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कोतवाली में दारोगा से भिड़ा भाजपा नेता
Updated Mon, 18 Dec 2017 12:14 AM IST
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रुड़की। बिना परिचय दिए कोतवाल के कमरे में जाने से रोकने पर दारोगा और भाजपा नेता के बीच तीखी नोकझोंक हुई। शोर सुनकर बाहर निकली कोतवाली प्रभारी ने नेता को किसी तरह समझा कर शांत कराया।
कोतवाली और थानों में नेताओं की दखल अंदाजी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे कई मामले देखने में आए हैं जिनमें पुलिस अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव साफ दिखाई दिए। पूर्व में भी गंगनहर कोतवाली में एक मामले को लेकर हुए भाजपाइयों के धरना प्रदर्शन के बाद कोतवाल को यहां से हटाना पड़ा था। हालांकि यह बात दीगर है कि आम आदमी पुलिस पर दबाव बनाना तो दूर कोतवाली में जाकर अपनी बात कहने तक की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता। यही कारण है कि लोग कोतवाली में अपनी बात रखने के लिए रसूखदारों और नेताओं की सिफारिश लगवाते हैं। ऐसे ही किसी मामले में रविवार को एक भाजपा नेता सिफारिश लेकर कोतवाली सिविल लाइंस पहुंचा। जैसे ही वह कोतवाल से मिलने कमरे के भीतर जाने लगा, तभी दारोगा ने बिना परिचय दिए भीतर जाने से रोक दिया। इस पर नेता जी बिफर पड़े और शासन तक अपनी पहुंच होने का हवाला देते हुए दारोगा से उलझ गया लेकिन, दारोगा भी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। शोर सुनकर कोतवाल साधना त्यागी अपने कमरे से बाहर निकली और बमुश्किल नेताजी को शांत कराया। दिनभर नोकझोंक का मामला चर्चा का विषय बना रहा।
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कोतवाली और थानों में नेताओं की दखल अंदाजी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे कई मामले देखने में आए हैं जिनमें पुलिस अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव साफ दिखाई दिए। पूर्व में भी गंगनहर कोतवाली में एक मामले को लेकर हुए भाजपाइयों के धरना प्रदर्शन के बाद कोतवाल को यहां से हटाना पड़ा था। हालांकि यह बात दीगर है कि आम आदमी पुलिस पर दबाव बनाना तो दूर कोतवाली में जाकर अपनी बात कहने तक की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता। यही कारण है कि लोग कोतवाली में अपनी बात रखने के लिए रसूखदारों और नेताओं की सिफारिश लगवाते हैं। ऐसे ही किसी मामले में रविवार को एक भाजपा नेता सिफारिश लेकर कोतवाली सिविल लाइंस पहुंचा। जैसे ही वह कोतवाल से मिलने कमरे के भीतर जाने लगा, तभी दारोगा ने बिना परिचय दिए भीतर जाने से रोक दिया। इस पर नेता जी बिफर पड़े और शासन तक अपनी पहुंच होने का हवाला देते हुए दारोगा से उलझ गया लेकिन, दारोगा भी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। शोर सुनकर कोतवाल साधना त्यागी अपने कमरे से बाहर निकली और बमुश्किल नेताजी को शांत कराया। दिनभर नोकझोंक का मामला चर्चा का विषय बना रहा।
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