवाद
अच्छी फसल के लिए एक एकड़ क्षेत्र में बोएं 40 किलो गेहूं बीज : डॉ. क्वात्रा
काशीपुर। खरीफ फसलों की कटाई के साथ-साथ गेहूं की बुवाई का समय शुरू होने वाला है। बीज बुवाई के लिए किसानों में बीजों के चयन और प्रबंधन को लेकर जिज्ञासा रहती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि एक एकड़ क्षेत्र में 40 किलो गेहूं बीज का प्रयोग कर फसल की अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर के प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि गेहूं की अगेती प्रजातियों की बुवाई नवंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू हो जाती है।
अगेती प्रजातियों में एचडी 3086, 2967, 2733, 336, डी बीडब्ल्यू 222, यूपी 2784, 2865 आदि हैं। किसानों को समय-समय पर बीज बदलना चाहिए और 1 एकड़ क्षेत्र में लगभग 40 किलो गेहूं के बीज का प्रयोग करना चाहिए। एक किलो बीज को 2 ग्राम बाविसटिन अथवा कार्बीडिज्म से उपचारित कर बुवाई करनी चाहिए। जिन खेतों में धान के अवशेष रह जाते हैं वहां पर बेलर मशीन का प्रयोग कर पराली का प्रबंधन किया जा सकता है। हैप्पी सीडर अथवा सुपर सीडर का उपयोग कर खेत में पराली जलाए बिना गेहूं की बुवाई की जा सकती है।
उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। गेहूं की अच्छी उपज के लिए खरीफ की फसल के बाद भूमि में 60 किलो फास्फोरस और 40 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर तथा देर से बुवाई करने पर 60 किलो फास्फोरस, 40 किलो पोटाश, अच्छी उपज के लिए 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सड़ी गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। संवाद
विज्ञापन
जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद की तेजी बरकरार है। फुलसुंगा क्रय केंद्र पर 607 क्विंटल और बिगवाड़ा केंद्र पर 554 क्विंटल धान की खरीद हुई। तराई विकास सहकारी संघ के कांटे पर 500 क्विंटल से अधिक धान की खरीद हुई। खरीद के दौरान अचानक बारदाना खत्म होने के कारण धान खरीद रोकनी पड़ी।
विज्ञापन
तराई विकास सहकारी संघ के सचिव साकेत साही ने बताया कि किसानों से खरीदे गए धान के लिए मिल से 3000 बोरे मंगवाए गए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष धान की रिकॉर्ड खरीद हो रही है लेकिन खरीद के सापेक्ष पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यूसीएफ से बारदाने की मांग की गई है। इधर, बिगवाड़ा स्थित मंडी समिति और गल्ला मंडी में कच्चा आढ़तियों के माध्यम से करीब नौ हजार क्विंटल धान खरीद हुई। ब्यूरो
विज्ञापन
किसानों ने मंडी गेट पर धरना दिया
किच्छा। राइस मिल मालिकों पर धान खरीद करने के लिए किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए किसानों ने मंडी गेट पर धरना दिया। बुधवार सुबह बड़ी संख्या में किसान मंडी पहुंचे। किसानों का आरोप है कि चावल मिल मालिक एक ओर तो अपनी खरीद की सीमा पूरी होने की बात कहकर धान खरीद नहीं कर रहे। वहीं दूसरी ओर किसानों का धान औने -पौने दामों पर खरीद रहे हैं।
उन्होंने सरकार पर किसानों की फसल खरीदने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए। वहां जितेंद्र सिंह संधू, राजू प्रधान, संतोख सिंह, रंजीत सिंह, जगरूप सिंह, श्रवण सिंह, अवतार सिंह आदि थे। इधर देर शाम मंडी सचिव विनोद कुमार लोहुमी ने बताया कि मंडी कार्यालय में राइस मिलरों को बुलाया गया था। देर शाम राइस मिल मालिकों ने खरीद शुरू कर दी है। संवाद
लामाखेड़ा का विवादित धान क्रय केंद्र बंद
सितारगंज। लामाखेड़ा गांव का विवादित धान खरीद केंद्र बंद हो गया है। इससे किसानों के धान की तौल रुक गई और कई किसान धान तुलाने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर केंद्र पर खड़े हैं। किसानों ने एसडीएम को पत्र देकर धान की तौल कराने की मांग की है।
बुधवार को दर्जन भर से अधिक किसान लामाखेड़ा गांव में लगे नेफेड के धान क्रय केंद्र पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंचे और करीब 20 किसान पिछले चार दिन से धान तुलाने के लिए कतार में खड़े हैं। बुधवार को नेफेड के क्रय केंद्र को बंद कर दिया गया। इससे लामाखेड़ा, साधूनगर व आसपास के गांवों के किसान अपना धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने एसडीएम मुक्ता मिश्र से काश्तकारों के धान की फिर से तौल शुरू कराने की मांग की।
इस पर नवांगतुक तहसीलदार परमेश्वरी लाल ने एसएमआई ओम नारायण मिश्र को किसानों का धान तौलने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि बीते 24 अक्तूबर की रात को लामाखेड़ा के एक सीड प्लांट में नेफेड के क्रय केंद्र को संचालित कर मिल का धान तौला जा रहा था।
किसानों के विरोध पर नानकमत्ता एसएमआई ने जांच कर पुलिस को सीड प्लांट स्वामी और केंद्र प्रभारी के खिलाफ तहरीर दी थी जिसके बाद से मामले की जांच चल रही है। वहां साधूनगर के प्रधान मनीष सिंह, राजेश कुमार साहनी लाल सिंह, रेशम सिंह, अनिरुद्ध सिंह राना, बहादुर सिंह राना, भगवान सिंह, द्वारिका प्रसाद, गुरुवचन सिंह, बालिस्टर सिंह आदि थे।
किसानों को भुगतान नहीं हुआ तो दायर करेंगे अवमानना नोटिस
शांतिपुरी। क्षेत्र के खमिया नंबर एक में किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड में पंजीकृत 325 किसान सदस्यों में से अभी तक 217 सदस्यों का करीब 7085 क्विंटल धान तोला गया है। इस संबंध में किसान नेता डॉ. गणेश उपाध्याय ने समिति में पहुंचकर सचिव चेयरमैन सिंह राणा, प्रकाश चंद तिवारी, धान खरीद इंचार्ज जगदीश सिंह मेहता, उर्वरक प्रभारी लक्ष्मी देवी, नवीन चंद्र पंडा सहित अन्य कर्मचारियों और पल्लेदारों का माल्यार्पण कर मिठाई बांटी।
उन्होंने कहा कि पूरे जिले में अब तक 20 लाख क्विंटल धान की सरकारी खरीद हो चुकी है लेकिन केवल 50 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार ने किया है। अभी 323 करोड़ का भुगतान सरकार को करना है। 40 लाख क्विंटल धान कच्चा आढ़ती और राइस मिलरों की ओर से खरीदा गया है। इसका 747 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को करना है। राइस मिलरों ने अवगत कराया है कि बीते वर्षों का 93 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार को अभी करना है।
किसानों के भुगतान के संबंध में सरकार ने हाईकोर्ट की डबल बेंच की खंडपीठ में लिखकर दिया है कि 48 घंटे से लेकर एक हफ्ते के अंदर किसानों का भुगतान करेगी लेकिन 20 दिन से अधिक बीत गए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही हाईकोर्ट में सरकार के खिलाफ अवमानना नोटिस दायर करेंगे। वहां निदेशक महिपाल सिंह बोरा, बहादुर सिंह कोरंगा ,हेमंत दानू, मुनीम पांडे, प्रभु जोशी आदि थे। संवाद
अच्छी फसल के लिए एक एकड़ क्षेत्र में बोएं 40 किलो गेहूं बीज : डॉ. क्वात्रा
काशीपुर। खरीफ फसलों की कटाई के साथ-साथ गेहूं की बुवाई का समय शुरू होने वाला है। बीज बुवाई के लिए किसानों में बीजों के चयन और प्रबंधन को लेकर जिज्ञासा रहती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि एक एकड़ क्षेत्र में 40 किलो गेहूं बीज का प्रयोग कर फसल की अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर के प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि गेहूं की अगेती प्रजातियों की बुवाई नवंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू हो जाती है।
अगेती प्रजातियों में एचडी 3086, 2967, 2733, 336, डी बीडब्ल्यू 222, यूपी 2784, 2865 आदि हैं। किसानों को समय-समय पर बीज बदलना चाहिए और 1 एकड़ क्षेत्र में लगभग 40 किलो गेहूं के बीज का प्रयोग करना चाहिए। एक किलो बीज को 2 ग्राम बाविसटिन अथवा कार्बीडिज्म से उपचारित कर बुवाई करनी चाहिए। जिन खेतों में धान के अवशेष रह जाते हैं वहां पर बेलर मशीन का प्रयोग कर पराली का प्रबंधन किया जा सकता है। हैप्पी सीडर अथवा सुपर सीडर का उपयोग कर खेत में पराली जलाए बिना गेहूं की बुवाई की जा सकती है।
उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। गेहूं की अच्छी उपज के लिए खरीफ की फसल के बाद भूमि में 60 किलो फास्फोरस और 40 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर तथा देर से बुवाई करने पर 60 किलो फास्फोरस, 40 किलो पोटाश, अच्छी उपज के लिए 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सड़ी गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। संवाद

तराई विकास सहकारी संघ में खरीदा गया किसानों का धान।- फोटो : RUDRAPUR