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हाईवे पर कार्य कर रहे मजदूरों को बांटे हेलमेट
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रुद्रप्रयाग। ऑलवेदर रोड निर्माण में रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर आठ मजदूरों की मौत के बाद सुरक्षित 12 मजदूर अपने घर बारामूला लौट गए हैं। वहीं प्रभावित परिवारों को त्वरित मदद के तौर पर जल्द 1.5-1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। दूसरी ओर सुरक्षा के लिहाज से रविवार को कार्यदायी संस्था ने मजदूरों को हेलमेट बांटे।
76 किमी लंबे रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर बांसवाड़ा में चौड़ीकरण व पुश्ता निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। यहां कार्य कर रहे मजदूरों को कार्यदायी संस्था आरजीबी द्वारा हेलमेट दिए गए। पूरे दिन कार्यस्थल पर मजदूरों के सिर में हेलमेट नजर आए। स्थानीय लोगों को कहना है कि अगर, यही प्रयास बीते दो दिन पूर्व किया जाता तो, हादसे में 8 मजदूरों की जान नहीं जाती। इधर, एनएच निर्माण खंड लोनिवि के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान ही कार्यदायी संस्थाओं को मजदूरों की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि बीते शुक्रवार को हुए हादसे के बाद भी पुन: सभी कंपनियों से मजदूरों की संख्या और सुरक्षा इंतजाम के बारे में जानकारी मांगी गई है। दूसरी ओर रविवार को बांसवाड़ा सहित हाईवे व अन्य स्थानों पर कार्य कर रहे मजदूरों हेलमेट दिए गए। बांसवाड़ा में दो दिन पूर्व घटित हादसे में अपने 8 साथियों को गंवाने के बाद सुरक्षित 12 मजदूर भी अपने घर बारामूला लौट गए हैं। कार्यदायी संस्था के लाइजिंग आफिसर विनोद पुंडीर ने बताया कि बीते शुक्रवार को हुए हादसे में मारे गए मजदूरों के शवों के साथ 8 मजदूरों को भेज दिया गया था। जबकि शेष 4 मजदूर शनिवार रात्रि को अपने घरों को निकल गए थे। वहीं हादसे में मारे गए 7 मजदूरों के शव उनके गांव पहुंच गए हैं। जबकि आठवां शव जम्मू एयरपोर्ट पहुंच चुके है, जिसे सोमवार को गांव पहुंचाया जाएगा। कार्यदायी संस्था के लाइजिंग आफिसर पुंडीर ने बताया कि प्रभावित परिवारों को त्वरित मदद के तौर पर जल्द 1.5-1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे।
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76 किमी लंबे रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर बांसवाड़ा में चौड़ीकरण व पुश्ता निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। यहां कार्य कर रहे मजदूरों को कार्यदायी संस्था आरजीबी द्वारा हेलमेट दिए गए। पूरे दिन कार्यस्थल पर मजदूरों के सिर में हेलमेट नजर आए। स्थानीय लोगों को कहना है कि अगर, यही प्रयास बीते दो दिन पूर्व किया जाता तो, हादसे में 8 मजदूरों की जान नहीं जाती। इधर, एनएच निर्माण खंड लोनिवि के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान ही कार्यदायी संस्थाओं को मजदूरों की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि बीते शुक्रवार को हुए हादसे के बाद भी पुन: सभी कंपनियों से मजदूरों की संख्या और सुरक्षा इंतजाम के बारे में जानकारी मांगी गई है। दूसरी ओर रविवार को बांसवाड़ा सहित हाईवे व अन्य स्थानों पर कार्य कर रहे मजदूरों हेलमेट दिए गए। बांसवाड़ा में दो दिन पूर्व घटित हादसे में अपने 8 साथियों को गंवाने के बाद सुरक्षित 12 मजदूर भी अपने घर बारामूला लौट गए हैं। कार्यदायी संस्था के लाइजिंग आफिसर विनोद पुंडीर ने बताया कि बीते शुक्रवार को हुए हादसे में मारे गए मजदूरों के शवों के साथ 8 मजदूरों को भेज दिया गया था। जबकि शेष 4 मजदूर शनिवार रात्रि को अपने घरों को निकल गए थे। वहीं हादसे में मारे गए 7 मजदूरों के शव उनके गांव पहुंच गए हैं। जबकि आठवां शव जम्मू एयरपोर्ट पहुंच चुके है, जिसे सोमवार को गांव पहुंचाया जाएगा। कार्यदायी संस्था के लाइजिंग आफिसर पुंडीर ने बताया कि प्रभावित परिवारों को त्वरित मदद के तौर पर जल्द 1.5-1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे।
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