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बंगाली क्यों पहुचंते हैं 19 किमी की चढाई चढ़ रुद्रनाथ?
अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Fri, 18 Oct 2013 09:54 PM IST
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पंच केदारों में से चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ में अगाथ आस्था रखने वाले तीर्थयात्री 19 किमी की दुरूह चढ़ाई चढ़कर भोलेनाथ के दर्शन करने यहां पहुंचते हैं।
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रुद्रनाथ में सर्वाधिक बंगाल के तीर्थयात्री पहुंचते हैं। बताया जाता है कि वर्षों पूर्व बंगाल से आए एक तीर्थयात्री ने रुद्रनाथ सहित पंच केदारों पर पुस्तक का प्रकाशन किया गया था।
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रुद्रनाथ मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे
जिसे पढ़ने के बाद बंगाल के तीर्थयात्री पंचकेदारों के दर्शनों को प्रतिवर्ष राज्य में आते हैं। इस वर्ष 236 बंगाली और 840 अन्य तीर्थयात्री रुद्रनाथ मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे।
मखमली बुग्यालों के मध्य से रुद्रनाथ मंदिर के लिए रास्ता गुजरता है। पूरे मार्ग से हिमालय की बर्फ से लकदक चोटियों के दर्शन होते हैं। तीर्थयात्री यहां के सौंदर्य को देख अपनी थकान भूल जाते हैं।
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सौंदर्य कभी भुलाया नहीं जा सकता
रुद्रनाथ के कपाट बंद होने के मौके पर बंगाल से अपने परिवार के साथ पहुंचे प्रसून शाह का कहना है कि मैं पिछले चार वर्षों से धाम की यात्रा कर रहा हूं। इस बार पूरे परिवार को साथ लेकर आया।
प्रसून की पत्नी सुचेता रुद्रनाथ के सौंदर्य को देख अभीभूत हो उठी। वह कहती है कि यहां का सौंदर्य कभी भुलाया नहीं जा सकता। देहरादून से धाम में पहुंचे विनीत का कहना है कि यदि धाम का विकास ईको टूरिज्म की तर्ज पर किया जाए तो धाम में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।
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कहां है रुद्रनाथ
जनपद चमोली के मुख्यालय गोपेश्वर से गोपेश्वर-मंडल मोटर मार्ग से तीन किमी तक वाहन और यहां से 19 किमी की पैदल चढ़ाई पार कर रुद्रनाथ पहुंचा जा सकता है। यहां प्रकृति की अनुपम छटा पर्यटकों बरबस अपनी ओर आकृष्ट करती है। पैदल रास्ते में ल्वींटी, पनार, पंचगंगा, देवदर्शनी बुग्याल और सरस्वती कुंड दर्शनीय स्थल है।
शीतकाल के लिए बंद हुए भगवान रुद्रनाथ के कपाट
पंचकेदारों में शुमार भगवान रुद्रनाथ के कपाट बृहस्पतिवार को सुबह सात बजे विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। अब छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में होगी।
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समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई पर खूबसूरत बुग्यालों के बीच भगवान रुद्रनाथ का मंदिर है। यहां शिव के मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। बृहस्पतिवार को तड़के से ही रुद्रनाथ मंदिर में विशेष पूजा संपन्न हुई।
कपाट बंद होने के बाद रुद्रनाथ की उत्सव डोली और वजीर की मूर्ति पनार बुग्याल होते हुए शाम पांच बजे गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के दर्शन किए।