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बोले ग्रामीण, पत्थर मार कर ही होगा युद्घ
देवीधुरा/ब्यूरो
Updated Mon, 19 Aug 2013 07:22 PM IST
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उत्तराखंड के बाराहीधाम में वर्षों से चली आ रहे बग्वाल (पत्थर मार युद्ध) के स्वरूप को बदलने के फैसले से चारों खाम, सात थोकों के प्रतिनिधि भड़क गए हैं। उन्होंने बग्वाल का स्वरूप बदलने के विरोध में रविवार को देवीधुरा में प्रदर्शन किया।
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हाईकोर्ट के अधिवक्ता चेतन भैया, त्रिभुवन चम्याल, दिनेश चम्याल, रमेश राणा, नरेंद्र राणा, राजेंद्र बिष्ट, गौरव सिंग्वाल, यूएस बिष्ट के नेतृत्व में यहां लोगों ने रविवार को जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी कर अपना विरोध जताया।
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...इस मेले में लोग एक दूसरे को मारते हैं पत्थर
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नहीं हुई मौत
विरोध करने वालों में गहड़वाल खाम के प्रमुख त्रिलोक सिंह बिष्ट के अलावा सभी खामों के युवा प्रतिनिधि शामिल थे।
उनका कहना था कि वे लोग बग्वाल के दिन मां वज्र बाराही को अपना खून देते आ रहे हैं, जिसमें न तो आज तक किसी व्यक्ति की मौत हुई है और न ही कोई विकलांग हुआ।
लोक परंपरा चलेगी
ऐसी स्थिति में बग्वाल के स्वरूप को बदलने का कोई तुक नहीं है। बग्वाली वीरों का कहना था कि वे हर हाल में रक्षाबंधन के दिन लोक परंपरा के अनुसार पूर्ण विधि विधान के साथ पत्थर मार युद्ध में भाग लेंगे।
इस मुद्दे को लेकर 19 अगस्त को दिन में एक बजे जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी की मौजूदगी में यहां सभी खाम प्रतिनिधियों की विशेष बैठक भी बुलाई गई है।
पत्थर की जगह रबर की गेंद
बैठक में पत्थरों की जगह रबर की गेंदों का इस्तेमाल करने के फैसले पर अंतिम मुहर लगनी है। लेकिन लोगों के गुस्से को देखते हुए बग्वाल के स्वरूप को बदलने को लेकर जिला प्रशासन पशोपेश में है।
क्यों हो रहा है विरोध
हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन इस बार पत्थरों की जगह रबर की गेंदों से बग्वाल (पत्थर मार युद्ध ) खेलने पर जोर दे रहा है। हालांकि इस संबंध में कल सोमवार को होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाना है। लेकिन चारों खामों और थोकों के लोग इस परंपरा को बदलने का विरोध कर रहे हैं।
प्रस्ताव लोगों को नामंजूर
बाराही मंदिर कमेटी, जिला प्रशासन द्वारा फल-फूलों से बग्वाल खेलने और बग्वाल के रूप में बहने वाला रक्त आपदा पीड़ितों को देने पर लोग सहमत नहीं हैं।
उनका कहना है कि वे आपदा पीड़ितों के लिए रक्तदान का विशेष शिविर लगाकर उनकी मदद करना चाहेंगे, लेकिन बग्वाल के स्वरूप को बदलने का कोई भी प्रस्ताव मान्य नहीं होगा।