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केदारनाथ्ाः अब ताउम्र रिसते रहेंगे ये रिश्ते

Sun, 30 Jun 2013 06:41 PM IST
रजा शास्त्री
रजा शास्त्री Updated Sun, 30 Jun 2013 06:41 PM IST
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These relationships will now take it drips

पहाड़ों पर टूटी आपदा में मरने की आशंका तो हजारों की है, लेकिन डीएनए सैंपल सिर्फ 62 लोगों के शवों से सुरक्षित किए गए हैं। आपदा में खोए बाकी लोगों के निशान उनके परिजनों को अब नहीं मिल पाएंगे। अब ये रिश्ते ताउम्र रिसते रहेंगे। जिनके डीएनए सैंपल लिए गए हैं, उनकी निशानी भी बाबा केदारनाथ की घाटी में नहीं, दिल्ली या हैदराबाद में मिल पाएगी।

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महानिदेशक पुलिस सत्यव्रत का कहना है कि सैंपल को दिल्ली या हैदराबाद की लैब भेजा जाएगा। शासन के आंकड़ों के लिहाज से घाटी में आई आपदा में 560 लोग मरे हैं। अगर इसे सही माना जाए तो डीएनए सैंपल इकट्ठा करने में शासन ने कोताही बरती है। स्थिति अभी अस्पष्ट है।
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डाक्टरों ने लिए डीएनए सैंपल

यह भी पक्का नहीं है कि कितने लोगों के सैंपल लिए गए। जौलीग्रांट मेडिकल कालेज के फोरेंसिक विशेषज्ञ डा.संजय दास प्रभावित क्षेत्रों में सात दिन रहने के बाद वापस आ गए हैं।
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उन्होंने बताया कि कुल 18 शवों से सैंपल लिए गए हैं। जबकि डीजीपी सत्यव्रत ने बताया कि जिन 62 शवों का दाह संस्कार हो गया है, उनके डीएनए सैंपल लिया गया है। अब इन्हें लैब भेजा जाएगा।

अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि फोरेंसिक टीम के लौटने के बाद जिन शवों का दाह संस्कार किया जाएगा उनके सैंपल का क्या होगा? यही नहीं जो शव सड़-गल गए हैं, उनका क्या होगा? जो लोग आपदा से बचने के चक्कर में पहाड़ों के दुर्गम स्थानों पर पहुंच कर मर गए, उनकी पहचान बाकी रखने के लिए क्या किया जाएगा? इन सवालों के जवाब शासन के किसी अधिकारी के पास नहीं हैं।


मंडलायुक्त गढ़वाल सुवर्धन का कहना है कि पुलिस डीएनए सैंपल कलेक्ट कर रही है। घाटी में तैनात प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे शवों की बड़ी संख्या है, जिनसे कुछ दिन में मांस बिल्कुल गायब हो जाएगा और बचेंगी सिर्फ हड्डियां। उनकी फोटो भी सुरक्षित नहीं की जा सकी है। अगर कोई इन्हें खोजता आए भी तो पहचान नहीं हो पाएगी।

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