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गलौर में क्या गुल खिलाएगी भाजपा की ‘इंजीनियरी’
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Tue, 17 Jan 2017 10:29 PM IST
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मंगलौर सीट जीतने के लिए भाजपा की ओर से हर चुनाव में सोशल ‘इंजीनियरी’ की जाती है। इस बार फिर से पार्टी ने इस ‘इंजीनियरी’ को दोबारा जाट बिरादरी पर अपनाई है। यहां से पहले चुनाव में जाट बिरादरी से करारी हार और 15 साल बाद फिर से जाट समाज के प्रत्याशी पर दांव खेला है।
हरिद्वार जिले में भगवानपुर के बाद मंगलौर सीट भी भाजपा के लिए कमजोर सीटों में मानी जाती है। मंगलौर के तीन विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां तीनों बार भाजपा ने सोशल ‘इंजीनियरी’ करते हुए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा लेकिन, तीनों चुनाव में पार्टी की सोशल इंजीनियरी फेल होने से प्रत्याशी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा हैं। इस सीट पर भाजपा के लिए सबसे अधिक और सबसे मजबूत वोट जाट समाज के माने जाते हैं जो करीब 14500 हैं। इसके अलावा दूसरे नंबर पर गुर्जर समाज के सात हजार वोट आते हैं। दोनों विरादरी के वोट मिलाकर 21,500 बैठते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए पृथक राज्य के बाद वर्ष 2002 के चुनाव में पार्टी की ओर से जाट समाज के मास्टर नागेंद्र को टिकट दिया था लेकिन, यह महाशय अपनी जमानत भी बचाने में नाकाम साबित हो गए थे। वर्ष 2007 में भाजपा ने दलित समाज के हरपाल हवलदार पर चुनावी कार्ड खेला लेकिन, इनकी भी जमानत जब्त हो गई थी। वर्ष 2012 में भाजपा ने मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर मुस्लिम नेता कलीम अंसारी को चुनावी मैदान में उतारा लेकिन, यह चुनावी रणनीति भी भाजपा के काम नहीं आने पर कलीम अपनी जमानत नहीं बचा पाए। इस बार फिर से भाजपा ने मंगलौर सीट को अपने कब्जे में लेने के लिए सोशल ‘इंजीनियरी’ की दोबारा से शुरू करते हुए जाट समाज के चेहरे ऋषिपाल बालियान को अपना प्रत्याशी बनाया है लेकिन, देखना यह है कि इस बार फिर भाजपा की मंगलौर में की गई सोशल ‘इंजीनियरी’ क्या गुल खिलाती है।
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हरिद्वार जिले में भगवानपुर के बाद मंगलौर सीट भी भाजपा के लिए कमजोर सीटों में मानी जाती है। मंगलौर के तीन विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां तीनों बार भाजपा ने सोशल ‘इंजीनियरी’ करते हुए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा लेकिन, तीनों चुनाव में पार्टी की सोशल इंजीनियरी फेल होने से प्रत्याशी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा हैं। इस सीट पर भाजपा के लिए सबसे अधिक और सबसे मजबूत वोट जाट समाज के माने जाते हैं जो करीब 14500 हैं। इसके अलावा दूसरे नंबर पर गुर्जर समाज के सात हजार वोट आते हैं। दोनों विरादरी के वोट मिलाकर 21,500 बैठते हैं।
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इसी को ध्यान में रखते हुए पृथक राज्य के बाद वर्ष 2002 के चुनाव में पार्टी की ओर से जाट समाज के मास्टर नागेंद्र को टिकट दिया था लेकिन, यह महाशय अपनी जमानत भी बचाने में नाकाम साबित हो गए थे। वर्ष 2007 में भाजपा ने दलित समाज के हरपाल हवलदार पर चुनावी कार्ड खेला लेकिन, इनकी भी जमानत जब्त हो गई थी। वर्ष 2012 में भाजपा ने मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर मुस्लिम नेता कलीम अंसारी को चुनावी मैदान में उतारा लेकिन, यह चुनावी रणनीति भी भाजपा के काम नहीं आने पर कलीम अपनी जमानत नहीं बचा पाए। इस बार फिर से भाजपा ने मंगलौर सीट को अपने कब्जे में लेने के लिए सोशल ‘इंजीनियरी’ की दोबारा से शुरू करते हुए जाट समाज के चेहरे ऋषिपाल बालियान को अपना प्रत्याशी बनाया है लेकिन, देखना यह है कि इस बार फिर भाजपा की मंगलौर में की गई सोशल ‘इंजीनियरी’ क्या गुल खिलाती है।
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