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24 दिन बाद भी राहत का इंतजार
गढ़वाल/ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2013 09:29 AM IST
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आपदा के 24 दिन बाद भी राहत की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई है। सड़क किनारे और आसान पहुंच वाले गांवों में इफरात का राशन है, जबकि दूरदराज के कई गांव अब भी राहत का इंतजार कर रहे हैं।
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राहत के लिए उत्तरकाशी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उपयोग करने की बात की जा रही है। पर यह मामला सरकारी मदद का है। स्वयंसेवी संस्थाओं और राजनीतिक दलों की ओर से हो रही मदद सड़क मार्ग के गांवों तक ही सिमट कर रह जा रही है। अगत्स्यमुनि में ही राहत कार्य देख रहे गजेंद्र रौतेला के मुताबिक विजयनगर के सामने के दर्जन भर गावों को मदद नहीं मिल पा रही है।
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उनकी ओर से नदी में रस्सी डालकर रस्सी के सहारे कुछ राहत सामग्री गांवों तक भिजवाई गई है। इसके लिए माउंटेन शैपर्ड संस्था की मदद ली जा रही है। पर्याप्त राहत के गांवों तक न पहुंचने की बात केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत भी कर रही हैं।
कोई इंतजाम नहीं
वहीं रुद्रप्रयाग के नागपुर पट्टी के 18 से अधिक गावों में सभी मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से राशन का संकट गहरा गया है। शासन-प्रशासन ने राहत सामग्री पहुंचाने का भी यहां कोई इंतजाम नहीं किया है। जरूरी वस्तुओं की खरीद के लिए गांव वालों को 35 किमी का पैदल सफर तय करना पड़ रहा है। अब कुछ गावों में भूस्खलन सक्रिय होने से खतरा पैदा हो गया है।
नागपुर पट्टी के अंतर्गत धार तोंदला, तोमला, चडाखंडी, अमर तोंदला, सीसीगांव, बगड़धार, बगड़, कुराली, गुगली, कुलाकोट, पिल्लू, जहंगी, बांजगड्डू, सिलोका, सलूण्ड, रौंठला और पल्या तोंदला गांव में अभी तक राशन की आपूर्ति नहीं हो पाई है। इन गावों के सभी संपर्क मार्ग आपदा के कारण क्षतिग्रस्त पड़े हैं। ग्रामीण गावों में ही कैद हो गए हैं। अमर तोंदला, चडाखण्डी और सीसीगांव में भूस्खलन सक्रिय हो गया है, जिससे इन गावों में निवास कर रहे 50 परिवाराें को भी खतरा पैदा हो गया है।
राहत न मिलने की शिकायत भी की
केदारघाटी में बृहस्पतिवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य भी घूमे। आर्य ने गुप्तकाशी से लेकर फाटा तक का जायजा लिया। फाटा में लोगों ने आर्य से राहत न मिलने की शिकायत भी की। आर्य ने फोन पर जिलाधिकारी और मुख्य सचिव से भी बात की। आर्य के मुताबिक सड़कों की हालत बहुत खराब है और इलाके में बिजली नही है। हल्की बरसात होने पर भी लोग सहम जा रहे हैं।
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