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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Roorkee News ›   roorkee bomb blast : investigation after a year zero

रुड़की बम धमाका ः एक साल बाद भी जांच सिफर

Thu, 03 Dec 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मेहताब आलम
ब्यूरो, अमर उजाला/मेहताब आलम Updated Thu, 03 Dec 2015 12:07 AM IST
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बम धमाके में हुई तुषार की मौत के मामले को लगभग एक साल हो गया है। प्रदेश को हिला देने वाले इस बमकांड में अभी तक पुलिस गुनाहगारों तक नहीं पहुंच पाई है। जबकि इस मामले के खुलासे के लिए पुलिस के साथ-साथ खुफिया एजेंसियां भी हर संभव प्रयास कर चुकी है। 

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छह दिसंबर 2014 की दोपहर के समय केएल डीएवी पीजी कालेज के मैदान में एक हिंदू संगठन कार्यक्रम चल रहा था। उसी दौरान कृष्णानगर निवासी छात्र तुषार स्कूल की छुट्टी के बाद घर जा रहा था। कार्यक्रम स्थल के पीछे जा रही रोड पर जब तुषार पहुंचा तो उसे वहां कोई वस्तु पड़ी दिखाई दी।
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जैसे ही उसने उसे उठाया तो एक जोरदार धमाका हुआ तो मासूम तुषार भी उसके साथ काफी ऊंचाई तक उड़ा गया। तुषार की मौके पर ही मौत हो गई। यह बम किसने और क्यों रखा था। इसको लेकर पुलिस, एसओजी, एसटीएफ, आईबी और एनआईए की टीमें जांच पड़ताल में लगी हैं। अब तक घटना को लेकर सैकड़ों लोगों से पूछताछ हो चुकी है।
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घटना की सभी पहलुओं से पड़ताल की जा चुकी है। घटना को एक साल होने में महज तीन दिन बाकी हैं, लेकिन सालभर की जांच में भी दिल दहला देने वाली इस घटना का खुलासा नहीं हो सका है। जांच में अभी तक ठोस में यह भी नहीं पता चल पाया है कि यह कोई आतंकी साजिश थी या फिर कुछ और।

तुषार के परिवार को है इंसाफ का इंतजार
बम धमाके और उसमें हुई तुषार की मौत को एक साल हो गया है। लेकिन तुषार का परिवार अभी भी इससे उबर नहीं पाया है। उन्हें अभी भी लगता है कि मानों यह घटना कल की बात हो। परिवार के लोगों को सबसे बड़ी टीस यह है कि अभी तक तुषार के हत्यारे खुले घूम रहे हैं। वह पकड़े नहीं गए हैं।

तुषार की मौत के इंसाफ के लिए वह कभी प्रधानमंत्री, कभी राष्ट्रपति को कभी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गुहार लगाते रहते हैं। तुषार की मां किरण बेटे का गम भुला नहीं पाई है। उनका कहना है कि जिन्होंने भी वह बम रखा था जिससे उनके बेटे की मौत हुई है। उनका पकड़ना चाहिए। जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा।


यह कहकर वह फफक पड़ती हैं। तुषार के पिता सतीश धीमान ने बताया कि एक साल बीत चुका है। लेकिन, अभी तक बम धमाके के आरोपी पकड़े नहीं जा सके हैं। कहा कि वह अपने बड़े बेटे यानी तुषार के बड़ेे भाई विशाल को सेना में भेजना चाहते हैं। ताकि वह देश की सेवा कर सके।

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