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पुनर्वास के लिए कब तक आंदोलन करते रहेंगे ग्रामीण
Updated Wed, 06 Dec 2017 10:38 PM IST
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नई टिहरी। टिहरी बांध की झील से प्रभावित नंदगांव के ग्रामीणों ने पुनर्वास की मांग को लेकर एक बार फिर कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। प्रभावित वर्ष 2010 से झील के कारण भूधंसाव की चपेट में आए परिवारों के पुनर्वास की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
कलक्ट्रेट परिसर में धरना देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2010 में टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 830 मीटर तक भरने पर झील क्षेत्र में भारी भूधंसाव शुरू हो गया था। सरकार ने सितंबर 2010 में विशेषज्ञ समिति गठित कर भिलंगना और भागीरथी घाटी के 45 गांवों का निरीक्षण कर 17 गांवों को खतरा बताते हुए 415 परिवारों के पुनर्वास की संस्तुति दी गई थी। जनवरी 2013 में संपाश्र्विक क्षति नीति के तहत तीन माह में विस्थापन करने की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन कई बार आंदोलन करने और जेल की हवा खाने के बाद 2016 में ऋषिकेश, आईडीपीएल, दुधु पानी और भानियावाला में स्थित भूमि आवंटन के लिए पुनर्वास निदेशालय ने केंद्र सरकार को ऑन लाइन प्रस्ताव भेजा था। समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा ने कहा कि भानियावाला में जिस भूमि की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिली है, उसे पुनर्वास के लिए आवंटन करने, ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, 75 प्रतिशत विस्थापित गांव पुनर्वास किया जाए, ऐसा नहीं होने पर आठ से अनशन किया जाएगा। धरना देने वालों में प्रदीप भट्ट, गोविंद सिंह, मोती सिंह, कौशल्या देवी, जगदंबा प्रसाद, सरोजनी देवी, इंद्रा देवी, शाखा देवी, विमला देवी, समा देवी, सुमेरा देवी, सुनीता, सीता, मथुरा, सुशीला, अनीता, बालमा, प्रेमा, सीमा, चंडी प्रसाद, रुकमणी देवी और मंगशिरी देवी आदि शामिल थे।
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कलक्ट्रेट परिसर में धरना देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2010 में टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 830 मीटर तक भरने पर झील क्षेत्र में भारी भूधंसाव शुरू हो गया था। सरकार ने सितंबर 2010 में विशेषज्ञ समिति गठित कर भिलंगना और भागीरथी घाटी के 45 गांवों का निरीक्षण कर 17 गांवों को खतरा बताते हुए 415 परिवारों के पुनर्वास की संस्तुति दी गई थी। जनवरी 2013 में संपाश्र्विक क्षति नीति के तहत तीन माह में विस्थापन करने की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन कई बार आंदोलन करने और जेल की हवा खाने के बाद 2016 में ऋषिकेश, आईडीपीएल, दुधु पानी और भानियावाला में स्थित भूमि आवंटन के लिए पुनर्वास निदेशालय ने केंद्र सरकार को ऑन लाइन प्रस्ताव भेजा था। समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा ने कहा कि भानियावाला में जिस भूमि की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिली है, उसे पुनर्वास के लिए आवंटन करने, ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, 75 प्रतिशत विस्थापित गांव पुनर्वास किया जाए, ऐसा नहीं होने पर आठ से अनशन किया जाएगा। धरना देने वालों में प्रदीप भट्ट, गोविंद सिंह, मोती सिंह, कौशल्या देवी, जगदंबा प्रसाद, सरोजनी देवी, इंद्रा देवी, शाखा देवी, विमला देवी, समा देवी, सुमेरा देवी, सुनीता, सीता, मथुरा, सुशीला, अनीता, बालमा, प्रेमा, सीमा, चंडी प्रसाद, रुकमणी देवी और मंगशिरी देवी आदि शामिल थे।
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