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भैंस की पूंछ, हो गया ना 'काना'!
अमर उजाला, रजा शास्त्री, देहरादून
Updated Mon, 26 Aug 2013 03:52 PM IST
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हो सकता है कि आप यह जानकर चौंके, लेकिन सच है कि भैंस और गाय की पूंछ उत्तराखंड में ग्रामीण अंचलों के अधिकांश लोगों की कार्निया की खराबी के लिए ‘गुनाहगार’ है।
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दूध दूहते वक्त लोगों की आंखों पर भैंस की पूंछ पड़ने से कार्निया में खराश पड़ जाती है। यही खराश संक्रमण के कारण अल्सर में तब्दील हो जाती है।
शोध में तथ्य उजागर
हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के नेत्ररोग विभाग के शोध में यह तथ्य उजागर हुआ है। इस संबंध में हुए शोध का पहला चरण 2005 पूरा हुआ था।
इसमें 90 रोगियों को शामिल किया गया था। इसके बाद लगातार इस समस्या पर काम हो रहा है। ग्रामीण इलाकों से अस्पताल में कार्निया की खराबी के जो रोगी आते हैं, उनकी समस्या का मूल कारण भैंस और गाय की पूंछ ही निकलती है।
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आंख में आ जाती है खराश
नेत्र रोग विभाग की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. रेनू धस्माना ने बताया कि गाय-भैंस की पूंछ लगने से आंख में खराश आ जाती है।
इससे संक्रमण हो जाता है। लोग शुरुआत में ध्यान नहीं देते जिससे अल्सर हो जाता है और कार्निया खराब हो जाती है। उत्तराखंड में कार्निया में सबसे अधिक संक्रमण फफूंदी का होता है।
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अल्सर से डैमेज कार्निया
फंगल अल्सर से कार्निया खराब होती है। इसके अलावा बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण भी होता है जो कार्निया की खराबी का सबब बनता है। हिमालयन अस्पताल और देहरादून आफ्थेलोमोलोजिकल सोसाइटी के मुताबिक उत्तराखंड में कार्निया की खराबी के अधिकांश केस ग्रामीण अंचलों से ही आते हैं।
सोसाइटी के अध्यक्ष सीनियर आई सर्जन डा. एमएस रावत ने बताया कि लोग जल्दी इलाज शुरू कर दें तो कार्निया को ठीक किया जा सकता है। लेकिन, अधिकांश लोग नीम-हकीमी के चक्कर काटने के बाद अस्पताल आते हैं।