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यूक्रेन युद्ध की जिले के गेहूं क्रय केंद्रों पर आई आंच
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यूक्रेन में चल रहे युद्ध की आंच अब हरिद्वार के गेहूं क्रय केंद्रों तक पहुंच गई है। यूक्रेन युद्ध के चलते इस बार गेहूं के दामों में तेजी आई है। ऐसे में किसान केंद्रों पर गेहूं पहुंचाने के बजाय आढ़तियों को बेचना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को दोहरा फायदा हो रहा है। एक तो किसानों को केंद्रों के मुकाबले बाहर सौ से डेढ़ सौ रुपये अधिक मिल रहे हैं, वहीं उन्हें पूरा भुगतान नकद मिल रहा है। ऐसे में क्रय केंद्रों पर बैठे केंद्र प्रभारी किसानों की बांट जोह रहे हैं।
जिले में इस बार करीब 26 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार हुई है। मौसम अनुकूल होने के चलते इस बार पिछले साल के मुकाबले गेहूं की पैदावार भी अच्छी हुई है। इसे देखते हुए सरकार ने किसानों का गेहूं खरीदने के लिए 35 सरकारी क्रय केंद्र खोले हैं। इसमें खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग (विपणन शाखा), उत्तराखंड राज्य सहकारी विपणन संघ (यूसीएफ), भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ), उत्तराखंड और उत्तराखंड प्रादेशिक कॉपरेटिव यूनियन (पीसीयू) को गेहूं खरीद की जिम्मेदारी दी गई है।
सभी केंद्रों के प्रभारियों को एक अप्रैल को नियुक्त कर दिया गया था। केंद्रों पर इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति कुंतल की दर से तय किया गया है। छह अप्रैल से गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई थी। वर्तमान में क्षेत्र से 60-70 फीसदी गेहूं की कटाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद जिले के एक भी केंद्र पर गेहूं का एक दाना भी नहीं पहुंचा है। केंद्र प्रभारी बैठे किसानों का इंतजार कर रहे हैं।
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इसके पीछे यूक्रेन युद्ध को कारण बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यूक्रेन में बड़ी मात्रा में गेहूं का उत्पादन होता है। युद्ध के चलते वहां से गेहूं का निर्यात नहीं हो रहा है। ऐेसे में भारत से पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा गेहूं निर्यात होने की संभावना है। इसका असर बाजार में दिखने लगा है। जिले में गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य से 75 से 120 रुपये ज्यादा में खरीदा जा रहा है। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 तय किया हुआ है, वहीं बाजार में गेहूं 2100-2200 रुपये प्रति कुंतल गेहूं खरीदा जा रहा है। ऐसे में किसान केंद्रों पर गेहूं बेचने के बजाय आढ़तियों को बेच रहे हैं। इससे जहां किसानों को ज्यादा मूल्य मिल रहा है, वहीं उन्हें पूरा पैसा नकद भी मिल रहा है।
इस बार हरिद्वार जिले में 35 गेहूं क्रय केंद्र खोले गए हैं। यहां गेहूं की खरीदारी शुरू हो गई है, लेकिन अभी केंद्रों पर गेहूं नहीं पहुंचा है। संभवत अगले हफ्ते से गेहूं आना शुरू हो जाएगा। -अंजू जेखरे, डिप्टी आरएमओ, विपणन शाखा।
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जिले में इस बार करीब 26 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार हुई है। मौसम अनुकूल होने के चलते इस बार पिछले साल के मुकाबले गेहूं की पैदावार भी अच्छी हुई है। इसे देखते हुए सरकार ने किसानों का गेहूं खरीदने के लिए 35 सरकारी क्रय केंद्र खोले हैं। इसमें खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग (विपणन शाखा), उत्तराखंड राज्य सहकारी विपणन संघ (यूसीएफ), भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ), उत्तराखंड और उत्तराखंड प्रादेशिक कॉपरेटिव यूनियन (पीसीयू) को गेहूं खरीद की जिम्मेदारी दी गई है।
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सभी केंद्रों के प्रभारियों को एक अप्रैल को नियुक्त कर दिया गया था। केंद्रों पर इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति कुंतल की दर से तय किया गया है। छह अप्रैल से गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई थी। वर्तमान में क्षेत्र से 60-70 फीसदी गेहूं की कटाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद जिले के एक भी केंद्र पर गेहूं का एक दाना भी नहीं पहुंचा है। केंद्र प्रभारी बैठे किसानों का इंतजार कर रहे हैं।
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इसके पीछे यूक्रेन युद्ध को कारण बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यूक्रेन में बड़ी मात्रा में गेहूं का उत्पादन होता है। युद्ध के चलते वहां से गेहूं का निर्यात नहीं हो रहा है। ऐेसे में भारत से पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा गेहूं निर्यात होने की संभावना है। इसका असर बाजार में दिखने लगा है। जिले में गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य से 75 से 120 रुपये ज्यादा में खरीदा जा रहा है। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 तय किया हुआ है, वहीं बाजार में गेहूं 2100-2200 रुपये प्रति कुंतल गेहूं खरीदा जा रहा है। ऐसे में किसान केंद्रों पर गेहूं बेचने के बजाय आढ़तियों को बेच रहे हैं। इससे जहां किसानों को ज्यादा मूल्य मिल रहा है, वहीं उन्हें पूरा पैसा नकद भी मिल रहा है।
इस बार हरिद्वार जिले में 35 गेहूं क्रय केंद्र खोले गए हैं। यहां गेहूं की खरीदारी शुरू हो गई है, लेकिन अभी केंद्रों पर गेहूं नहीं पहुंचा है। संभवत अगले हफ्ते से गेहूं आना शुरू हो जाएगा। -अंजू जेखरे, डिप्टी आरएमओ, विपणन शाखा।