{"_id":"5ade25624f1c1b9f098b62d4","slug":"171524508002-roorkee-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रस्तावित होने के बाद भी आज तक शुरू नहीं हुआ चकबंदी का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रस्तावित होने के बाद भी आज तक शुरू नहीं हुआ चकबंदी का काम
Updated Tue, 24 Apr 2018 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लक्सर। भगतनपुर गांव में सरकार द्वारा दस साल पहले प्रस्तावित की गई चकबंदी की प्रक्रिया आज तक शुरू नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने एसडीएम से इसकी शिकायत कर गांव में जल्द से जल्द चकबंदी प्रक्रिया को शुरू कराने की मांग की है। एसडीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए चकबंदी विभाग से रिपोर्ट तलब की है।
सरकार द्वारा वर्ष 2007 में लक्सर विकासखंड के अनेक गांव को चकबंदी के लिए प्रस्तावित किया गया था। इन गांव में तहसील का भगतनपुर गांव भी प्रस्तावित था। तहसील प्रशासन द्वारा राजस्व से संबंधित तमाम दस्तावेज भी चकबंदी विभाग को सौंप दिए गए थे, लेकिन दस साल से अधिक का समय बीतने के बाद भी अभी तक गांव में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। यही नहीं चकबंदी प्रक्रिया शुरू करने के लिए लेखपालों ने रकबे की न तो पैमाइश की और न ही मौके पर जाकर आकार पत्र 2 क तैयार किया है, जबकि कई गांव में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राजस्व अभिलेख तहसील में न होने की वजह से किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को ग्रामीणों ने एसडीएम से मुलाकात कर मामले की शिकायत की। मामला संज्ञान में आने के बाद एसडीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी प्रकट की है। उन्होंने चकबंदी विभाग से इस बाबत रिपोर्ट तलब की है। उधर एसीओ अनिल कुमार सिंघल का कहना है कि विभाग द्वारा चकबंदी प्रक्रिया का कार्य शुरू कर दिया गया था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते उसे बीच में ही रोकना पड़ा है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। शासन से आदेश आने के बाद अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
सरकार द्वारा वर्ष 2007 में लक्सर विकासखंड के अनेक गांव को चकबंदी के लिए प्रस्तावित किया गया था। इन गांव में तहसील का भगतनपुर गांव भी प्रस्तावित था। तहसील प्रशासन द्वारा राजस्व से संबंधित तमाम दस्तावेज भी चकबंदी विभाग को सौंप दिए गए थे, लेकिन दस साल से अधिक का समय बीतने के बाद भी अभी तक गांव में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। यही नहीं चकबंदी प्रक्रिया शुरू करने के लिए लेखपालों ने रकबे की न तो पैमाइश की और न ही मौके पर जाकर आकार पत्र 2 क तैयार किया है, जबकि कई गांव में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राजस्व अभिलेख तहसील में न होने की वजह से किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को ग्रामीणों ने एसडीएम से मुलाकात कर मामले की शिकायत की। मामला संज्ञान में आने के बाद एसडीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी प्रकट की है। उन्होंने चकबंदी विभाग से इस बाबत रिपोर्ट तलब की है। उधर एसीओ अनिल कुमार सिंघल का कहना है कि विभाग द्वारा चकबंदी प्रक्रिया का कार्य शुरू कर दिया गया था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते उसे बीच में ही रोकना पड़ा है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। शासन से आदेश आने के बाद अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन