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अन्ना ने दोहराया-पदमभूषण भी लौटा दूंगा
Tehri
Updated Fri, 17 May 2013 05:30 AM IST
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नई टिहरी। जनतंत्र यात्रा के तहत नई टिहरी पहुंचे प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे ने फिर कहा कि भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए प्रभावी पहल नहीं हुई, तो वह पदमभूषण भी लौटा देंगे। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई जारी रहेगी।
जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में संघर्ष कर सरकार को हिला देने वाले अन्ना को देखने के लिए बौराड़ी स्टेडियम में भीड़ उमड़ पड़ी। उन्हें सुनने के लिए बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। अन्ना ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए डेढ़ साल और देशभर में घूमूंगा। 121 करोड़ लोगों में से अगर छह करोड़ लोग भी संगठित हो गए तो फिर से रामलीला मैदान में आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू की जाएगी। इसके बाद गणतंत्र आएगा तो राजनीतिक दल बर्खास्त होगें, जिसमें कोई पक्ष-विपक्ष नहीं होगा, बल्कि जनता की सरकार बनेगी। अन्ना ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए युवा शक्ति का जगाना जरूरी है। 45 मिनट के भाषण में अन्ना ने कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने और व्यवस्था बदलने के लिए जनता को प्रतिज्ञा करनी होगी कि आगे आने वाले चुनाव में गुंडा और भ्रष्ट नेताओं को वोट नहीं देंगे। वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारती ने भी विचार रखे। इस मौके पर मोहन सिंह रावत गांववासी, पालिकाध्यक्ष उमेशचरण गुसाईं, महीपाल नेगी, साहब सिंह सजवाण, नागरिक मंच के अध्यक्ष रामानंद भट्ट, विक्रम कठैत आदि मौजूद थे। इससे पहले चंबा पहुंचे अन्ना ने वीर गबर सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।
जब अन्ना ने आत्महत्या की सोची
अन्ना ने अपने जीवन के संघर्ष को बयां करते हुए कहा कि तेरा- मेरा और तेरा भी मेरा जैसी बढ़ती प्रवृति से तंग आकर जीवन में एक बार उन्होंने आत्म हत्या की सोची, लेकिन इस बीच विवेकानंद के विचार पढ़ने के बाद 26 वर्ष की आयु में सोचा की शादी नहीं करूंगा। इसके बाद देश व समाज सेवा का व्रत लिया।
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अन्ना को दिया प्रशस्ति पत्र
बौराड़ी स्टेडियम में आए अन्ना को भ्रष्टाचारियों और दमनकारियों से बचाने के लिए लोगों ने पहाड़ी देववृक्ष टिमरू का डंडा भेंट किया। टीएचडीसी कर्मचारी संगठन ने भी प्रशस्ति पत्र भेंट किया।
मै भी अन्ना, तू भी अन्ना के नारे
समाजसेवी अन्ना के आने से पहले बौराड़ी पांडाल में ज्यादा भीड़ नहीं दिखी। लेकिन जैसे ही तीन बजे अन्ना मैदान में पहुंचे, एकाएक भीड़ जुट गई। लोगों ने मै भी अन्ना तुम भी अन्ना के नारे लगाए। इस बीच अन्ना का सिपाही बनने के लिए 25 लोगों ने अपनी सहमति दी।
फूंका आजादी की दूसरी लड़ाई का बिगुल
चिन्यालीसौड़। उत्तरकाशी से लौटते हुए चिन्यालीसौड़ पहुंचने पर अन्ना हजारे की जनतंत्र यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। अन्ना हजारे ने इसे आजादी की दूसरी लड़ाई बताते हुए लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ सिपाही के तौर पर सामने आने की अपील की।
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जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में संघर्ष कर सरकार को हिला देने वाले अन्ना को देखने के लिए बौराड़ी स्टेडियम में भीड़ उमड़ पड़ी। उन्हें सुनने के लिए बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। अन्ना ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए डेढ़ साल और देशभर में घूमूंगा। 121 करोड़ लोगों में से अगर छह करोड़ लोग भी संगठित हो गए तो फिर से रामलीला मैदान में आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू की जाएगी। इसके बाद गणतंत्र आएगा तो राजनीतिक दल बर्खास्त होगें, जिसमें कोई पक्ष-विपक्ष नहीं होगा, बल्कि जनता की सरकार बनेगी। अन्ना ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए युवा शक्ति का जगाना जरूरी है। 45 मिनट के भाषण में अन्ना ने कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने और व्यवस्था बदलने के लिए जनता को प्रतिज्ञा करनी होगी कि आगे आने वाले चुनाव में गुंडा और भ्रष्ट नेताओं को वोट नहीं देंगे। वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारती ने भी विचार रखे। इस मौके पर मोहन सिंह रावत गांववासी, पालिकाध्यक्ष उमेशचरण गुसाईं, महीपाल नेगी, साहब सिंह सजवाण, नागरिक मंच के अध्यक्ष रामानंद भट्ट, विक्रम कठैत आदि मौजूद थे। इससे पहले चंबा पहुंचे अन्ना ने वीर गबर सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।
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जब अन्ना ने आत्महत्या की सोची
अन्ना ने अपने जीवन के संघर्ष को बयां करते हुए कहा कि तेरा- मेरा और तेरा भी मेरा जैसी बढ़ती प्रवृति से तंग आकर जीवन में एक बार उन्होंने आत्म हत्या की सोची, लेकिन इस बीच विवेकानंद के विचार पढ़ने के बाद 26 वर्ष की आयु में सोचा की शादी नहीं करूंगा। इसके बाद देश व समाज सेवा का व्रत लिया।
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अन्ना को दिया प्रशस्ति पत्र
बौराड़ी स्टेडियम में आए अन्ना को भ्रष्टाचारियों और दमनकारियों से बचाने के लिए लोगों ने पहाड़ी देववृक्ष टिमरू का डंडा भेंट किया। टीएचडीसी कर्मचारी संगठन ने भी प्रशस्ति पत्र भेंट किया।
मै भी अन्ना, तू भी अन्ना के नारे
समाजसेवी अन्ना के आने से पहले बौराड़ी पांडाल में ज्यादा भीड़ नहीं दिखी। लेकिन जैसे ही तीन बजे अन्ना मैदान में पहुंचे, एकाएक भीड़ जुट गई। लोगों ने मै भी अन्ना तुम भी अन्ना के नारे लगाए। इस बीच अन्ना का सिपाही बनने के लिए 25 लोगों ने अपनी सहमति दी।
फूंका आजादी की दूसरी लड़ाई का बिगुल
चिन्यालीसौड़। उत्तरकाशी से लौटते हुए चिन्यालीसौड़ पहुंचने पर अन्ना हजारे की जनतंत्र यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। अन्ना हजारे ने इसे आजादी की दूसरी लड़ाई बताते हुए लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ सिपाही के तौर पर सामने आने की अपील की।