उत्तराखंड पुलिस: ग्रेड पे नहीं अब मिलेंगे दो लाख एकमुश्त, सिपाहियों में नाराजगी, सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस्तीफे
उत्तराखंड पुलिस में सबसे पहले वर्ष 2001 में भर्ती हुई थी। इस बैच के सिपाहियों को 20 साल की सेवा के बाद 4600 ग्रेड पे दिए जाने की बात कही गई थी। वर्ष 2021 में उन्हें बीस साल का समय हुआ तो सिपाहियों ने इसकी मांग शुरू की।
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उत्तराखंड पुलिस के सिपाहियों के पहले बैच को 4600 ग्रेड पे नहीं मिलेगा। इसके स्थान पर अब उन्हें दो लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे। इस संबंध में गृह विभाग ने मुख्यमंत्री की घोषणा में आंशिक परिवर्तन करते हुए शुक्रवार को आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद पुलिस परिजनों में नाराजगी बढ़ गई है। पुलिस विभाग में बगावत के सुर उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर सिपाहियों के इस्तीफे भी वायरल हो रहे हैं। हालांकि मामले में पुलिस का कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।
उत्तराखंड पुलिस में सबसे पहले वर्ष 2001 में भर्ती हुई थी। इस बैच के सिपाहियों को 20 साल की सेवा के बाद 4600 ग्रेड पे दिए जाने की बात कही गई थी। वर्ष 2021 में उन्हें बीस साल का समय हुआ तो सिपाहियों ने इसकी मांग शुरू की। सोशल मीडिया पर आंदोलन शुरू हुआ और फिर उनके परिजनों ने धरातल पर भी इस आंदोलन को उतार दिया। कई चरणों में चले आंदोलन के बाद अक्तूबर में शासन के आश्वासन के बाद डीजीपी ने आश्वासन दिया था। हुआ भी कुछ ऐसे ही कि गत 21 अक्तूबर को पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन सिपाहियों को सितंबर 2021 से 4600 ग्रेड पे का लाभ देने की घोषणा कर दी।
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इस घोषणा का शासनादेश दो माह बाद भी जारी नहीं किया गया। इस पर सिपाहियों के परिजनों ने आंदोलन दोबारा शुरू कर दिया। पिछले दिनों सीएम आवास को घेरने का प्रयास किया। अगले दिन जब परिजन सचिवालय घेरने पहुंचे तब भी पुलिस ने वापस कर दिया। गत 27 दिसंबर को डीजीपी ने शासन की ओर से फिर उन्हें आश्वासन दिया कि 31 को कैबिनेट में इस संबंध में फैसला हो जाएगा। मगर, ऐसा नहीं हुआ और इस मामले में गेंद मुख्यमंत्री के पाले में डाल दी गई। चूंकि, सिपाहियों के परिजन लगातार आंदोलन कर रहे थे। तो अब गृह विभाग से घोषणा में आंशिक बदलाव करते हुए सात जनवरी को दो लाख रुपये एकमुश्त देने का आदेश जारी किया गया है। यानि साफ है कि अब प्रथम बैच के इन सिपाहियों को सरकार 4600 ग्रेड पे देने के मूड में नहीं है।
परिजन बोले, सैनिक पुत्र ने सिपाहियों को किया गुमराह
दो लाख रुपये एकमुश्त दिए जाने संबंधी आदेश को सिपाहियों के परिजनों ने लॉलीपॉप बताया है। परिजनों का कहना है कि मुख्यमंत्री खुद को सैनिक पुत्र कहते हैं। इस मामले में उन्होंने सैनिकों (सिपाहियों) का अपमान किया है। परिजनों का कहना है कि सिपाहियों इस मामले में सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा की है। सूत्रों के मुताबिक कई सिपाहियों ने इस्तीफा दे भी दिया है। हालांकि, अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
आदेश के वायरल होते हुए सिपाहियों के परिवार की महिलाएं प्रेस क्लब पहुंची थीं। उन्होंने यहां पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके परिवार इस लॉलीपॉप को लेने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री ने ग्रेड पे की घोषणा 21 अक्तूबर को पुलिस स्मृति दिवस को की थी। पुलिस परिवारों की वाहवाही भी मुख्यमंत्री ने लूटी थी। उनकी इस घोषणा पर पुलिस परिजनों ने उन्हें सम्मानित भी किया था। लेकिन, अब जो आदेश जारी हुआ है उससे पुलिस परिवार आहत हुआ है। सैनिक पुत्र होते हुए उन्होंने प्रदेश के सैनिकों का अपमान किया है। इस मामले में महिलाओं का कहना है कि 2001 में भर्ती सिपाहियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की तैयारी कर ली है।
बता दें कि 2001 में सिपाहियों की पहली भर्ती थी। उस साल करीब 1500 सिपाही भर्ती हुए थे। इनमें से कुछ प्रमोशन पाकर हेड कांस्टेबल बन गए हैं। कुछ रैंकर्स परीक्षा पास कर दरोगा बन चुके हैं। वर्तमान इन सिपाहियों की संख्या की बात करें तो यह 790 हैं। प्रदेश में कई जगह सिपाहियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग करते हुए इस्तीफा दे भी दिया है। ऐसा पुलिस के परिजनों का कहना है। इस बारे में अभी अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की है।
17 से 20 ने दिया है इस्तीफा : सूत्र
इस आदेश के बाद सिपाहियों ने विरोध दर्ज कराने शुरू कर दिए हैं। इसे अनुशासित बल में सीधे तौर पर बगावत की शुरुआत माना जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि पूरे प्रदेश में शनिवार को ही 17 से 20 सिपाहियों ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, अभी कहीं इन इस्तीफों को स्वीकार नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो अभी मान मनौव्वल का दौर चल रहा है।