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तीन साल से गेहूं के बोनस की राह निहार रहे किसान

Tue, 24 Apr 2018 12:32 AM IST
Updated Tue, 24 Apr 2018 12:32 AM IST
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तीन साल से गेहूं के बोनस की राह निहार रहे किसान
रुड़की।
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उत्तराखंड के किसान पिछले तीन साल से गेहूं के बोनस का इंतजार कर रहे हैं। इस बार भी गेहूं खरीद नीति में बोनस का कोई जिक्र नहीं किया गया है, जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश अपने किसानों को दस रुपए का बोनस देने की घोषणा कर चुकी हैं। कांग्रेस सरकार के बाद अब भाजपा सरकार में भी किसान बोनस की राह निहारते रह गए। सरकार के इस निर्णय से किसान संगठनों में रोष पनप रहा है।
प्रतिवर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाता है। इस न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रदेश सरकार किसानों को अतिरिक्त धनराशि बोनस के रूप में देती है। प्रदेश सरकारें अपनी सामर्थ्य के अनुसार बोनस देतीं है। करीब तीन साल पहले कांग्रेस सरकार ने बोनस की घोषणा नहीं की थी। इसीलिए किसानों को सत्ता में आई भाजपा सरकार से काफी उम्मीदें थी, लेकिन भाजपा सरकार ने भी किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसान पिछले साल भी बोनस से वंचित रहे थे। इस वर्ष केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 110 रुपये बढ़ाकर 1735 रुपये क्विंटल घोषित किया है। किसानों को प्रदेश सरकार से उम्मीद थी कि प्रदेश सरकार भी कुछ न कुछ बोनस देगी, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा घोषित की गई गेहूं खरीद नीति में बोनस का कोई जिक्र नहीं किया गया, जिससे साफ है कि प्रदेश सरकार इस बार भी किसानों को बोनस देने के मूड में नहीं है। प्रदेश सरकार अपने पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दस रुपये अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा कर चुकी है।
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गेहूं खरीद नीति में बोनस का कोई जिक्र नहीं किया गया है। पिछले दो-तीन साल से किसानों को बोनस नहीं दिया जा रहा है। क्रय केंद्रों पर पूरी तैयारियां है। एक अप्रैल से गेहूं क्रय केंद्र शुरू हो चुके हैं।
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- मनोज कुमार पुनेठा, जिला सहायक निबंधक

क्या कहते हैं किसान नेता
प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही है, लेकिन एक रुपये भी बोनस देने को तैयार नहीं है, जिससे सरकार की मानसिकता स्पष्ट होती है। प्रदेश सरकार किसानों के कितने हित में है।
-कटार सिंह, किसान क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष
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सांसद, विधायक और अधिकारी अपने वेतन बढ़ाने में मशगूल है। किसानों को लेकर सरकार को कोई चिंता नहीं है। यदि थोड़ी भी चिंता होती तो किसानों का भला करने के बाद अपने बारे में सोचते।
- भाकियू टिकैत मंडल अध्यक्ष, संजय चौधरी

सरकार के पास किसानों का भुगतान करने और बोनस देने के लिए पैसा नहीं है। जिसके लिए सरकार बजट का रोना रोते रहती है, लेकिन विधायकों ने एक झटके में अपना वेतन दो गुने से अधिक बढ़ा लिया है। जिससे सरकार की मानसिकता साफ होती है।
-उत्तराखंड किसान मोर्चा, जिला अध्यक्ष महकार सिंह

जिले का अलग से नहीं होता टारगेट
जिला सहायक निबंधक मनोज कुमार पुनेठा ने बताया कि गेहूं खरीद नीति में जिले का कोई अलग से टारगेट नहीं होता है। जितने भी किसान क्रय केंद्रों पर फसल लेकर आएंगे, सभी की फसल खरीदी जाएंगी।

किसानों की पहली पसंद होते हैं प्राइवेट आढ़ती -
किसान, सरकारी क्रय केंद्रों को नजरअंदाज करते हुए प्राइवेट आढ़तियों को अपनी फसल बेचने में अधिक रुचि दिखाते है। यदि किसानों की मानें तो सरकारी क्रय केंद्रों पर बेची गई फसल का भुगतान कई दिनों बाद खातों में आता है, लेकिन प्राइवेट आढ़तियों फसलों का भुगतान हाथोंहाथ कर देते है, जिससे किसानों को सुविधा होती है। कई बार तो किसान अपने आढ़तियों से फसल बेचने से पहले ही एडवांस में पैसा उठा लेते है।

पंजीकरण भी तो है साहब
यदि कोई किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर फसल को बेचता है। तो इसके लिए उसका पंजीकरण होना अनिवार्य है। किसान अपने खेत की खतौनी, बैंक पास बुक, आधारकार्ड ले जाकर हाथोंहाथ भी क्रय केंद्र पर पंजीकरण करा सकता है। यह पंजीकरण किसान को एक बार कराना होगा।
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जिले में यहां स्थापित किए गए है गेहूं क्रय केंद्र
- मंगलौर, झबरेड़ा, नारसन, लहबोली, बेलड़ा, लाठरदेवा, भगवानपुर, टांडा जलालपुर, बुग्गावाला, इकबालपुर, दाबकी, रायसी, बहादरपुर खादर, भिक्कमपुर, गोवर्धनपुर, मोहनावाला, बादशाहपुर, पथरी, लालढांग, बहाराबाद, हद्दीवाला।

चुड़ियाला में चार साल से बंद पड़े हैं गेहूं क्रय केंद्र
चुड़ियाला। चुड़ियाला क्षेत्र में चुड़ियाला सहकारी संघ पर गेहूं खरीद केंद्र बंद होने से किसानों को अपनी फसल को बेचने को लेकर परेशान होना पड़ता है या फिर बाहर औने पौन दामों पर बेचना पड़ता है।
चुड़ियाला क्षेत्र के किसानों को गेहूं व धान की फसलों को बेचने के लिए चुड़ियाला साधन सहकारी संघ को खरीद केंद्र बनाया जाता था, लेकिन करीब पिछले चार वर्षों से सरकार ने वहां पर कर्मचारी कम होने का हवाला देते हुए खरीद केंद्र को बंद कर दिया था। इसके बाद से इस क्षेत्र के सभी किसान परेशान है। उन्हें अपनी फसलों को बेचने के लिए दस से पंद्रह किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है, या फिर वे अपनी फसलों को देहात में ही छोटे बड़े व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते है। कुछ किसान यूपी में अपने रिश्तेदारों के नाम से खरीद केंद्रों पर अपनी फसलों को बेचने को मजबूर होते हैं। क्षेत्र मे कई छोटे बड़े व्यापारी गेहूं की फसलों को किसानों से कम दाम पर खरीदकर उन्हें यूपी, हरियाणा पंजाब आदि में ले जाकर बेचते हैं, जिसका किसानों सहित प्रदेश को भी नुकसान होता है। किसान ओमपाल सिंह, विश्वास त्यागी, मांगेराम, परमानंद त्यागी, सुधीर कुमार, सतीश, महकार सिंह, मगनसिंह, प्रमोद कुमार, आजाद सिंह आदि ने जिलाधिकारी व जिला कृषि अधिकारी से चुड़ियाला क्षेत्र के बंद पड़े गेहूं खरीद केंद्र को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है। ब्यूरो

मंगलौर में व्यवस्था चाक चौबंद
मंगलौर। सहकारिता विभाग की ओर से नगर में क्रय खोला गया है। इस केंद्र पर बारदाना, तौल कांटा और रखरखाव आदि के लिए पर्याप्त इंतजाम है, लेकिन गेहूं खरीद केंद्र शुरू हुए 23 दिन का समय हो जाने के बाद भी कोई किसान अभी तक फसल बेचने क्रय केंद्र पर नहीं पहुंचा है। केंद्र प्रभारी कुलबीर सिंह ने बताया कि किसानों की फसल खरीदने के लिए पर्याप्त इंतजाम है। ब्यूरो

लक्सर और खानपुर में नहीं हुई कोई खरीद-
लक्सर/खानपुर। लक्सर और खानपुर के गेहूं क्रय केंद्रों पर 23 दिन बाद भी कोई खरीद नहीं हो पाई है। इसके साथ ही क्रय केंद्रों पर संसाधनों का भी अभाव है। अभी तक क्रय केंद्रों पर न तो पर्याप्त मात्रा में बारदाना है और न ही बरसात से बचाने का सामान।
ऐथल बुजुर्ग किसान सेवा सहकारी समिति पर एक भी धान की खरीद नहीं हो पाई है। इसके अलावा भी दाबकी कलां किसान सेवा सहकारी समिति, भिक्कमपुर किसान सेवा सहकारी समिति, रायसी किसान सेवा सहकारी समिति व गोवर्धनपुर व मोहनवाला क्रय पर बनाए गए क्रय केंद्रों पर भी अभी तक सन्नाटा पसरा हुआ है। इतना ही नहीं इन केंद्रों पर कहीं पर्याप्त मात्रा में बारदाना नहीं मिला है तो कहीं बरसात से बचाने के लिए गोदाम की सही व्यवस्था नहीं है। रायसी में गेहूं रखने के लिए गोदाम तक नहीं है। अमर उजाला की टीम ने जब ऐथल बुजुर्ग किसान सेवा सहकारी समिति पर गेहूं खरीदने की बाबत जानकारी की तो केंद्र प्रभारी सतीश कुमार सैनी का कहना था कि बारिश के चलते किसान अपनी उपज लेकर अभी केंद्रों पर नहीं पहुंचे हैं। जबकि केंद्र पर 60 से अधिक किसानों ने अपना गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण जरूर कराया है। इसके अलावा भी अन्य केंद्रों पर लगाए गए कांटे तराजू खाली ही मिले। इसके अलावा दाबकी के प्रभारी आजाद व मोहनवाला के प्रभारी जयकुमार का कहना है कि अभी तक एक भी दाने की खरीद नहीं हो पायी है। ब्यूरो


पिछले साल एक भी किसान ने नहीं बेची थी गेहूं
बुग्गवाला। बुग्गावाला क्षेत्र में बंजारेवाला सहकारी समिति में गेहूं खरीद केंद्र बनाया गया है। क्रय केंद्र पर गेहूं की खरीद को लेकर पर्याप्त इंतजाम किये गए है, लेकिन अभी तक एक भी किसान गेहूं बेचने नहीं आया है। समिति के प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि पिछले साल भी समिति पर एक भी किसान ने गेहूं नहीं बेचा था। क्योंकि विभाग की ओर से खातों में पैसा भेजा जाता है, लेकिन प्राइवेट आढ़ती हाथोंहाथ भुगतान करते है। जिससे किसान क्रय केंद्र का रुख नहीं करते है। ब्यूरो
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