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सपैरा गैंग हुआ हाईटेक, बदला वारदात का तरीका

Wed, 06 Apr 2016 02:36 PM IST
मुकेश जुयाल / अमर उजाला, विकासनगर
मुकेश जुयाल / अमर उजाला, विकासनगर Updated Wed, 06 Apr 2016 02:36 PM IST
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sapera gang became high tech

विकासनगर में सोमवार देर रात डकैती को अंजाम देने वाले बदमाश सपेरा गिरोह के बताए जा रहे हैं। यह गिरोह पंजाब में सक्रिय है।

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पुलिस की माने तो समय के साथ यह गैंग भी हाईटेक हो गया है। इन्हें सर्विलांस की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि बदमाश पीड़ितों से जो मोबाइल लेकर गए हैं वह अभी तक स्विच ऑफ आ रहे हैं। इसके अलावा अभी तक यह गैंग वारदात के दौरान किसी वाहन का इस्तेमाल नहीं करते थे बल्कि वारदात को अंजाम देने से पहले उस इलाके में डेरा डालते थे और घटना को अंजाम देकर पैदल ही चंपत हो जाते थे।
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सूत्रों की माने तो सपेरा, छैमार, बावरिया, सांसी आदि जातियां किसी भी वारदात को अंजाम देने के दौरान लोगों को डंडों, लोहे की रॉड आदि से प्रहार करते हैं। उनकी मंशा होती है कि अधिक से अधिक खून बहाकर दहशत पैदा की जाए, लेकिन लक्ष्मीपुर-बालूवाला में चंद्रकांता के यहां हुई डकैती की वारदात में डकैतों ने ऐसा नहीं किया।
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विरोध करने पर उन्होंने चंद्रकांता और उनकी सांस दरामती देवी के साथ हाथों से मारपीट जरूर की। वहीं पड़ोस के कमरे में सोए चंद्रकांता के जीजा आरपी सिंह, उनकी पत्नी और साली को बदमाशों ने कुछ नहीं कहा। बदमाशों के कहने पर उन्होंने मोबाइल और गहने उतार कर दे दिए।

एक बदमाश हाथ में टार्च लिए हुआ था, जबकि अन्य मोबाइल की लाइट का इस्तेमाल कर रहे थे। गिरोह सदस्यों के इस बदलाव से पुलिस के आला अधिकारी भी हैरत में हैं। माना जा रहा है बदमाशों को घर में मौजूद लोगों का ज्यादा विरोध नहीं झेलना पड़ा, यहीं वजह रही कि वे नरमी से पेश आए।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि सपेरा जैसी ट्राइबल जातियों ने अपराध का तरीका बदला है। पहले वे पैदल या फिर नदी के रास्ते पहुंचते थे, लेकिन अब वे वाहनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। वे प्राय: वारदात के आसपास मिलने वाले लाठी डंडों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब वे तमंचे आदि का भी प्रयोग करने लगे हैं।

सहसपुर क्षेत्र में हुई डकैती में गैंग के सदस्यों ने अपने आप को सीबीआई से बताया, जो गैंग के बदलाव को दर्शाता है। कुछ भी हो गैंग में आ रहे इस बदलाव से पुलिस को और परेशानी होने वाली है। एसपी देहात टीडी बेला ने बताया कि सामान्यत: सपेरा या फिर अन्य ट्राइबल जातियां वारदात के साथ खून खराबा करती हैं, लेकिन ज्यादा विरोध न होने के कारण उन्होंने डंडों और रॉड का इस्तेमाल नहीं किया।

15 हजार के नगद इनाम की घोषणा
कुल्हाल बैरियर पर बदमाश के पकड़े जाने पर एसएसपी डॉ. सदानंद दाते मौके पर पहुंचे। उन्होंने बदमाश से पूछताछ की। उनकी अगुवाई में पुलिस कर्मियों ने हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब, सूरजपुर, कुल्हाल चौकी के आसपास की बस्तियों और जंगल में कांबिंग की, लेकिन बदमाश हत्थे नहीं चढ़े। वहीं खुलासे में शामिल पुलिस टीम को पुलिस महानिदेशक ने 15 हजार के नगद इनाम की घोषणा की है। 

राज्यपाल ने किया सम्मानित
डकैती का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को राज्यपाल की ओर से पुलिस टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। राज्यपाल डॉ. केके पॉल से सम्मानित होने पर टीम में शामिल पुलिस कर्मी गदगद हैं। पुलिस टीम में एएसपी मंजू नाथ, कोतवाल विकासनगर संदीप नेगी, थानाध्यक्ष प्रेमनगर यशपाल सिंह, एसओजी प्रभारी मुकेश त्यागी, एसआई भुवनचंद, प्रमोद शाह, सुनील पंवार, शैलेंद्र नेगी, अशोक राठौर, धमेंद्र रौतेला, सिपाही आशीष, मनोज कपिल, राजवीर, धीरज, हेमराज, संतोष, ललित, अमित, गंभीर, नरेश पंत, संदीप कुमार, विनय सिंह शामिल रहे। एसपी देहात टीडी बेला ने बताया कि यह संभवत: राज्य के इतिहास में पहला मौका है जब पुलिस टीम राज्यपाल द्वारा सम्मानित हुई है।

घरवालों को पहचानते थे बदमाश
वारदात को अंजाम देने से पहले डकैतों ने घर की पूरी तरह से रेकी की हुई थी। उन्हें पता था कि घर में दो महिलाओं के साथ एक पुरुष भी रहता है। जब डकैत चंद्रकांता के जीजा आरपी सिंह के कमरे में घुसे तो उन्हें लगा कि वह पराक्रम सिंह हैं। यहीं वजह रही कि उन्होंने आरपी सिंह को चलने को कहा। जब वह बिना लड़खड़ाए हुए चले तो बदमाशों ने कहां यह वह (पराक्रम) नहीं है। पराक्रम के पैर में रॉड पड़ी हुई है। वह  लड़खड़ा कर चलते हैं।

बदमाशों ने पी कोल्डड्रिंक
डकैतों ने वारदात को अंजाम देने के बाद तसल्ली से बाहर आंगन में बैठकर कोल्डड्रिंक पी। बाहर खाली बोतल मिलीं। साथ ही बदमाशों ने फ्रिज में रखे बादाम भी खाएं। यहां उन्होंने लूटे गए एक मोबाइल का कवर भी फेंका।

मददगार हैं चंद्रकांता
चंद्रकांता की कोई औलाद नहीं है। उनके पति शक्तिचंद का चार साल पहले निधन हो गया था। वह एक प्राइवेट कंपनी में अधिकारी थे। चंद्रकांता के पास लक्ष्मीपुर-बालूवाला में पॉलीहाउस हैं। वह अब तक सीएचसी विकासनगर को एंबुलेंस और जनरेटर भेंट कर चुकी हैं। पति की बरसी पर भी उन्होंने जरूरतमंदों को व्हीलचेयर वितरित की थी।
 
राइट टाइम एक्शन ने डकैतों का बिगाड़ा खेल
राइट टाइम एक्शन नहीं होता तो पुलिस के लिए डकैतों को पकड़ना टेढ़ी खीर साबित होता। हाथों में डंडे, पंजाबी मिश्रित भाषा और आबादी से बाहर के आवास पर घटना से अधिकारियों का माथा ठनका।

बिना देर किए जिले भर में चेकिंग शुरू कर दी गई। प्रेमनगर क्षेत्र में पुलिस सक्रिय देखकर बदमाश उल्टे पैर हो लिए। कुल्हाल चेक पोस्ट पर पुलिस देखकर बदमाश दो कारों को छोड़कर भाग गए। पुलिसकर्मी थोड़ा देर से भांप पाए, अन्यथा पकड़े गए बदमाश के अलावा अन्य कई साथी गिरफ्त में होते।


लक्ष्मीपुर बालूवाला के जिस फार्म हाउस पर रविवार देर रात डकै ती की वारदात हुई, वह आबादी से बाहर है। घटना के समय घर के बाहर पांच-छह कारों के अलावा अंदर 32 लोग थे। बेखौफ बदमाशों ने सास-बहू समेत कई परिजनों से मारपीट कर लूटपाट की।

घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर खडे़ वाहनों तक पहुंचने में बदमाशों को काफी वक्त लग गया। तब तक पुलिस सड़कों पर उतर चुकी थी। बदमाशों का इरादा प्रेमनगर के रास्ते दून में प्रवेश करना था। झाझरा के पास पुलिस चेकिंग को देखकर बदमाशों ने अपनी दोनों कारों का मुंह मोड़ लिया। उनकी योजना पांवटा साहिब के रास्ते पंजाब के तरनतारण स्थित ठिकाने पर पहुंचने की थी। इनमें से कई बदमाश दून में जेल जा चुके है। इस गिरोह ने बसंत विहार और पटेलनगर क्षेत्र में डकैती की घटनाएं अंजाम दी थी।

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