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जनपद में अधर में लटकी करोड़ों की 15 से अधिक योजनाएं

Sun, 07 Apr 2019 09:46 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 07 Apr 2019 09:46 PM IST
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जनपद में अधर में लटकी करोड़ों की 15 से अधिक योजनाएं
रुद्रप्रयाग। सरकारी सिस्टम की उदासीनता के कारण आपदा प्रभावित जनपद में वर्षों पूर्व स्वीकृत करोड़ों की लागत की पेयजल व पंपिंग योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। नगर से लेकर गांवों तक लोग पानी के लिए तरस रहे हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
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गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी का संकट भी पैर पसारने लगा है। जलसंस्थान की योजनाएं जवाब देने लगी हैं और हैंडपंप शोपीस साबित हो रही है। लोग, दूरस्थ स्रोतों से पानी जुटाने को मजबूर हैं, लेकिन विभाग बजट का रोना रो रहा है। दूसरी तरफ बजट व इंजीनियर्स की कमी के कारण उत्तराखंड जलनिगम की 15 योजनाएं वर्षों से लटकी पड़ी हैं। करोड़ों के लागत की आधी-अधूरी बनी इन योजनाओं के पूरा नहीं होने से जिले की करीब 45 फीसदी आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। नगरासू व अगस्त्यमुनि पंपिंग योजना का निर्माण शुरू नहीं होने से लोग दूरस्थ स्रोतों पर घंटे खड़े होकर पानी जुटा रहे हैं। वहीं गुप्तकाशी योजना के लिए अभी सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। जबकि रुद्रप्रयाग की 12 हजार से अधिक आबादी के लिए रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र के लिए पंपिंग योजना के लिए 2014 में सर्वेक्षण कर 191.08 लाख का इस्टीमेट भी तैयार किया जा चुका है, लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाई है। उधर, ऊखीमठ और लश्तर पेयजल योजनाएं भी अधर में फंसी हुई है। ग्राम पंचायत डडोली की ग्राम प्रधान हंसलता देवी, ग्राम पंचायत बोरा की प्रधान शकुंतला देवी, सतेरखाला निवासी गंभीर सिंह, ऊखीमठ के पूर्व प्रमुख एलपी भट्ट, क्वीलाखाल के गजेंद्र मैठाणी, तिलवाड़ा व्यापार संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सकलानी आदि का कहना है कि समस्या के बारे में जलसंस्थान को कई बार अवगत कराया जा चुका है। लेकिन स्थिति जस की तस है। लोग पानी के लिए रतजगा को मजबूर हो रहे हैं। ईई जलनिगम रुद्रप्रयाग नवल कुमार यादव का कहना है कि बजट और सक्षम अधिकारियों की कमी से महत्वपूर्ण योजनाओं का निर्माण व मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहा है। डिवीजन में मात्र तीन इंजीनियर्स हैं। जिस कारण हमारी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के निर्माण के साथ प्रस्ताव नहीं बन रहे हैं।
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