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कांडा में बनेगा डौर गांव के आपदा प्रभावितों के मकान
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डौर गांव के आपदा प्रभावित परिवारों का नया आशियाना कांडा तोक में बनेगा। पहले चरण में जिला प्रशासन ने डौर गांव के 19 प्रभावित परिवारों को भवन निर्माण के लिए भूमि के पट्टे स्वीकृत कर दिए है। भू-वैज्ञानिकों की सर्वे रिपोर्ट के बाद शेष 15 परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की कार्रवाई की जाएगी।
नरेंद्रनगर ब्लॉक के डौर गांव में निवासरत परिवार 2011 से भूस्खलन की मार झेल रहे है। 2011 में भूस्खलन से डौर गांव में दो आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए थे। मलबे में चार लोग जिंदा दफन हो गए थे। भूस्खलन से कई मकानों में दरारें पड़ गई थी। गांव छोड़कर प्रभावित परिवार तब नरेंद्रनगर पुरानी पुलिस लाइन के भवनों पर शिफ्ट हो गए थे। सर्वे कर तब भू-वैज्ञानिकों ने डौर गांव को भूस्खलन की दृष्टि से अति संवदेनशील बताया था।
नौ साल इंतजार के बाद जिला प्रशासन ने डौर गांव में निवासरत 34 में से 19 परिवारों को भवन निर्माण के लिए गांव से कुछ दूरी पर कांडा तोक में भूमि के पट्टे आवंटित कर दिए हैं। एडीएम शिवचरण द्विवेदी ने बताया कि शेष 15 परिवारों के पुनर्वास के लिए दोबारा से गांव का भू-वैज्ञानिकों से सर्वे कराया जाएगा।
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नरेंद्रनगर ब्लॉक के डौर गांव में निवासरत परिवार 2011 से भूस्खलन की मार झेल रहे है। 2011 में भूस्खलन से डौर गांव में दो आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए थे। मलबे में चार लोग जिंदा दफन हो गए थे। भूस्खलन से कई मकानों में दरारें पड़ गई थी। गांव छोड़कर प्रभावित परिवार तब नरेंद्रनगर पुरानी पुलिस लाइन के भवनों पर शिफ्ट हो गए थे। सर्वे कर तब भू-वैज्ञानिकों ने डौर गांव को भूस्खलन की दृष्टि से अति संवदेनशील बताया था।
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नौ साल इंतजार के बाद जिला प्रशासन ने डौर गांव में निवासरत 34 में से 19 परिवारों को भवन निर्माण के लिए गांव से कुछ दूरी पर कांडा तोक में भूमि के पट्टे आवंटित कर दिए हैं। एडीएम शिवचरण द्विवेदी ने बताया कि शेष 15 परिवारों के पुनर्वास के लिए दोबारा से गांव का भू-वैज्ञानिकों से सर्वे कराया जाएगा।
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