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पशुलोक में कब्जा हटाने गई टीम फिर लौटी बैरंग

Fri, 11 Oct 2019 01:15 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2019 01:15 AM IST
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The team which went to take possession in Pashulok, returned again
पशुपालन विभाग के अधिकारियों को आत्मदाह की चेतावनी देते मूल विस्थापित गंगा प्रसाद डोभाल। - फोटो : RISHIKESH
पशुलोक में कब्जा हटाने गई पशुपालन विभाग की टीम को एक बार फिर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। मामला इतना गरमा गया कि देहरादून से विभाग के निदेशक डॉ. केके जोशी दोपहर यहां लोगों को समझाने पहुंचे लेकिन लोगों के सख्त तेवर के कारण वह बैरंग लौट गए। बीते रोज पशुलोक में जेसीबी की मदद से की गई खुदाई के बाद बृहस्पतिवार की सुबह चारदीवारी करने को मजदूर और रेत से भरा ट्रक पहुंचा, लेकिन स्थानीय लोगों ने मजदूरों और ट्रक को वापस भिजवा दिया।
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इसके बाद यहां परियोजना निदेशक राकेश वर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे। उन्हें भी स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने तुरंत मौके से पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. केके जोशी को सूचना दी। दोपहर करीब पौने तीन बजे निदेशक पशुलोक पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने उन्हें भी घेर लिया और कार्रवाई पर अपना विरोध जताया। स्थानीय व्यापारी ललित मोहन मिश्र ने कहा कि किसी भी कार्य को करने से पूर्व सरकार की ओर से नोटिस दिए जाते हैं, पूर्व सूचना के बाद ही कार्य होता है, लेकिन यहां रात के समय सीमांकन का कार्य किया जा रहा है।
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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विरोध के बावजूद भी पशुपालन विभाग जबरन कार्रवाई करता है, तो सामूहिक रूप से आत्महत्या करेंगे और इसका जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी। इस दौरान अपर निदेशक डॉ. अशोक, डॉ. प्रेम कुमार, व्यापारी सत्य अग्रवाल, सूरज सिंह राणा, जितेंद्र बर्थवाल, प्रतीक सिंघल, आशीष कुकरेती, दीप सनेजा, महावीर जैन आदि उपस्थित रहे।
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जमीन गई, तो परिवार के साथ करूंगा आत्महत्या
जब पशुपालन विभाग के निदेेशक डॉ. केके जोशी लोगों को मनाने पहुंचे, उसी समय पुनर्वास की ओर से बसाए गए मूल विस्थापित गंगा प्रसाद डोभाल भी अपनी जमीन के कागज प्रपत्र लेकर पहुंचे। उन्होंने निदेशक को अपनी जमीन संबंधी कब्जा प्रमाणपत्र, रजिस्ट्री सभी कागजात दिखाए। उन्होंने कहा कि उनके पिता जी की 150 नाली जमीन थी। कार्रवाई से उनकी पत्नी की तबियत खराब हो गई है। यदि जमीन को जबरन छीना गया तो वह परिवार के साथ आत्महत्या करेंगे। इसकी जिम्मेदारी समस्त अधिकारियों की होगी।

ये है मामला
दरअसल रमेश जायसवाल नामक व्यक्ति ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने कोर्ट को पशुलोक की भूमि पर कुछ लोगों की ओर से अवैध रूप से कब्जा किया जाना बताया था। पुनर्वास विभाग ने जिन लोगों को जितनी जमीन दी थी, इससे ज्यादा पशुलोक की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है। जनहित याचिका पर संज्ञान लेकर कोर्ट ने विभाग को अपनी भूमि से कब्जा हटाने को आदेशित किया। इसके बाद विभाग ने पशुलोक में सर्वे किया तो विभाग की 4.6 एकड़ भूमि अतिरिक्त कब्जे में पाई गई। पुनर्वास विभाग ने 4 एकड़ से ज्यादा भूमि गलत तरीके से विस्थापितों को आवंटित कर दी।
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