किशोरी को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला: फाइनल रिपोर्ट के नाम पर रिश्वत मांगी, दो दरोगाओं पर एफआईआर
आरोप है कि मामले की विवेचना के दौरान तत्कालीन दरोगा मनदीप सिंह ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 3.50 लाख रुपये लिए थे। इसके बाद दोबारा विवेचना शुरू होने पर तत्कालीन दरोगा बलवंत पवार ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की।
विस्तार
एक किशोरी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाने के नाम पर रिश्वत लेने और मांगने के आरोप में दो तत्कालीन दरोगाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने मामले से संबंधित ऑडियो और रिकॉर्डिंग भी अधिकारियों को सौंपी थी। एसपी देहात की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
आरोप है कि मामले की विवेचना के दौरान तत्कालीन दरोगा मनदीप सिंह ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 3.50 लाख रुपये लिए थे। इसके बाद दोबारा विवेचना शुरू होने पर तत्कालीन दरोगा बलवंत पवार ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की।
आरोप है कि रकम नहीं देने पर उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई। किशोरी की मां की शिकायत पर तत्कालीन एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने मामले की जांच की थी। एसपी देहात अभय प्रताप सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों दरोगाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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यह है मामला
मामला पांच जुलाई 2023 को गंगनहर कोतवाली में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने की प्राथमिकी से जुड़ा है। रुड़की के गणेश विहार निवासी महिला ने बताया कि उसकी 17 वर्षीय बेटी देहरादून में रहकर पढ़ाई कर रही थी। वहां रूम पार्टनर ने अपने भाई से परिचय कराया। उस युवक ने बेटी का सिम बदल दिया और चार आरोपी मिलकर किशोरी को ब्लैकमेल और प्रताड़ित करने लगे। जिससे उसने पढ़ाई छोड़ दी और रुड़की लौट आई लेकिन प्रताड़ना जारी रही। जिससे परेशान होकर उसने चार फरवरी 2023 को घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। आरोपित उत्तर प्रदेश के बदायूं और बागपत के रहने वाले हैं।