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मांगेराम को न आती कॉल तो दफन हो जाते सारे राज
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अरबों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सारे राज एक कॉल ने खोल दिए। अगर सरगना के पास कॉल न आती तो गिरोह के सारे राज दफन ही रह जाते और वे न जाने कितने खातों की जानकारी लेकर उसमें सेंधमारी करते। पुलिस अब सरगना के पास कॉल करने वाले इंश्योरेंस कर्मचारी की तलाश कर रही है। साथ ही जानकारी जुटा रही है कि गिरोह ने कितने लोगों के खातों की जानकारी जुटाई है।
पुलिस ने सोमवार को अरबों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सचिन निवासी मोहल्ला अफगानन पूर्वी सरसावा, सहारनपुर, धूम सिंह निवासी नगला खारी कुतुबशेर सहारनपुर, अजय कुमार निवासी गली नंबर-2 लक्सर, हरिद्वार, मांगेराम निवासी तेलीपुरा, थाना सरसावा जिला सहारनपुर और लोकेंद्र निवासी ऊनपुरानी बाईपास, थाना झिंझाना जिला शामली को गिरफ्तार किया था। उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल, डायरी, ब्लैंक चेक, लेनदेन संबंधित एग्रीमेंट बरामद किए थे। पता चला था कि बैंक कर्मचारी रामस्वरूप कंडारा निवासी बीकानेर, राजस्थान से वह लोगों के बैंक खाते की जानकारी लेकर बंगलूूरू में बैठे सलीम पाशा को भेजते थे और वह खातों में सेंधमारी करता था। इस बीच रुड़की की एक इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी की भी जानकारी मिली थी, लेकिन इतने बड़े गिरोह का खुलासा होने के पीछे महज एक कॉल है। दरअसल, पुलिस ने जब पांचों की गिरफ्तारी की तो उनके मोबाइल और अन्य सामान भी जब्त कर लिए। इसी बीच मांगेराम के मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आई तो बात सुनकर पुलिस के कान खड़े हो गए।
कॉल करने वाले ने सीधे कहा कि बैंक खातों से संबंधित क्या जानकारी है और अब तक कितने बैंक खातों की जानकारी जुटाई गई है। अगर एक करोड़ रुपये से अधिक वाले बैंक खाते के संबंध में और कोई जानकारी चाहिए तो वह दे सकता है। प्रति खाते की जानकारी का रेट क्या होगा। यह सुन पुलिस ने मांगेराम से गहनता से पूछताछ की तो गिरोह के दिल्ली, अलवर और बंगलूरू समेत अन्य राज्यों से साइबर ठगी के कनेक्शन मिले। कोतवाली प्रभारी अमरचंद शर्मा ने बताया कि मामले में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। मामला बड़ा है, इसलिए गिरोह के बारे में पूरी जानकारी जुटाने में थोड़ा समय लगेगा।
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मांगेराम पर दर्ज हैं दो मुकदमे
पुलिस ने सरगना मांगेराम की कुंडली खंगाली तो पता चला कि वह दो बार साइबर ठगी के मामले में वेस्ट यूपी में जेल जा चुका है। उसने पहले भी गिरोह के साथ मिलकर वेस्ट यूपी के लोगों के बैंक खातों की जानकारी जुटाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी है। पुलिस को पता चला है कि वह बैंक कर्मचारियों से सेटिंग करने में माहिर है। उसके संपर्क में वेस्ट यूपी के कई बैंक कर्मचारी हैं।
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पुलिस ने सोमवार को अरबों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सचिन निवासी मोहल्ला अफगानन पूर्वी सरसावा, सहारनपुर, धूम सिंह निवासी नगला खारी कुतुबशेर सहारनपुर, अजय कुमार निवासी गली नंबर-2 लक्सर, हरिद्वार, मांगेराम निवासी तेलीपुरा, थाना सरसावा जिला सहारनपुर और लोकेंद्र निवासी ऊनपुरानी बाईपास, थाना झिंझाना जिला शामली को गिरफ्तार किया था। उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल, डायरी, ब्लैंक चेक, लेनदेन संबंधित एग्रीमेंट बरामद किए थे। पता चला था कि बैंक कर्मचारी रामस्वरूप कंडारा निवासी बीकानेर, राजस्थान से वह लोगों के बैंक खाते की जानकारी लेकर बंगलूूरू में बैठे सलीम पाशा को भेजते थे और वह खातों में सेंधमारी करता था। इस बीच रुड़की की एक इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी की भी जानकारी मिली थी, लेकिन इतने बड़े गिरोह का खुलासा होने के पीछे महज एक कॉल है। दरअसल, पुलिस ने जब पांचों की गिरफ्तारी की तो उनके मोबाइल और अन्य सामान भी जब्त कर लिए। इसी बीच मांगेराम के मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आई तो बात सुनकर पुलिस के कान खड़े हो गए।
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कॉल करने वाले ने सीधे कहा कि बैंक खातों से संबंधित क्या जानकारी है और अब तक कितने बैंक खातों की जानकारी जुटाई गई है। अगर एक करोड़ रुपये से अधिक वाले बैंक खाते के संबंध में और कोई जानकारी चाहिए तो वह दे सकता है। प्रति खाते की जानकारी का रेट क्या होगा। यह सुन पुलिस ने मांगेराम से गहनता से पूछताछ की तो गिरोह के दिल्ली, अलवर और बंगलूरू समेत अन्य राज्यों से साइबर ठगी के कनेक्शन मिले। कोतवाली प्रभारी अमरचंद शर्मा ने बताया कि मामले में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। मामला बड़ा है, इसलिए गिरोह के बारे में पूरी जानकारी जुटाने में थोड़ा समय लगेगा।
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मांगेराम पर दर्ज हैं दो मुकदमे
पुलिस ने सरगना मांगेराम की कुंडली खंगाली तो पता चला कि वह दो बार साइबर ठगी के मामले में वेस्ट यूपी में जेल जा चुका है। उसने पहले भी गिरोह के साथ मिलकर वेस्ट यूपी के लोगों के बैंक खातों की जानकारी जुटाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी है। पुलिस को पता चला है कि वह बैंक कर्मचारियों से सेटिंग करने में माहिर है। उसके संपर्क में वेस्ट यूपी के कई बैंक कर्मचारी हैं।