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गोरशाली गांव की अनोखी रामलीला: राम नहीं, नाग देवता का होता है राततिलक

Tue, 30 Dec 2025 07:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी Updated Tue, 30 Dec 2025 07:50 PM IST
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Ratatilak is done not by Ram but by Nag Devta.

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विपिन नेगी।



उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड के गोरशाली गांव में आयोजित होने वाली रामलीला अपनी अनूठी परंपरा के लिए जानी जाती है, जहां आज भी राम के पात्र के स्थान पर वासुकी नाग देवता को प्रतीकात्मक रूप से राजतिलक किया जाता है। टिहरी रियासत के समय शुरू हुई यह परंपरा टिहरी राजा के निर्देश पर करीब 122 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है।

स्थानीय निवासी डॉ. माधव प्रसाद शास्त्री के अनुसार, वर्ष 1903 में आलम सिंह चौहान ने अपने घर से गायत्री गुरु स्व. मोतीराम नौटियाल के मार्गदर्शन में रामलीला की शुरुआत की। शुरुआती तीन-चार वर्षों तक रामलीला का अभ्यास घर के भीतर ही किया गया। वर्ष 1907 में नाग देवता के मंदिर प्रांगण में दो थौकी गांववासियों के सहयोग से मंगशीर बलिराज के दिन तांबे की ध्वजा रोपी गई, जो आज भी मंदिर परिसर में स्थापित है। उसी वर्ष मंगशीर पंचमी से सार्वजनिक रूप से रामलीला का मंचन शुरू हुआ, जिसमें राम का पात्र वासवानंद नौटियाल, लक्ष्मण मंसाराम नौटियाल और सीता का पात्र नारायण सिंह राणा ने निभाया।
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गोरशाली की रामलीला के दौरान राजमुकुट धारण किए जाने की सूचना राजा के गुप्तचरों ने टिहरी नरेश तक पहुंचाई, जिसे उन्होंने अपना अपमान मानते हुए रामलीला पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया। इस पर स्थानीय निवासी मातबर सिंह और अभि सिंह राणा ने वनों के मालदारी कारोबारी राधावल्लभ खंडूड़ी और घनानंद खंडूड़ी के माध्यम से राजा से प्रतिबंध हटाने की मांग की। इसके बाद राजा ने आदेश दिया कि रामलीला में राजतिलक राम के पात्र को नहीं, बल्कि वासुकी नाग देवता को दिया जाए। तभी से यह परंपरा आज तक निभाई जा रही है।
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डॉ. माधव प्रसाद शास्त्री बताते हैं कि गोरशाली गांव के लोग आज भी रामलीला से जुड़ी कई प्राचीन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। रामलीला के दौरान सभी पात्र और कार्यकर्ता मंदिर में ही शयन करते हैं और सुबह पूरे गांव में प्रभात फेरी निकाली जाती है। इसके साथ ही हनुमान मंदिर के सामने सुंदरकांड पाठ, 100 हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, रामचरित मानस का मूल पाठ, पूजन और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाते हैं।
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