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लॉकडाउन में पापा की नौकरी छूटी तो मददगार बनी बेटियां

Sun, 29 May 2022 09:09 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 29 May 2022 09:09 PM IST
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When father lost his job in lockdown, daughters came forward to help
लॉकडाउन में पापा की नौकरी छूटी तो बेटियां मदद करने को आगे आईं। उन्होंने परिवार पर बोझ बनने के बजाए कुछ करने की ठानी। काफी सोच विचार के बाद बेटियों ने अपने घर पर ही अरसे (चावल से बनाई जाने वाली मिठाई) बनाने की योजना बनाई। मामा से प्रशिक्षण लेकर अरसा बनाना शुरू किया, तो उनकी यह योजना परवान चढ़ने लगी। अब सालभर में शादियों के सीजन में डिमांड 20 से 22 क्विंटल तक बढ़ गई है।
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गढ़वाल में होने वाली शादियों में अक्सर मिठाई के रूप में अरसा देने की परंपरा है। खासकर गांव में होने वाली शादियों में अरसा बनाने का प्रचलन है। मायके से ससुराल जाने वाली बेटियों को भी मिठाई (कलेऊ) के रूप में अरसे दिए जाते हैं, लेकिन इसको बनाने की विधि काफी जटिल होने से बहुत कम लोग ही अरसा बना पाते हैं। मजबूरन लोगों को बाजार में मिलने वाली मिठाई खरीदनी पड़ती है।
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चंबा ब्लाक में नकोट क्षेत्र के ग्राम भैली की बेटियों ने इसको मौके में बदलने का प्रयास किया, तो उन्हें हर शादियों में अरसे की डिमांड मिलने लगी है। एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा अंजली नेगी ने बताया कि कोरोना काल के शुरूआती लॉकडाउन में पापा की नौकरी छूटने पर वह गांव लौट आए, जिससे माता-पिता के साथ ही तीनों बहनों को परिवार की आजीविका की चिंता सताने लगी। कई दिनों तक सोच-विचार के बाद अंजली ने घर में ही कुछ करने की ठानी। इस दौरान उसे अरसा बनाकर बेचने का आइडिया सूझा, तो गजा में मामा विनय सिंह चौहान से तीन दिन का प्रशिक्षण लेकर अपने घर में 12वीं में पढ़ रही छोटी बहन अंकिता और अंशिका के साथ अरसे बनाना शुरू किया।
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अंजली ने बताया कि अब उन्हें सालभर में विवाह के सीजन में आसपास के गांव, देहरादून, चंडीगढ़ और दिल्ली आदि जगहों से कुल 20 से 22 क्विंटल का आर्डर मिलने लगा है। अन्य दिनों में भी 10 से 20 किलो के आर्डर मिलते रहते हैं, जिससे आय भी बढ़ने लगी है। बताया कि वे 130-140 रुपये किलो के हिसाब बेच रही हैं। उन्होंने बताया कि पापा महावीर सिंह नेगी और मां पूर्णी देवी भी अपने घर के काम से समय निकालकर सहयोग करते हैं। संवाद

ऐसे बनाया जाता है अरसा
अरसा चावल और गुड़ से बनाए जाते हैं। चावल को दो दिन तक पानी में भिगोने के बाद चक्की में आटे की तरह पीसकर उसे पानी में पकाए गए गुड़ के साथ मिलाया जाता है। उसके बाद गर्म तेल में डालकर तला जाता है।
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