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सीएम घोषणा के तहत बनाई जा रही सड़क विवादों में छाई

Fri, 29 Oct 2021 08:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 08:27 PM IST
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In the road disputes being made under the announcement of the Chief Minister
रुड़की में प्रेम मंदिर रोड पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य को रुकवाते ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंसुल सिं? - फोटो : ROORKEE
मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत नगर निगम की ओर से हॉट मिक्स प्लांट से बनाई जा रही सड़क शुक्रवार को विवादों में आ गई। शासन में शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को कार्रवाई के निर्देश दिए। मौके पर पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने निर्माण काम को रुकवा दिया। शिकायत करने वालों का कहना है कि चकाचक सड़क को करोड़ों खर्च कर दोबारा बनाया जा रहा है जबकि शहर में कई अन्य सड़कें पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। वहां ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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नगर निगम चौराहे से प्रेम मंदिर रोड की सड़क का निर्माण कार्य बृहस्पतिवार रात को शुरू किया गया था। इसी बीच सोशल मीडिया पर यह सड़क छा गई। लोगों ने सड़क को अच्छी खासी बताते हुए दोबारा निर्माण को न केवल धन की बर्बादी बताया बल्कि जहां सड़कों में ज्यादा गड्ढेे हैं, उन जगहों पर नई सड़कों के निर्माण की नसीहत दी। शुक्रवार को किसान-मजदूर संगठन सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने शहरी विकास सचिव को फोन पर कुछ साल पहले बनी सड़क को दोबारा बनाने की शिकायत की।
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यह भी कहा कि जहां ज्यादा सड़कें टूटी हैं, वहां पहले निर्माण होना चाहिए। इसके बाद जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे के निर्देश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह शुक्रवार दोपहर मौके पर पहुंचे और सड़क निर्माण का काम रुकवा दिया। उन्होंने बताया कि जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार इससे पहले सड़क का निर्माण वर्ष 2015 में हुआ था। नियमानुसार शहर के भीतर की सड़कें पांच साल बाद दोबारा बनाई जाती हैं। यह बात सही है कि सड़क पूरी तरह नहीं टूटी है। उन्होंने बताया कि नगर निगम से ली गई जानकारी के अनुसार इस सड़क को मुख्यमंत्री की वर्ष 2020 में की गई घोषणा के तहत बनाया जा रहा है। फिर भी जांच पूरी होने तक काम रुकवा दिया गया है।
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2019 में सड़क निर्माण के भ्रम से आया उबाल
वैसे तो बृहस्पतिवार रात को सड़क के निर्माण के दौरान ही यह मामला सोशल मीडिया पर उठने लगा था, जिसमें रातोंरात अच्छी-खासी सड़क को दोबारा बनाने की बात कहते हुए बहस छिड़ी थी, लेकिन शुक्रवार को शिकायतकर्ता राकेश अग्रवाल ने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी कि सड़क का निर्माण 2019 में कराया गया था। अब दो साल बाद ही फिर से निर्माण किया जा रहा है। इसके चलते अधिकारी भी हरकत में आए और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह ने बताया कि लोगों को कहीं से गलत जानकारी मिली है। इससे पहले सड़क का निर्माण वर्ष 2015 में ही हुआ था।
सड़क की राजनीति के पीछे छिपे चेहरों पर भी बहस
सड़क निर्माण को लेकर एकाएक नगर निगम राजनीति में भी उबाल आ गया है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस में कोई जनप्रतिनिधियों को कोस रहा था तो कोई अधिकारियों को। इसके साथ ही राजनीतिक जानकारों में इस बात की चर्चा भी तेज हो गई कि सड़क का मुद्दा उछालने वालों में राजनीतिक चेहरा कौन है। इसे लेकर दिनभर कयासबाजी लगाई जाती रही।

जगह-जगह टूटी सड़कों का कौन जवाबदेह
शहर में जगह-जगह सड़कें टूटी पड़ी हैं। इनके गड्ढे तक नहीं भरे जा रहे हैं। लोग नगर निगम के अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि दो माह पहले ही टूटी सड़कों के टेंडर जारी करने के लिए फाइलें तैयार कर ली गई हैं। अब नगर निगम की टेंडर समिति को अनुमति जारी करनी है। इसके बाद सड़कों के निर्माण का काम शुरू हो सकेगा।
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